कभी जेनरेशन जी (Gen Z) को लेकर मजाक उड़ाने वाले अब उनके तौर-तरीकों के लेकर काफी गंभीर हैं। काफी लोग तो उनके तौर-तरीकों को पसंद भी करते हैं और अपने जीवन में अपनाने की कोशिश भी करते हैं। आज कई ऐसे शब्द हैं जिनके जनक जेनरेशन जी ही माने जाते हैं। जेन जी के बात करने का तरीका, सोचने का तरीका, चीजों को भांपने का नजरिया, रिश्तों में रहने, पहनावे से लेकर पैसे खर्च करने और बचत करने के तरीके भी काफी अलग हैं। वह कल की बजाय आज में जीना ज्यादा बेहतर समझते हैं। ये पीढ़ी चीजों में उलझने के बजाय उसे छोड़ देना ज्यादा जरूरी समझती है। जब बात पैसे के खर्च और बचत की आती है तो जेनरेशन जी इसमें में पिछली पीढ़ी से दो कदम आगे है और उनके इस तरीके को ‘लाउड बजटिंग’ नाम दिया गया है।

‘लाउड बजटिंग’ कोई नया शब्द नहीं है, यह पहले से ही लोगों के बीच था लेकिन प्रचलन में साल 2023 में आया। लेकिन इसे अपनी लाइफ में अगर कोई बेहतर तरीके से अपना रहा है तो वह है जेनरेशन जी। आइए जानते हैं लाउड बजटिंग क्या है और जेनरेशन जी इसके जरिए कैसे सोच समझकर पैसे खर्च करती है और बचाती है।

लाउड बजटिंग का मतलब क्या है

सरल शब्दों में बात करें तो ‘लाउड बजटिंग’ का मतलब होता है पैसे को लेकर झिझकने के बजाए अपनी आर्थिक स्थिति और सीमा के बारे में खुलकर बताना और उसी हिसाब से खर्च करना। मान लीजिए कि आप हर महीने 50,000 रुपये कमाते हैं और हर माह 10,000 रुपये की अलग से फोन, लैपटॉप खरीदने या कोई अन्य जरूरी काम करने के लिए बचत करते हैं। अब इसी बीच कोई दोस्त कहीं ट्रिप पर जाने, पार्टी करने के लिए या बाहर खाने-पीने के लिए कहे… आपके पास पहले से 10,000 रुपये हैं आप चाहे तो ट्रिप पर, पार्टी या खाने-पीने जा सकते हैं। लेकिन अगर आप ये कहते हुए मना कर देते हैं कि “मेरा बजट अभी नहीं है, मैं कुछ बचत कर रहा हूं ताकि जरूरी सामान खरीद सकूं।” इसी को लाउड बजटिंग कहते हैं। यानी की अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बिना झिझक दूसरे के सामने व्यक्त करना।

शर्म नहीं उपलब्धि

कम बजट या कम कमाई के बारे में बताने में अधिकतर लोग शर्म महसूस करते हैं। अक्सर हम अपने घर या आसपास यह देखते आए हैं कि पैसे खर्च करने के नाम पर काफी लोग तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। अपने ही माता-पिता को ले लें तो कई बार महंगी चीजों को देखकर वह बहाने बनाते हैं या कोई और तर्क देकर छोड़ देते हैं। दरअसल, काफी लोग इस प्रवृत्ति के होते हैं कि उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति बताने में शर्म आती है। उन्हें लगता है कि लोग उन्हें कम आंकेंगे। अगर कोई चीज बजट से बाहर है तो वह उसकी जगह दूसरे विकल्प तलाशते हैं। लेकिन जेनरेशन जी इसे शर्म नहीं, बल्कि उपलब्धि मानती है।

“कई बार ऐसा होता है कि रेस्टोरेंट में किसी के साथ खाना खाने गए तो 2,000 रुपये का बिल आया। लेकिन आप उसमें से सिर्फ 500 रुपये का ही भोजन करते हैं। अक्सर लोग पूरा बिल चुका देते हैं। लेकिन लाउड बजटिंग में सीधे अपने हिस्सा का बिल देने की पेशकश की जाती है, ऐसे में आपको 1500 रुपये अतिरिक्त नहीं देना पड़ेगा। यानी ‘मैंने कितना खर्च किया’ की जगह ‘मैंने कितना बचाया’ वाली सोच काम करती है।”

