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Gandhi Jayanti Speech, Quotes, Essay: ऐसी थी गांधी की एकमात्र कश्मीर यात्रा, सड़क पर जगह नहीं बची, नाव के सहारे पहुंचे थे श्रीनगर

Gandhi Jayanti 2019 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan Quotes in Hindi: महात्मा गांधी जब अपने एकमात्र कश्मीर दौरे (Gandhi in Kashmir) पर पहुंचे तो उन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। बताया जाता है कि उस वक्त झेलम के पुल पर थोड़ी-सी जगह भी नहीं बची थी।

Gandhi Jayanti 2019: बापू की 150वीं जयंती पर बीजेपी-कांग्रेस का यह है प्लान। फोटो सोर्स: एक्सप्रेस फाइल

Gandhi Jayanti 2019 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Quotes in Hindi: महात्मा गांधी से जुड़े ऐसे काफी किस्से हैं, जिन्हें सुनकर लोग आज भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। महात्मा गांधी जब अपने एकमात्र कश्मीर दौरे (Gandhi in Kashmir) पर पहुंचे तो उन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। बताया जाता है कि उस वक्त झेलम के पुल पर थोड़ी-सी जगह भी नहीं बची थी। गांधीजी को कश्मीर तक ले जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा था। स्थानीय लोगों ने गांधी को ‘पीर’ कहा था।

गो-रक्षा शब्द का इस्तेमाल करने  से भी बचते थे गांधीजी, वे कहते थे कि गो-रक्षक होने का दावा करने वाले ही गो-भक्षक होते हैं। गायों को रक्षा नहीं सेवा की जरूरत है। महात्मा गांधी की महानता से प्रभावित होने वालों में नेल्सन मंडेला और जॉन रस्किन तक कई दिग्गज हस्तियां शामिल हैं। वहीं उन पर भी लियो टॉल्सटॉय समेत कई दिग्गजों का प्रभाव रहा।

बिहार के डॉ. सैय्यद महमूद स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। एक बार वह सेवाग्राम स्थित बापू के आश्रम गए थे। बताया जाता है कि उस वक्त डॉ. महमूद बीमार थे और डॉक्टरों ने ‘चिकन सूप’ लेने की सलाह दी, लेकिन आश्रम में मांसाहार की अनुमति नहीं थी। गांधीजी को यह जानकारी मिली तो उन्होंने डॉ. महमूद को आश्रम में ही रुकने के लिए कहा। साथ ही, उनके लिए चिकन सूप तैयार भी कराया।

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Highlights

    20:51 (IST)02 Oct 2019
    गांधी के कद्रदानों में नेल्सन मंडेला से जॉन रस्किन तक शामिल रहे

    महात्मा गांधी की महानता से प्रभावित होने वालों में नेल्सन मंडेला और जॉन रस्किन तक कई दिग्गज हस्तियां शामिल हैं। वहीं उन पर भी लियो टॉल्सटॉय समेत कई दिग्गजों का प्रभाव रहा।

    20:48 (IST)02 Oct 2019

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    19:16 (IST)02 Oct 2019
    साबरमती आश्रम में गांधीजी ने उनकी पुरानी चीजों को देखा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के साथ अहमदाबाद के साबरमती आश्रम का दौरा किया। गांधीजी की 150वीं जयंती पर वहां पहुंचे पीएम ने उनसे जुड़ी पुरानी चीजों को देखा।

    18:17 (IST)02 Oct 2019
    दिग्विजय बोले- जिस विचारधारा ने गांधी को मारा, वो कार्यकर्ताओं से पदयात्रा को कह रही है

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, 'जिस विचारधारा ने महात्मा गांधी को मार डाला, वो अपने कार्यकर्ताओं से हर पंचायत में पदयात्रा करने को कह रही है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वो गांधीजी को कैसे प्रोजेक्ट करेंगे? आप गांधीजी की तरफ खड़े रहेंगे या गोडसे की?'

