योगी राज में घट गई यूपी की जीडीपी, बेरोजगारी ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ी

साल 2011 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की जीडीपी 6.9% की दर से बढ़ रही थी। हालांकि 2017 से 2020 के बीच यह घटकर 5.6% की दर पर आ गई।

Yogi Adityanath, Akhilesh Yadav, Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के सुगबुगाहट के बीच राज्य की योगी सरकार की नीतियों और कामकाज की चर्चा और समीक्षा भी हो रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2017 में योगी आदित्यनाथ के यूपी की गद्दी संभालने के बाद एक तरफ राज्य की जीडीपी में गिरावट आई तो दूसरी तरफ शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बेरोजगारी भी बढ़ी। उधर, सोशल सेक्टर के खर्च में भी कटौती हुई।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2011 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की जीडीपी 6.9% की दर से बढ़ रही थी। हालांकि 2017 से 2020 के बीच यह घटकर 5.6% की दर पर आ गई। इसी तरह उत्तर प्रदेश में साल 2011 से 2017 के बीच सोशल सेक्टर पर जितना खर्च किया जा रहा था, इसमें भी 2.6% की कटौती कर दी गई।

ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में बढ़ी बेरोजगारी: यूपी में रोजगार के मोर्चे पर भी झटके लगे। साल 2011-12 में शहरी इलाकों में 1000 में से 41 लोग बेरोजगार थे। 2017-18 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 97 तक पहुंचा और 2018-19 के बीच 106 तक पहुंच गया।

ग्रामीण इलाकों की बात करें तो 2011-12 के बीच प्रति 1000 में से 9 लोग बेरोजगार थे। 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 55 तक पहुंच गया। हालांकि 2018-19 में थोड़ा घटकर 43 तक आया।

आपको बता दें कि पिछले साल फरवरी (फरवरी 2020) में यूपी के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि राज्य में कुल 33.94 लाख लोग बेरोजगार हैं।  जबकि 30 जून 2018 तक यह आंकड़ा 21.39 लाख था। यानी जून 2018 से फरवरी 2020 के बीच बेरोजगारों की संख्या 58.43 प्रतिशत तक बढ़ गई।

योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद सरकार की तरफ से लगातार अपराधियों पर लगाम कसने का दावा किया गया। ताबड़तोड़ एनकाउंटर भी किए गए, लेकिन हाथरस जैसी घटनाओं ने सरकार के दावे पर सवाल खड़े किए। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 के बाद खासकर दलितों के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई। साल 2017 में जहां दलितों के खिलाफ होने वाली कुल आपराधिक घटनाएं 27.7% थीं। वहीं, 2019 में ये बढ़कर 28.6 प्रतिशत तक पहुंच गई।

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