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गुड़ी पड़वा 2017: गुड़ी पड़वा पूजा विधि: जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि

गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में सभी लोग अपने घरों में गुड़ी की स्थापना करते हैं। गुड़ी एक बांस का डंडा होता है जिसे हरे या पीले रंग के कपड़े से सजाया जाता है।

Author Updated: March 28, 2017 1:01 PM
महाराष्ट्र में इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है।

गुड़ी पड़वा के दिन हिन्दू पंचाग का शुभारंभ होता है। देश में यह त्योहार उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग इस पर्व की एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं। महाराष्ट्र में इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस त्योहार को पूरे रीति रिवाजों के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस दिन आप को हर किसी के घर के दरवाजे पर रंगोली बनी हुई नजर आएगी। इसके अलावा रंगोली के साथ स्वास्तिक का ​निशान बनाया जाता है ऐसा माना जाता है ​कि रंगोली और स्वास्तिक का निशान बनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है। इस दिन लोग अपने घर के दरवाजों पर आम के पत्तों को तोरण बांधी जाती है क्योंकि तोरण को शुभ मना जाता है।

इस दिन लोग सुबह उठकर अपने शरीर पर बेसन और तेल का उबटन लगाकर स्नान करते हैं और नए वस्त्र धारण कर भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। महाराष्ट्रीयन लोगों के लिए इस त्योहार का बहुत महत्व है, महाराष्ट्र में लोग इस दिन पर नए चीजें, नए आभूषण और घर खरीदने के लिए बेहद ही शुभ मानते हैं। इस त्यौहार को दो अलग-अलग दिनों में मना जाएगा। अपने पंचाग के अनुसार मराठी समाज के लोग इसे 28 मार्च को मनाएंगे। वहीं बाकी जगह 29 मार्च को मनाया जाएगा। पंचांगों की अलग-अलग गणना के कारण रामनवमी भी इस बार दो दिन मनाई जाएगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार गुड़ी पड़वा की पूजा का शुभ मुहर्त 28 मार्च सुबह 8:26 से लेकर 29 मार्च 5:44 तक है। हिन्दू पंचाग के अनुसार अमावस्या सुबह 8:27 पर खत्म होगी। इसके बाद ही 8:27 से पड़वा दिन की शुरूआत हो जाएगी। गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में सभी लोग अपने घरों में गुड़ी की स्थापना करते हैं। गुड़ी एक बांस का डंडा होता है जिसे हरे या पीले रंग के कपड़े से सजाया जाता है।

इस कपड़े को बांस के डंडे पर सबसे ऊपर बांधा जाता है। इसके अलावा माला, इस पर नीम और आम के पत्तें भी बांधें जाते हैं। सबसे ऊपर तांबे या चांदी का लोटा रखा जाता है। गुड़ी को लोग भगवान बह्मा के झंडे के रूप में देखते हैं। इसकी स्थापना कर लोग भगवान विष्णु और बह्मा के मंत्रों का उच्चारण कर उनसे प्रार्थना करते हैं।

 

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