    17:56 (IST)02 Oct 2019
    छुआछूत की जंग में गांधी के लिए बेहद खास था जोरहाट का यह लम्हा

    छुआछूत के खिलाफ महात्मा गांधी की लड़ाई में असम के जोरहाट का खास स्थान है। 1934 में यहां उन्होंने एक ब्राह्मण परिवार के नामघर के दरवाजे दलितों के लिए खोले थे। यह उनकी इस लड़ाई में एक लैंडमार्क माना जाता है।

    17:17 (IST)02 Oct 2019
    गो-रक्षा शब्द का इस्तेमाल करने से भी बचते थे गांधीजी

    गो-रक्षा शब्द का इस्तेमाल करने से भी बचते थे गांधीजी, वे कहते थे कि गो-रक्षक होने का दावा करने वाले ही गो-भक्षक होते हैं। गायों को रक्षा नहीं सेवा की जरूरत है।

    15:33 (IST)02 Oct 2019
    एकमात्र कश्मीर यात्रा पर बोले थे गांधीः यहां का फैसला कश्मीरी जनता ही करेगी

    गांधीजी अपने जीवन में सिर्फ एक बार कश्मीर गए थे। आजादी के 14 दिन पहले किए गए इस दौरे पर गांधी ने कहा था, 'कश्मीर का असली राजा, यहां की प्रजा है।'

    15:10 (IST)02 Oct 2019
    गांधी की एकमात्र कश्मीर यात्राः दर्शन के लिए उमड़े थे लोग, झेलम के पुल पर नहीं थी जगह

    महात्मा गांधी जब अपने एकमात्र कश्मीर दौरे पर पहुंचे तो उन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। बताया जाता है कि उस वक्त झेलम के पुल पर थोड़ी-सी जगह भी नहीं बची थी। गांधीजी को कश्मीर तक ले जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा था। स्थानीय लोगों ने गांधी को 'पीर' कहा था।

    14:39 (IST)02 Oct 2019
    चीनी से परहेज रखते थे बापू

    बापू फलों के काफी शौकीन थे, लेकिन चीनी से हमेशा परहेज करते थे। वहीं, आम उनका सबसे पसंदीदा फल था, जिसे देखकर वह रुक नहीं पाते थे। बापू ने आम के बारे में एक बात भी लिखी थी। उन्होंने 1941 में लिखा था, ‘‘आम एक शापित फल है। यह फल सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचता है।’’

    13:34 (IST)02 Oct 2019
    गुजरात में हुए विभिन्न कार्यक्रम, हजारों बच्चों ने भेजी बापू को चिट्ठी

    गुजरात में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर अहमदाबाद के साबरमती आश्रम सहित कई स्थानों पर प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया गया। गांधी का घर कहे जाने वाले साबरमती आश्रम स्थित हृदय कुंज में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे शामिल हुए। इस अवसर पर आश्रम ट्रस्ट के सदस्य, विख्यात गांधीवादी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विजय रूपानी पोरबंदर के कीर्ति मंदिर में एक प्रार्थना सभा में शामिल हुए। इसी घर में आज के दिन 1869 में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था।

    12:38 (IST)02 Oct 2019
    आजादी के आंदोलनों में बापू का अहम रोल

    मोहन दास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान है। गांधीजी की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि उन्होंने तब के बिखरे हुए समाज को एकजुट कर स्वतंत्रता प्राप्ति के महायज्ञ में लगा दिया था। बापू के नेतृत्व में यूं तो कई छोटे-बड़े कई आंदोलन हुए, लेकिन कुछ ऐसे भी आंदोलन थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय समाज की दिशा बदलने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

    11:35 (IST)02 Oct 2019
    महात्मा कहने को तैयार नहीं थे जिन्ना, बापू बोले- कोई बात नहीं

    दिसंबर 1920 तक गांधीजी को महात्मा गांधी कहा जाने लगा था। उस दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक हुई, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना ने बापू को महात्मा कहने से इनकार कर दिया। ऐसे में गांधीजी ने कहा, ‘‘मैं महात्मा नहीं हूं। मैं साधारण आदमी हूं। जिन्ना साहब को कोई खास शब्द बोलने के लिए कहकर आप मेरा सम्मान नहीं कर रहे हैं। हम दूसरों पर अपने विचार थोपकर असली आजादी हासिल नहीं कर सकते।’’ इसके बाद सभी लोग शांत हो गए।

    11:31 (IST)02 Oct 2019
    जब वाल्मीकि बस्ती के बच्चों को बापू ने खुद पढ़ाया

    1946 में बापू दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित वाल्मीकि कॉलोनी में आए और 214 दिन तक यहीं रुके। उस दौरान उन्हें पता चला कि वाल्मीकि होने के कारण बस्ती में रहने वाले बच्चों को कोई नहीं पढ़ाता था। बापू ने खुद ही बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया और धीरे-धीरे उनके पास गोल मार्केट, पहाड़गंज और इरविन रोड आदि इलाकों से बच्चे पढ़ने के लिए आने लगे।

