गौर गोपाल दास भारत के प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर में से एक हैं। उन्होंने इंजीनियर की नौकरी छोड़कर अपने जीवन को अध्यात्म के लिए समर्पित कर दिया। उन्हें चाहने वाले न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया में भी हैं। वह अपने प्रेरणादायक बातों से लोगों के जीवन में सकारात्मकता लाने की कोशिश करते हैं। कहानियों के माध्यम से वह जीवन में खुशी और उद्देश्य को खोजने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं।
इस आधुनिक युग में लोग काम में इतने व्यस्त हैं कि उनके पास खुद के लिए समय नहीं है। कई बार लोग छोटी-छोटी चीजों में इस तरह उलझ जाते हैं, कि जैसे कोई बड़ी परेशानी आ गई हो। गौर गोपाल दास लोगों को सही रास्ते पर चलने की सीख देते हैं। इसके साथ ही समस्याओं से कैसे बाहर निकला जाए इस पर भी वह बात करते रहते हैं। अगर उनकी बातों को जीवन में अमल कर लिया जाए तो तमाम परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।
सुख और दुख जीवन के अहम हिस्सा हैं। यह अंतिम समय तक साथ नहीं छोड़ने वाले। गौर गोपाल दास बताते हैं कि व्यक्ति अगर तीन बातों को नजरअंदाज कर दे तो उसकी तमाम परेशानियां खत्म हो सकती हैं। ये तीनों ही जीवन के सबसे बड़े शत्रु के समान माने जाते हैं। गौर गोपाल दास कबीर दास के दोहे का जिक्र करते हुए कहते हैं, ‘चिंता से चतुराई घटे, दुख से घटे शरीर, लोभ से धन घटे कह गए दास कबीर।’
1- दुख
गौर गोपाल दास कहते हैं कि दूसरा जो हर किसी को नजरअंदाज करना चाहिए वह है दुख। जब बहुत ज्यादा दुख मन में होता है तो इससे शरीर घटने लगता है। वह कहते हैं कि, बर्तन में खिचड़ी पके तो बीमार व्यक्ति भी ठीक हो सकता है। लेकिन अगर दिमाग में खिचड़ी पके तो अच्छा इंसान भी बीमार हो जाता है। इसलिए दुख के समय कभी व्याकुल नहीं होना चाहिए। इस दौरान परिस्थिति का हंसते-हंसते सामना करना चाहिए। क्योंकि, दुख के ही बाद तो सुख आता है।
2- लोभ
लोभ ऐसी चीज है जो बड़े से बड़े व्यक्ति को बर्बाद कर सकती है। लोभी व्यक्ति कभी खुश नहीं रहता है। उसे हमेशा धन या फिर अन्य चीजों की चाहत बढ़ती रहती है। गौर गोपाल दास कहते हैं कि लोभ से धन घटता है। लोभ के चलते लोग गलत राह पर चल कर पैसा अर्जित करते हैं लेकिन एक दिन पकड़े जाने पर वह पैसा उसी तरह चला जाता है। ऐसे में जब भी मन में लोभ आए तो उसे नजरअंदाज कर देना चाहिए।
3- चिंता
गौर गोपाल दास के अनुसार चिंता ऐसी चीज है जो इंसान को अंदर से खा जाती है। इस दौरान इंसान के ठीक से सोचने की क्षमता कम हो जाती है। वह एक सुंदर उदाहरण देते हुए बताते हैं कि, अगर तालाब के तले पर क्या है उसे देखना है तो पानी को स्थिर-शांत होने देने होगा। ठीक उसी तरह जिंदगी में अगर चतुराई से निर्णय लेना है तो फिर मन को शांत रखना होगा।
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