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Gandhi Jayanti 2020 Speech, Essay, Quotes: गांधी जयंती पर स्पीच व निबंध के बेहतरीन कंटेंट देखें यहां

Gandhi Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Slogan, Quotes in Hindi: गांधी जी हमेशा कहते थे कि किसी भी तरह के विरोध का मार्ग हिंसात्मक नहीं हो सकता है। अहिंसा में जो शक्ति है, उसकी जगह हिंसा कभी नहीं ले सकती है।

gandhi jayanti 2020, gandhi jayanti speech, gandhi jayanti speech for studentsGandhi Jayanti Speech: देश की आम जनता ही नहीं, कई महान लोग गांधी जी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे

Gandhi Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Slogan, Quotes in Hindi: पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा का रास्ता दिखाने वाले महात्मा गांधी ने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने में जी-जान लगा दिया। उन्होंने लोगों के बीच देशभक्ति की अलख जगाने के साथ ही, नस्लीय व जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों पर भी हमला किया। वे हमेशा कहते थे कि किसी भी तरह के विरोध का मार्ग हिंसात्मक नहीं हो सकता है। अहिंसा में जो शक्ति है, उसकी जगह हिंसा कभी नहीं ले सकती है। इन्हीं विचारों के बूते दुनियाभर में उनकी ख्याति फैली।

भारत के लोग ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के तमाम महान शख़्सियत गांधी जी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे। 1909 में गांधी जी ने महान साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय को खत लिखकर साउथ अफ़्रीका में अपने द्वारा चलाये गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के बारे में बताया था। कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि गांधी जी पर टॉलस्टॉय की विचारधारा का बेहद प्रभाव पड़ा था।

इस खत के बारे में अपनी डायरी में टॉलस्टॉय ने लिखा है कि, ‘आज मुझे एक हिंदू द्वारा लिखा हुआ रोचक पत्र मिला है।’ इसके जवाब में उन्होंने गांधी को लिखा, ‘मुझे अभी आपके द्वारा भेजा गया दिलचस्प पत्र मिला है और इसे पढ़कर मुझे अत्यंत ख़ुशी हुई। ईश्वर हमारे उन सब भाइयों की मदद करे जो ट्रांसवाल में संघर्ष कर रहे हैं. सौम्यता’ का ‘कठोरता’ से संघर्ष, ‘प्रेम’ का ‘हिंसा’ से संघर्ष हम सभी यहां पर भी महसूस कर रहे हैं….. मैं, आप सभी का अभिवादन करता हूं।’

गांधी जयंती के मौके पर निबंध और भाषण के कुछ सैंपल आप यहां से देख सकते हैं –

Speech 1: हमारा देश महान स्त्रियों और पुरुषों का देश है, जिन्होंने देश के लिए ऐसे आदर्श कार्य किए हैं जिन्हें भारतवासी सदा याद रखेंगे। कई महापुरुषों ने हमारी आजादी की लड़ाई में अपना तन-मन-धन परिवार सब कुछ अर्पण कर दिया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक थे महात्मा गांधी। महात्मा गांधी युग पुरुष थे जिनके प्रति पूरा विश्व आदर की भावना रखता था। इस महापुरुष का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 को गुजरात में पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास था। आपके पिता कर्मचंद गांधी राजकोट के दीवान थे। माता पुतलीबाई धार्मिक स्वभाव वाली अत्यंत सरल महिला थी। मोहनदास के व्यक्तित्व पर माता के चरित्र की छाप स्पष्ट दिखाई दी।

Speech 2: 2 अक्टूबर सन् 1869 को गुजरात के पोरबंदर में युगपुरुष मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में पूर्ण करने के पश्चात राजकोट से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर आप वकालत करने इंग्लैंड चले गए। वकालत करके लौटने पर वकालत प्रारंभ की। एक मुकदमे के दौरान उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहां भारतीयों की दुर्दशा देख बड़े दुखी हुए। इसके बाद ही उनमें राष्ट्रीय भावना जागी और वे भारतवासियों की सेवा में जुट गए। अंग्रेजों की कुटिल नीति तथा अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध गांधीजी ने सत्याग्रह आंदोलन आरंभ किए। असहयोग आंदोलन एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया।