    11:09 (IST)02 Oct 2019
    जब आश्रम में बनवाया चिकन सूप

    बिहार के डॉ. सैय्यद महमूद स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। एक बार वह सेवाग्राम स्थित बापू के आश्रम गए थे। बताया जाता है कि उस वक्त डॉ. महमूद बीमार थे और डॉक्टरों ने 'चिकन सूप' लेने की सलाह दी, लेकिन आश्रम में मांसाहार की अनुमति नहीं थी। गांधीजी को यह जानकारी मिली तो उन्होंने डॉ. महमूद को आश्रम में ही रुकने के लिए कहा। साथ ही, उनके लिए चिकन सूप तैयार भी कराया।

    11:06 (IST)02 Oct 2019
    8 अगस्त 1942 को दिया था अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा

    8 अगस्त 1942 की शाम को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बंबई सत्र में 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का नारा दिया गया था। हालांकि गांधी जी को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन देश भर के युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फोड़ के जरिए आंदोलन चलाते रहे। पश्चिम में सतारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में स्वतंत्र सरकार की स्थापना कर दी गई थी।

    11:06 (IST)02 Oct 2019
    जब बापू ने छेड़ा भारत छोड़ो आंदोलन

    भारत छोड़ो आंदोलन द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 9 अगस्त 1942 को आरंभ किया गया था। क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद बापू ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ अपना तीसरा बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला लिया।

    10:38 (IST)02 Oct 2019
    दलितों को दिया हरिजन शब्द

    8 मई 1933 से छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरुआत की। उनका यह आंदोलन समाज से अस्यपृश्यता मिटाने के लिए था। उन्होंने हरिजन नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन भी किया था। हरिजन आंदोलन में मदद के लिए गांधी जी ने 21 दिन का उपवास किया था। दलितों के लिए हरिजन शब्द गांधी जी ने ही दिया था। हरिजन से उनका तात्पर्य था ईश्वर का आदमी।

    10:21 (IST)02 Oct 2019
    उप राष्ट्रपति ने बापू और शास्त्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किए

    उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर बुधवार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देशवासियों से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

    10:01 (IST)02 Oct 2019
    बापू ने 1932 में छुआछूत के खिलाफ छेड़ी जंग

    पूना समझौते के बाद गांधी जी ने खुद को पूरी तरह से हरिजनों की सेवा में समर्पित कर दिया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने 1932 ई. में 'अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग' की स्थापना की।

    09:43 (IST)02 Oct 2019
    इस वजह से किया गया था दांडी मार्च

    उस दौर में अंग्रेजों ने ने चाय, कपड़ा, यहां तक कि नमक जैसी चीजों पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा था। उस समय बापू ने दांडी में नमक बनाकर अंग्रेजी कानून को तोड़ा था।

    09:43 (IST)02 Oct 2019
    बापू ने 24 दिन तक किया था पैदल मार्च

    नमक पर ब्रिटिश राज के एकाधिकार के खिलाफ 12 मार्च, 1930 में बापू ने अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था।

    09:39 (IST)02 Oct 2019
    जब बापू ने नमक के लिए किया दांडी मार्च

    नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए प्रमुख आंदोलन में से एक था। इसे दांडी मार्च के नाम से भी जाना जाता है।

    09:10 (IST)02 Oct 2019
    असहयोग आंदोलन से हिल गया था अंग्रेजी साम्राज्य

    यह एक तरह से अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों की असहयोग की शुरुआत थी। तब गांधी जी ने कहा था कि यदि असहयोग का ठीक ढंग से पालन किया जाए तो भारत एक वर्ष के भीतर स्वराज प्राप्त कर लेगा। गांधी के इस आंदोलन ने अंग्रेजी साम्राज्य को हिलाकर रख दिया था।

    09:10 (IST)02 Oct 2019
    1 अगस्त 1920 से शुरू हुआ था असहयोग आंदोलन

    रॉलेट सत्याग्रह की सफलता के बाद 1 अगस्त 1920 महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन के माध्यम से गांधीजी ने लोगों से आग्रह किया कि जो भारतीय उपनिवेशवाद का खत्म करना चाहते हैं वे स्कूलों, कॉलेजों और न्यायालय न जाएं और न ही कर चुकाएं।

    08:37 (IST)02 Oct 2019
    महात्मा गांधी ने सबको सांप्रदायिक एकता और महिला उत्थान की राह दिखायी : कोविंद