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

  • ‘द गार्जियन’ में छपे एक लेख में बैंक ऑफ अमेरिका के एक हालिया सर्वे का हवाला देते हुए बताया गया है कि, जेनरेशन जी के 42 फीसदी लोग ‘लाउड बजटिंग’ अपनाते हैं। इसका मतलब बहुत आसान है। जब आप किसी चीज का खर्च नहीं उठा सकते, तो चुपचाप दूसरों के साथ चलने और अपनी क्षमता से ज्यादा पैसे खर्च करने बजाए खुलकर कह देना कि “मैं इतना खर्च नहीं उठा सकता।”
  • वित्तीय सेवा कंपनी चार्ल्स श्वाब एंड कंपनी के मुताबिक, लाउड बजटिंग ने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में खुलकर बात करना आसान और प्रभावी बना दिया है।
  • इस लेख के अनुसार, सोशल मीडिया पर मिलेनियल्स को वित्तीय सलाह देने वाली ‘ब्रोक जेनरेशन’ की संस्थापक एमा एडवर्ड्स कहती हैं कि, लाउड बजटिंग का मतलब अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में साफ-साफ बताना है। अगर कोई चीज आपके आर्थिक लक्ष्य, आपकी प्राथमिकताओं या आपकी क्षमता के मुताबिक नहीं है, तो उसे साफ कह देना चाहिए। अक्सर लोगों को लगता है कि उनकी आर्थिक स्थिति की वजह से दूसरों को परेशानी नहीं होनी चाहिए या उन्हें यह नहीं बताना चाहिए कि वे बजट के हिसाब से चल रहे हैं।

कैसे करें लाउड बजटिंग

  • आप अपने पैसों की समस्या के बारे में खुलकर बात करें।
  • अगर किसी चीज का खर्च नहीं उठा सकते तो उसके बारे में साफ कहें।
  • साफ कहें कि रेस्टोरेंट, कॉनसर्ट या घूमने की जगह जाने का खर्च उठा सकते हैं, लेकिन आप पैसे खर्च नहीं करना चाहते।
  • अपने खर्चों के बारे में खुलकर बात करें।
  • मना करने से हिचकिचाएं नहीं।

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द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे लोग खुद को दोष नहीं देते हैं, बल्कि महंगाई को जिम्मेदार ठहराते हैं। बढ़ती जीवन-यापन लागत और कम वेतन वृद्धि के बीच जेनरेशन जी अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में खुलकर और साफ-साफ कहती है। जो लोग ईमानदारी पसंद करते हैं, वह आपकी स्थिति को समझेंगे। अगर कोई नहीं समझता है, तो वह उसकी समस्या है, आपकी नहीं।

व्यापार में पहले से ही चलन में है लाउड बजटिंगॉ

उम्रदराज और अनुभवी छोटे कारोबारियों को लाउड बजटिंग का तरीका बेहतर तरीके से पता है। वह इसे लंबे समय से ही अपनाए हुए हैं। वह अक्सर किसी भी चीज को खरीदने से पहले जमकर बार्गेनिंग करते हैं। वह चाहते हैं कि उसे कम से कम कीमत में खरीदें, ताकि मुनाफा अधिक हो। वह अक्सर सामान बेचते वक्त यह कहते हैं कि इसमें बचत ही नहीं है, बस पेट पालने के लिए चला रहे हैं। 1-2 रुपये प्रति सामान बच जाता है।

काफी लोग ऐसे भी हैं जिनके पास पैसे तो हैं लेकिन वह उसे फालतू चीजों पर खर्च नहीं करते। पुरानी कार से चलेंगे, सामान्य रेस्टोरेंट में भोजन करेंगे, फ्लाइट के बजाय बस या ट्रेन में सफर करेंगे। वह किसी को यह नहीं बताते कि उनके पास महंगी चीजें खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा है। ऐसे करना उनकी बनाई हुई छवि को खराब कर देगा। वे गरीब नहीं हैं, बस उन्हें पूरी कीमत चुकाना पसंद नहीं है। यह भी लाउड बजटिंग की रणनीति का हिस्सा है।

लाउड बजटिंग और कंजूसी में फर्क

पैसे न खर्च करने वालों को अक्सर लोग कंजूस कहते हैं। लेकिन लाउड बजटिंग और कंजूसी दोनों काफी अलग हैं। कंजूसी में व्यक्ति जरूरत या उचित खर्च होने के बावजूद पैसा खर्च करने से बचता है। जबकि, लाउड बजटिंग में व्यक्ति अपनी आय और लक्ष्यों के हिसाब से तय करते हैं कि पैसे को कहां खर्च करने की जरूरत है और कहां नहीं।

लाउड बजटिंग ट्रेंड की शुरुआत कैसे हुई

लाउड बजटिंग शब्द साल 2023 में प्रचलित हुआ था। इस शब्द को टिकटॉक क्रिएटर और कॉमेडियन ‘लुकास बैटल’ ने लोकप्रिय किया था। उन्होंने इसे उस समय के क्वाइट लग्जरी ट्रेंड के मजाकिया जवाब के तौर पर बताया था। जहां क्वाइट लग्जरी में महंगी लेकिन दिखने में सादगी भरी चीजों पर खर्च करना चर्चा में था, तो वहीं लाउड बजटिंग का संदेश था कि, पैसा खर्च करना ही स्टेटस नहीं है, पैसे बचाना भी गर्व की बात हो सकती है। इसी के बाद से यह शब्द प्रचलन में आया और आज के समय में एक बड़ी युवा पीढ़ी इसे अपनी लाइफ में अमल कर रही है।

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