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Highlights

    16:49 (IST)02 Oct 2020
    शोषण विहिन समाज की स्थापना

    महात्मा गांधी का यह मानना था कि भारतीय शिक्षा सरकार के नहीं बल्कि समाज के अधिन है। इसलिए महात्मा गांधी भारतीय शिक्षा को ‘द ब्यूटिफुल ट्री’ कहा करते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनका विशेष योगदान रहा। भारत का हर नागरिक शिक्षित हो यही उनकी इच्छा थी। गांधी जी का उद्देश्य ‘शोषण विहिन समाज की स्थापना’ करना था।

    16:05 (IST)02 Oct 2020
    नींव रहा अहिंसा परमो धर्म: का सिद्धांत

    अहिंसा परमो धर्मः के सिद्धांत को नींव बनाकर, विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से महात्मा गाँधी ने देश को गुलामी के जंजीर से आजाद कराया। वह अच्छे राजनीतिज्ञ के साथ बहुत अच्छे वक्ता भी थे। उनके वचनों को आज भी लोग दोहराते हैं और उन्हें उनके विचारों की बदौलत याद करते हैं।

    15:17 (IST)02 Oct 2020
    इन आंदोलनों में थे शामिल...

    गांधी जी ने स्वराज्य प्राप्ति, समाज से अस्पृश्यता को हटाने, दूसरी सामाजिक बुराईयों को मिटाने, किसानों के आर्थिक स्थिति को सुधारने में, महिला सशक्तिकरण आदि के लिये बहुत ही महान कार्य किये है। ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति में भारतीय लोगों की मदद के लिये इनके द्वारा 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह और 1942 में भारत छोड़ो आदि आंदोलन चलाये गये। अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिये उनका भारत छोड़ो आंदोलन एक आदेश स्वरुप था।

    14:34 (IST)02 Oct 2020
    "सादा जीवन उच्च विचार"

    महात्मा गांधी पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श हैं। उन्हें अपने सादा-जीवन और उच्च विचारों की वजह से दुनिया में अहिंसा के पुजारी के रूप में जाना जाता है। वे शाकाहारी थे। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने चाय और कॉफी तक का त्याग कर दिया था। खानपान के साथ गांधी जी ने बहुत तरह के प्रयोग किए।

    13:45 (IST)02 Oct 2020
    महापुरुष महात्मा गांधी

    हमारा देश महान स्त्रियों और पुरुषों का देश है, जिन्होंने देश के लिए ऐसे आदर्श कार्य किए हैं जिन्हें भारतवासी सदा याद रखेंगे। कई महापुरुषों ने हमारी आजादी की लड़ाई में अपना तन-मन-धन परिवार सब कुछ अर्पण कर दिया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक थे महात्मा गांधी। महात्मा गांधी युग पुरुष थे जिनके प्रति पूरा विश्व आदर की भावना रखता था। इस महापुरुष का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 को गुजरात में पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास था। आपके पिता कर्मचंद गांधी राजकोट के दीवान थे। माता पुतलीबाई धार्मिक स्वभाव वाली अत्यंत सरल महिला थी। मोहनदास के व्यक्तित्व पर माता के चरित्र की छाप स्पष्ट दिखाई दी।

    12:58 (IST)02 Oct 2020
    इस बात का भी रखें ध्यान...

    स्पीच में क्या बातें कही जा रही हैं, यह काफी अहम है। लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है स्पीच देने का तरीका। इसलिए एक दिन पहले से ही आइने के सामने खड़े होकर अपनी स्पीच की प्रैक्टिस करें। कोशिश करें कि कागज देखकर स्पीच न देनी पड़े।

    12:19 (IST)02 Oct 2020
    बापू और अहिंसा...

    'अहिंसा' - जब भी अहिंसा की बात आती है, तो सबसे पहले 'बापू' का नाम आता है। महात्मा गांधी ने न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया को अहिंसा के मायने समझाए। बताया कि अहिंसा एक व्यक्तिगत आदत है जिसका अर्थ है किसी भी परिस्थिति में खुद को या दूसरों को क्षति न पहुंचाई जाए।

    11:48 (IST)02 Oct 2020
    हरिजन और गांधी...