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को कहा कि महात्मा गांधी का पूरी दुनिया में सम्मान है। उन्होंने सभी को सांप्रदायिक एकता, अस्पृश्यता को दूर करने और महिलाओं के उत्थान का मार्ग दिखाया था। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में कोविंद ने कहा कि यह सभी के लिए सत्य, अहिंसा, सौहार्द, नैतिकता और सादगी के मूल्यों के प्रति फिर से सर्मिपत करने के लिये एक विशेष अवसर है। कोविंद ने कहा कि सत्य, अहिंसा और सर्वोदय मानवता के प्रति महात्मा गांधी के अनेक संदेशों के आधार रहे हैं।

    08:34 (IST)02 Oct 2019
    प्रधानमंत्री मोदी ने बापू को राजघाट पर दी श्रद्धांजलि

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बुधवार को राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी राष्ट्रपिता को पुष्पांजलि अर्पित की। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने इस अवसर पर कई समारोह आयोजित किए जाने की योजना बनाई है।

    07:52 (IST)02 Oct 2019
    बापू के नमक आंदोलन से मिली यह शिक्षा

    गांधीजी ने नमक आंदोलन से सिखाया कि अगर शासन अन्यायी है तो उसका विरोध करो। लेकिन यह विरोध अहिंसात्मक हो। अगर आप सत्य के साथ हैं तो जीत आपकी जरूर होगी।

    07:40 (IST)02 Oct 2019
    दक्षिण अफ्रीका में भारतवंशी कारोबारी के नौकरी के प्रस्ताव ने बदली थी गांधी की जिंदगी

    महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा और सत्याग्रह के प्रति उनकी मुकम्मल सोच शायद साकार नहीं हो पाती, अगर स्थानीय भारतवंशी कारोबारी उन्हें यहां आने का प्रस्ताव नहीं देते। लंदन में कानून की पढ़ाई करने गए नौजवान मोहनदास करमचंद गांधी अपने गृह नगर पोरबंदर में वकालत जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें एक साल के लिए दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन ट्रांसवाल प्रांत में काम का प्रस्ताव आया था। परिवार के चौथी पीढ़ी के वंशज एबी मूसा याद करते हुए बताते हैं कि किस तरह उनके पूर्वज गांधीजी को यहां लेकर आए और दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव के खिलाफ सत्याग्रह का मार्ग उन्होंने चुना तथा अंिहसक प्रतिरोध के इसी रास्ते का अनुसरण करते हुए बाद में गोरों से भारत को आजाद कराया।

    07:30 (IST)02 Oct 2019
    ऐसे लिख सकते हैं बापू पर निबंध

    अगर आप भी गांधी जयंती पर भाषण अथवा निबंध प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं तो ये सामग्री आपकी काफी मदद कर सकती है। लोगों के सामने बेहतर तरीके से अपनी बातों को रखने के लिए जरूरी है कि आप बेहतर तरीके से अपना भाषण तैयार करें। ऐसे में अपने भाषण या निबंध लिखने के लिए आप इन कुछ सामग्रियों का सहारा ले सकते हैं।

    07:17 (IST)02 Oct 2019
    3 बंदरों से गांधीजी ने दिया था यह संदेश

    गांधीजी के तीन बंदरों के बारे में हम सभी ने सुना है। बुरा मत कहो, बुरा मत सुनो और बुरा मत देखो के प्रतीक स्वरूप ये तीनों बंदर हमें जीवन जीने के सही तरीके के बारे में बताते हैं। इस संदेश को अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो हमारी कितनी समस्याएं अपने आप सुलझ जाएं।

    07:16 (IST)02 Oct 2019
    बापू के समर्थन में जुटे थे हजारों किसान

    अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ गांधी ने उस समय चंपारण पहुंचकर इस आंदोलन का शंखनाद किया। उन्होंने उस समय जमींदारों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन और हड़तालों को नेतृत्व किया। तब उनके समर्थन में हजारों की संख्‍या में किसान एकत्रित हो गए थे। पुलिस सुपरिंटेंडेंट ने गांधीजी को जिला छोड़ने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने आदेश को मानने से इंकार कर दिया था।

    06:58 (IST)02 Oct 2019
    क्यों हुआ था चंपारण आंदोलन?

