ज्यादातर लोगों के लिए अपना घर खरीदना जिंदगी के सबसे बड़े सपनों में से एक होता है। नौकरी शुरू करने के बाद लोग धीरे-धीरे बचत करते हैं और वर्षों तक पैसे जोड़ने के बाद घर खरीदने की योजना बनाते हैं। काफी लोग किराए के मकान से शुरुआत करते हुए अपने खर्चों में कटौती कर कमाई का एक हिस्सा घर खरीदने के लिए बचाते हैं। कई मध्यवर्गीय परिवारों में तो घर खरीदना जीवन की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। यह परिवार के लिए सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं होती, बल्कि मेहनत, बचत और वर्षों के इंतजार का नतीजा होता है।
वर्तमान समय में घर खरीदने के लिए एक मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। काफी लोग अपने इस सपने को पूरा करने के लिए होम लोन का सहारा लेते हैं। लोन पर घर खरीदना आसान जरूर किया है, लेकिन इसके साथ लंबे समय तक EMI चुकाने की जिम्मेदारी भी जुड़ जाती है। कई लोग अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा हर महीने होम लोन की किस्त में खर्च करते हैं। लोन का असर परिवार के दूसरे खर्चों, बचत, बच्चों की पढ़ाई, यात्रा और भविष्य की आर्थिक योजनाओं पर भी पड़ सकता है। आज के समय में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में घर खरीदना अब हर किसी के बस की बात नहीं है। अब तक की पीढ़ी भले ही घर खरीदना अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हो, लेकिन जेनरेशन Z इस सोच के बिलकुल विपरीत है।
Gen-Z के लिए घर खरीदने से ज्यादा क्या मायने रखता है
भारत जैसे देश में लंबे समय से लोगों के लिए जिंदगी का एक तय रास्ता माना जाता रहा है कि, 25 की उम्र में नौकरी, 30 की उम्र में शादी, फिर अपना घर और एक खुशहाल जिंदगी। लेकिन घर खरीदने को लेकर जेनरेशन Z की सोच काफी हद तक बदल चुकी है। इस पीढ़ी के लिए आर्थिक आजादी का मतलब सिर्फ बड़ी सैलरी कमाना नहीं है। उनके लिए असली आर्थिक आजादी अपने फैसले खुद लेने की क्षमता है। इसमें नौकरी बदलना, शहर बदलना, घूमना-फिरना, निवेश करना, साइड हसल शुरू करना या अपनी जिंदगी को अपनी रफ्तार से जीना शामिल है। आर्थिक मामलों को लेकर बढ़ती जागरूकता का असर अब जिंदगी के बड़े फैसलों पर भी दिख रहा है। घर खरीदने को लेकर सवाल अब सिर्फ “क्या मुझे अपना घर चाहिए’ की जगह ‘क्या मुझे अभी घर खरीदने की जरूरत है’ है बन गया है।
Gen-Z कहां खर्च कर रही अपनी कमाई
जेनरेशन जी का मानना है कि उसके पास पैसा और विकल्प दोनों मौजूद रहें। यानी जरूरत पड़ने पर नौकरी बदली जा सके, दूसरे शहर जाया जा सके, घूमने का प्लान बना सके और अपना कोई काम शुरू किया जा सके। इसके साथ ही जेनरेशन जी सबसे पहले इन चीजों का अनुभव करना चाहती है:
अनुभव पर खर्च: जेनरेशन जी के लिए घूमना-फिरना सिर्फ छुट्टी मनाना नहीं, बल्कि जिंदगी का अनुभव हासिल करना भी है। वीकेंड ट्रिप, नए शहरों की यात्रा, कॉन्सर्ट, दोस्तों के साथ छुट्टियां उनके खर्च का हिस्सा बन रहे हैं।
निवेश और बचत: आज की युवा पीढ़ी घर खरीदने के लिए बड़ी रकम डाउन पेमेंट में लगाने के बजाए पैसा म्यूजुअल फंड, इक्विटी और दूसरे निवेश विकल्पों में लगाना पसंद कर रही है।
करियर और खुद पर खर्च: जेनरेशन जी के लिए करियर में बदलाव काफी मायने रखता है। कोई नौकरी बदलना चाहता है, कोई आगे की पढ़ाई करना चाहता है, तो कोई स्टार्टअप या साइड हसल शुरू करना चाहता है। ऐसे में बड़ी EMI उन्हें आर्थिक रूप से बांध सकती है। इसलिए वे अपनी कमाई का इस्तेमाल स्किल सीखने, कोर्स, बेहतर उपकरण, बिजनेस या करियर से जुड़े दूसरे खर्चों पर करना पसंद कर रहे हैं।
बेहतर लाइफस्टाइल: अच्छा खाना, कैफे, फिटनेस, मनोरंजन, गैजेट्स और सोशल लाइफ भी इस पीढ़ी के खर्च का हिस्सा है।
इस बारे में 26 वर्षीय अगम श्रीवास्तव, जो एक बड़ी कंपनी में 17 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, “अगम का कहना है कि घर खरीदने जैसे बड़े फैसले लेने में फिलहाल वह सक्षम नहीं है। उनका कहना है कि फिलहाल वह अपनी लाइफस्टाइल को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। उनका कहना है कि प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं और घर बिना लोन के नहीं खरीदा जा सकता। घर खरीदने का मतलब किसी बंधन से बंध जाना है। इसके बाद जरूरी नहीं है कि मैं जितना अभी घूमने, रेस्टोरेंट में खाने या गैजेट खरीदने में आजाद महसूस करता हूं, आगे कर पाऊं।”