    हमारे समाज में जिन समुदायों के लोगों को 'अछूत' कहा जाता था, उन्हें बापू ने 'हरिजन' नाम दिया। जिस शब्द का अर्थ है हरि (भगवान) की संतान। इस एक पहल ने इन समुदायों के लोगों को सम्मानजनक जीवन दिलाने की कोशिश में बड़ी भूमिका निभाई।

    10:52 (IST)02 Oct 2020
    शांति और सच्चाई के प्रतीक...

    महात्मा गाँधी एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी को प्राप्त करने में बहुत संघर्ष किया और एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत के लिये आजादी प्राप्त करने के अहिंसा के अनोखे तरीके के केवल पथ-प्रदर्शक ही नहीं थे बल्कि उन्होंने दुनिया को साबित किया कि अहिंसा के पथ पर चलकर शांतिपूर्ण तरीके से भी आजादी पायी जा सकती है। वह आज भी हमारे बीच शांति और सच्चाई के प्रतीक के रुप में याद किये जाते हैं.

    10:14 (IST)02 Oct 2020
    रघुपति राघव राजा राम...

    गाँधी जयंती भारत के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में गाँधी को याद करने के लिये मनायी जाती है जिन्होंने हमेशा सभी धर्मों और समुदायों को एक नजर से सम्मान दिया. इस दिन पर पवित्र धार्मिक किताबों से दोहा और प्रार्थना पढ़ा जाता है खासतौर से उनका सबसे प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम।”

    09:32 (IST)02 Oct 2020
    मोहनदास करमचंद गाँधी था पूरा नाम

    उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है हालाँकि वह बापू और राष्ट्रपिता तथा महात्मा गाँधी के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था. इस दिन पर, नयी दिल्ली के राजघाट पर महात्मा गाँधी को उनके समाधि स्थल पर भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के द्वारा प्रार्थना, फूल, भजन आदि के द्वारा श्रद्धाजलि अर्पित की जाती है।

    08:57 (IST)02 Oct 2020
    अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस...

    गाँधी जयंती केवल अपने देश में ही नहीं मनाया जाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में पूरे विश्व भर में मनाया जाता है क्योंकि वह अपने पूरे जीवनभर अहिंसा के एक पथ-प्रदर्शक थे।

    08:17 (IST)02 Oct 2020
    सामाजिक समानता में रखते थे विश्वास

    उनके अनुसार, ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने के लिये अहिंसा और सच्चाई ही एकमात्र हथियार है। वह कई बार जेल भी गये हालाँकि देश को आजादी मिलने तक उन्होंने अपने अहिंसा आंदोलन को जारी रखा। वह हमेशा सामाजिक समानता में भरोसा रखते थे इसीलिये अस्पृश्यता के घोर खिलाफ थे।

    07:37 (IST)02 Oct 2020
    इन आंदोलनों में रहे सक्रिय

    बापू ने कई आंदोलन किए थे और सारे आंदोलन देश को आजादी दिलाने के लिए थे जो सफल हुए थे। पहले आंदोलन की शुरुआत 1919 से कहा जा सकता है। 1919 में जलियांवाला बाग कांड के विरोध में आंदोलन हुआ था। जिसमें देशवासियों ने बापू का पूरा साथ दिया था। उसके बाद गांधी जी ने नमक सत्यग्रह की शुरुआत की जो सफल रहा।

    07:06 (IST)02 Oct 2020
    मनाई जा रही है 151 वीं जयंती

    भारत में हर वर्ष 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। यानी देश इस बार गांधीजी की 151वीं जयंती मना रहा है। सत्य और अहिंसा को लेकर बापू के विचार हमेशा से न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।

    06:19 (IST)02 Oct 2020
    गांधी का खेड़ा सत्याग्रह

    गुजरात के खेड़ा जिले में किसानो की फसल नष्ट हो जाने के बाबजूद भी किसानो से लगान बसूला जा रहा था जिससे किसानो की दशा बहुत ख़राब हो गयी थी अतः गाँधी जी और विट्ठल भाई पटेल ने यहाँ आंदोलन किया और सरकार ने यह घोषणा कर दी की जो किसान लगान दे सकते है उन्ही से लगान बसूला जाये और इस तरह यह आंदोलन समाप्त हो गया।