    उस समय अंग्रेजों और और उनके पिट्‍ठू जमींदारों द्वारा हजारों भूमिहीन मजदूर एवं गरीब किसानों को खाद्यान के बजाय नील एवं अन्य नकदी फसलों की खेती करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

    06:52 (IST)02 Oct 2019
    चंपारण आंदोलन

    बिहार के चंपारण जिले में सन 1917-18 महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत में किया गया यह पहला सत्याग्रह था। इसे चम्पारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है।

    06:42 (IST)02 Oct 2019
    मानवीय आदर्शों की प्रयोगशाला रही बापू की जिंदगी

    महात्मा गांधी का जिंदगी तमाम मानवीय आदर्शों की प्रयोगशाला रही है। उन्होंने मानव जीवन के लिए सही माने जाने वाले तमाम आदर्शों का प्रयोग अपने जीवन में किया था।

    03:13 (IST)02 Oct 2019
    आइंस्टीन भी थे बापू के मुरीद

    बताया जाता है कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी महात्मा गांधी के मुरीद थे। उन्होंने कहा था कि आने वाली नस्लों को मुश्किल से ही इस बात पर विश्वास होगा कि हांड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान भी धरती पर आया था। 

    01:09 (IST)02 Oct 2019
    बापू का 3 बंदरों वाला सिद्धांत

    महात्मा गांधी का जिंदगी तमाम मानवीय आदर्शों की प्रयोगशाला रही है। उन्होंने मानव जीवन के लिए सही माने जाने वाले तमाम आदर्शों का प्रयोग अपने जीवन में किया था। गांधीजी के तीन बंदरों के बारे में हम सभी ने सुना है। बुरा मत कहो, बुरा मत सुनो और बुरा मत देखो के प्रतीक स्वरूप ये तीनों बंदर हमें जीवन जीने के सही तरीके के बारे में बताते हैं। इस संदेश को अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो हमारी कितनी समस्याएं अपने आप सुलझ जाएं।

    21:17 (IST)01 Oct 2019
    अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है बापू का जन्मदिन

    महात्मा गांधी को विश्व पटल पर अहिंसा के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। उनके जन्मदिवस को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में हिंसा से त्रस्त दुनिया को जब भी शांति की जरूरत महसूस होती है तब वह हमारे देश की ओर और महात्मा गांधी के आदर्शों की ओर निहारता है।

    20:46 (IST)01 Oct 2019
    बापू का अहिंसा अस्त्र क्रांतिकारी प्रयोग था

    परमाणु हथियारों के इस युग में गांधी इसीलिए दुनिया की अपरिहार्य जरूरत नजर आते हैं क्योंकि उन्होंने तत्कालीन वक्त के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य को भी सिर्फ अहिंसा और असहयोग के बल पर अपनी बात मनवाने पर मजबूर कर दिया था। यह एक अद्भुत किस्म का क्रांतिकारी प्रयोग था। बाद में इसी प्रयोग को दुनिया के कई देशों में अन्यायी प्रशासन के खिलाफ लड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

    20:46 (IST)01 Oct 2019
    बापू ने अहिंसा के हथियार से किया था अंग्रेजों का ‘संहार’

    महात्मा गांधी उस शख्सियत को कहा जाता है जिसने बिना हथियार उठाए भारत में तकरीबन 200 सालों से अपनी जड़ें जमाए आततायी, निरंकुश और अन्यायी अंग्रेजी शासन का तख्त हिलाकर रख दिया था। अहिंसा का इससे सशक्त उदाहरण दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलता।

    19:58 (IST)01 Oct 2019
    क्या था खिलाफत मूवमेंट?

    चंपारण के बाद उन्होंने भारतीय मुसलमानों के खिलाफत मूवमेंट को अपना सहयोग प्रदान किया। गांधी जी ने मुसलमानों को भी अपने पक्ष में कर लिया और देश में हो रहे हिन्दू -मुस्लिम दंगों पर कुछ सालों के लिए लगाम लग गयी।

    19:57 (IST)01 Oct 2019
    रवींद्र नाथ टैगोर ने गांधी जी को दी थी महात्मा की उपाधि

    अंग्रेजों के खिलाफ सफल आंदोलनों की वजह से गांधी जी की कीर्ति पूरे भारत में फैल गई थी। आंदोलनों की सफलता के बाद ही उन्हें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा “महात्मा” और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस द्वारा “राष्ट्रपिता” की उपाधि मिली। बाद में उन्हें सभी इसी नाम से पुकारने लगे।

    19:53 (IST)01 Oct 2019
    जब गांधी जी के पीछे चल पड़े हजारों लोग

    गांधी जी ने 1930 में दांडी नमक यात्रा शुरू की थी। उनकी बातें, विचार और तरीकों ने जनता को उनका मुरीद बना दिया था, जिसके बाद लोग उनसे जुड़ते चले गए।

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