वहीं, 25 वर्षीय अनुज यादव ने बताया कि घर खरीदने जैसे बड़े फैसले वह अभी नहीं ले सकते हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह प्रॉपर्टी के बढ़े हुए दाम हैं। “अनुज का कहना है कि घर खरीदना उनका सपना है, लेकिन उससे पहले अपने छोटे-छोटे सपनों को पूरा करना जरूरी है। उनका कहना है कि डाउन पेमेंट करके घर ले सकते हैं, लेकिन इसके बाद खुलकर जीने वाली सोच को कम करना पड़ेगा। वह कई जगहों पर छोटे-छोटे हिस्सों में पैसे निवेश करते हैं।” अनुज का कहना है कि वह अनुभव के लिए महीने में एक बार छोटी यात्रा पर जाते हैं। करियर ग्रोथ के लिए नई-नई स्किल्स पर फोकस कर रहे हैं।”
27 वर्षीय मनीष सिंह पेशे से वकील हैं। उनका मानना है कि, “पहले अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जी लें, उसके बाद घर खरीदने के बारे में सोचेंगे। घर खरीदने का मतलब हर महीने EMI के तौर पर एक बड़ी रकम अदा करनी होगी और जरूरी नहीं है कि जितनी कमाई अभी हो रही है, आगे भी हो। उनका कहना है कि स्थिरता जरूरी है। घर खरीदने के बाद किसी यात्रा पर जाने, रेस्टोरेंट में खाने, पार्टी, कुछ नया शुरू करने और कहीं पर निवेश करने से पहले कई बार सोचना होगा।”
Gen-Z की प्राथमिकता
जेनरेशन जी की अपनी दुनिया अलग होती है, जिसमें वह पूरी तरह आजादी से जीना पसंद करते हैं। उनके लिए पैसे जोड़ने से ज्यादा जरूरी खुश रहना है। वह अपनी पसंद के अनुसार खाना खाने पर खुल कर पैसे खर्च करते हैं। देश-विदेश घूमने से लेकर नौकरी बदलने और निवेश करने तक जैसे बड़े फैसले खुलकर और बिना किसी दबाव के लेना पसंद करते हैं। जेनरेशन जी की प्राथमिकता घर खरीदने से ज्यादा खुशहाल जिंदगी जीना है।
खत्म नहीं हुआ सपना, सिर्फ सही समय का इंतजार
ऐसा कहना बिल्कुल गलत होगा कि जेनरेशन जी के मन से घर खरीदने की इच्छा खत्म हो चुकी है। बढ़ती महंगाई में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजें काफी महंगी हैं। ऐसे में वह सबसे पहले वर्तमान समय में जरूरत की चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
“जून 2026 में डीलॉइट के एक सर्वे में बताया गया कि करीब 55% Gen Z ने अपनी आर्थिक स्थिति के कारण जिंदगी के बड़े फैसलों को टाल दिया। इससे पता चलता है कि यह पीढ़ी पारंपरिक समयसीमा पर दोबारा विचार कर रही है और तब तक इंतजार करना चाहती है, जब तक कोई फैसला आर्थिक रूप से सही न ले।”
यानी जेनरेशन जी घर खरीदने जैसे बड़े फैसले को लेने के लिए सही समय का इंतजार करते हैं।
लोन लेने के लिए तैयार क्यों नहीं है
जेनरेशन जी आर्थिक रूप से जागरूक जरूर है, लेकिन लोन जैसे बड़े फैसले के लिए अभी तैयार नहीं हैं। दरअसल, डिजिटल दुनिया ने युवाओं के लिए कमाई के कई नए रास्ते खोले हैं। आज के समय में नौकरी और करियर को पहले से ज्यादा अलग-अलग तरीकों से आगे बढ़ाया जा सकता है।
2026 में लिंक्डइन की एक स्टडी सामने आई थी, जिसमें बताया गया कि भारत में 75% जेनरेशन जी एंटरप्रेन्योर की कमाई के एक से ज्यादा स्रोत हैं।
आज कई युवा फ्रीलांसिंग, बिजनेस, कंटेंट क्रिएशन और दूसरे कामों से एक साथ कमाई कर रहे हैं। लेकिन कमाई के ज्यादा विकल्प होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि आमदनी हमेशा स्थिर भी रहे। इनमें पैसे कम और ज्यादा होते रहते हैं, ऐसे में किसी बड़े फैसले को अचानक लेने का मतलब एक बड़ा जोखिम उठाना हो सकता है।
घर खरीदने में देरी मजबूरी या समझदारी
घर की कीमतें बढ़ने के कारण यह सोच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि कब और कैसे फैसला लिया जाए। भारत के कई बड़े शहरों में पिछले कुछ समय से जमीन, घर और अन्य प्रॉपर्टी के दाम तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में जेनरेशन जी के लिए घर खरीदने में देरी करना मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा आर्थिक फैसला भी हो सकता है। अपना घर आजादी, स्थिरता और अपनेपन का एहसास जरूर दे सकता है, लेकिन इसके साथ लिया गया एक बड़ा लोन कभी-कभी एक जगह बांधने जैसा भी महसूस करा सकता है।
कुल मिलाकर जेनरेशन जी बचत, निवेश और भविष्य के दूसरे फैसलों पर बहुत ज्यादा आर्थिक दबाव न पड़े वाली सोच के साथ आगे बढ़ रही है। जेनरेशन जी की प्राथमिकताएं सिर्फ घर खरीदना नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता के साथ अपनी पसंद की जीवनशैली जीना है।
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