    04:30 (IST)02 Oct 2020
    गाँधी जी ने राजकोट से सन 1887 में हाईस्कूल किया

    गाँधी जी ने राजकोट से सन 1887 में हाईस्कूल किया और कानून की पढाई के लिए 1889  में बम्बई से इंग्लैण्ड गए और 1891 में बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की। वापस लौटने के बाद राजकोट और बम्बई में वकालत शुरू की परन्तु कामयाब नहीं हुए। फिर दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय व्यापारी अब्दुल्ला ने उन्हें मुक़दमे की पैरवी के लिए आमंत्रित किया और तब गाँधी जी 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए। 

    03:21 (IST)02 Oct 2020
    13 साल की उम्र में गांधी जी की हो गई थी शादी

    महात्मा गांधी का विवाह मात्र 13 वर्ष की आयु में ही कर दिया गया था। जब वे स्कूल में पढ़ते थे, तभी पोरबंदर के एक व्यापारी की पुत्री कस्तूरबा माखनजी से उनका विवाह हुआ और मात्र 15 वर्ष की अवस्था में गांधी जी एक पुत्र के पिता बन गए।लेकिन वह पुत्र जीवित न रह सका। इस तरह गांधी जी के कुल चार पुत्र हरिलाल, मनिलाल, रामदास और देवदास हुए। 

    01:31 (IST)02 Oct 2020
    गाँधी जी के विचारों से देश ही नहीं पूरी दुनिया प्रभावित थी

    गाँधी जी के विचारों से देश ही नहीं पूरी दुनिया प्रभावित थी| गाँधी जी के अहिंसावादी विचार का लोहा सभी ने माना| आज उनके अहिंसावादी विचार की बदौलत ही भारत आजाद है| उन्होंने देश की आजादी के अहिंसा का मार्ग अपनाने और स्वदेशी निर्मित चीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया|

    23:50 (IST)01 Oct 2020
    चिंता से अधिक कुछ और शरीर को इतना बर्बाद नहीं करता

    चिंता से अधिक कुछ और शरीर को इतना बर्बाद नहीं करता और वह जिसे ईश्वर में थोड़ा भी यकीन है उसे किसी भी चीज के बारे में चिंता करने पर शर्मिंदा होना चाहिए।

    22:43 (IST)01 Oct 2020
    गांधी का नारा

    विश्व में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इतने भूखे हैं कि भगवान् उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता, सिवाय रोटी देने वाले के रूप में।

    21:40 (IST)01 Oct 2020
    महिला सशक्तिकरण का प्रयास...

    गांधीजी ने भारतीय समाज में व्याप्त छुआछूत जैसी बुराइयों के प्रति हमेशा ही आवाज उठाई। वो चाहते थे कि भारत में ऐसा समाज बने जिसमें सभी लोगों को बराबरी का दर्जा हासिल हो क्योंकि सभी को एक ही ईश्वर ने बनाया है। इसलिए उनमें भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। नारी सशक्तीकरण के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहे।

    21:07 (IST)01 Oct 2020
    भारत की आजादी में योगदान

    महात्मा गांधी भारत और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे। उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों और स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया।

    20:34 (IST)01 Oct 2020
    दुनिया के लिए आदर्श...

    महात्मा गांधी पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श हैं। उन्हें अपने सादा-जीवन और उच्च विचारों की वजह से दुनिया में अहिंसा के पुजारी के रूप में जाना जाता है। वे शाकाहारी थे। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने चाय और कॉफी तक का त्याग कर दिया था। खानपान के साथ गांधी जी ने बहुत तरह के प्रयोग किए।

    19:52 (IST)01 Oct 2020
    पढ़ाई में औसत फिर भी मिलते थे पुरस्कार

    गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ। उनकी मां का नाम पुतलीबाई और पिता का नाम करमचंद गांधी था। वह एक औसत विद्यार्थी थे। उन्हें कई बार पुरस्कार और छात्रवृत्तियां भी मिलीं। गांधी जी पढ़ाई और खेल दोनों में ही औसत रहे। बीमार पिता की सेवा करना, घर के कामों में मां का हाथ बंटाना और समय मिलने पर दूर तक अकेले सैर पर निकल जाना उन्हें बहुत पसंद हुआ करता था।

    19:22 (IST)01 Oct 2020
    दिए थे तीन आदर्श...

    गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में अहिंसा और सत्य का मार्ग अपनाया और देशवाशियो को भी इसी मार्ग पर चलने का आग्रह किया। गांधीजी ने सभी के लिए तीन आदर्शों को मुख्य बताया। उनका कहना था कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो। गांधीजी कहते थे कि इन आदर्शों पर चलकर जीवन को सार्थक किया जा सकता है।

    18:48 (IST)01 Oct 2020
    पढ़ाई के लिए इंग्लैंड तक गए

    गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट से शुरू हुई। उन्होंने सन 1881 में हाई स्कूल में एडमिशन लिया। सन 1887 में गांधीजी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में प्रवेश लिया। लेकिन परिवार वालों के कहने पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड जाने का फैसला किया। इंग्लैंड में उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की और सन् 1891 में वो बैरिस्ट्रर बनकर भारत लौटे।

    18:17 (IST)01 Oct 2020
    जब बापू ने की थी किसानों की मदद...

    सन 1918 में गुजरात के खेड़ा नाम के गांव में बाढ़ आ गई थी। इस वजह से किसानों की फसल तबाह हो गई। किसान ब्रिटिश सरकार को टैक्स देने में अक्षम हो गए। तब गांधीजी ने किसानों को टैक्स से छूट दिलाने के लिए खेड़ा आंदोलन किया। उस समय किसानों समेत देश की बाकी जनता ने भी गांधीजी का समर्थन किया। आखिरकार मई 1918 में ब्रिटिश सरकार ने टैक्स के नियमों में संशोधन कर किसानों को टैक्स में राहत देने की घोषणा की।

    17:37 (IST)01 Oct 2020
    ये थे मुख्य आंदोलन व मुहिम

    गांधी जी ने स्वराज्य प्राप्ति, समाज से अस्पृश्यता को हटाने, दूसरी सामाजिक बुराईयों को मिटाने, किसानों के आर्थिक स्थिति को सुधारने में, महिला सशक्तिकरण आदि के लिये बहुत ही महान कार्य किये है। ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति में भारतीय लोगों की मदद के लिये इनके द्वारा 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह और 1942 में भारत छोड़ो आदि आंदोलन चलाये गये। अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिये उनका भारत छोड़ो आंदोलन एक आदेश स्वरुप था।

    16:51 (IST)01 Oct 2020
    देश को समर्पित किया अपना जीवन

    पूरे विश्व में बापू के दर्शन, अहिंसा में भरोसा, सिद्धांत आदि को फैलाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में गाँधी जयंती को मनाने का लक्ष्य है। विश्वभर में लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये उचित क्रियाकलापों पर आधारित विषय-वस्तु के द्वारा इसे मनाया जाता है। भारतीय स्वतंत्रता में उनके योगदानों और महात्मा गाँधी के यादगार जीवन को समाहित करता है गाँधी जयंती। इनका जन्म एक छोटे से तटीय शहर (पोरबंदर, गुजरात) में हुआ था, इन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिये समर्पित कर दिया जो आज के आधुनिक युग में भी लोगों को प्रभावित करता है।

    15:58 (IST)01 Oct 2020
    13 साल में हुई थी शादी

    गांधी जी पुतलीबाई और करमचंद गांधी के तीन बेटों में सबसे छोटे बेटे थे। मोहनदास एक औसत विद्यार्थी थे, हालांकि उन्होंने कई बार पुरस्कार और छात्रवृत्तियां भी हासिल की है। गांधी जी पढ़ाई और खेल दोनों में ही तेज नहीं थे। बीमार पिता की सेवा करना, घरेलू कामों में मां का हाथ बंटाना और समय मिलने पर दूर तक अकेले सैर पर निकलना उन्हें बेहद पसंद था। गांधी जी जब 13 साल के थे, और स्कूल में पढ़ते थे तभी उनकी शादी कस्तूरबा से हुई थी।

    15:23 (IST)01 Oct 2020
    नमक सत्याग्रह आंदोलन

    बापू ने कई आंदोलन किए थे और सारे आंदोलन देश को आजादी दिलाने के लिए थे जो सफल हुए थे। पहले आंदोलन की शुरुआत 1919 से कहा जा सकता है। 1919 में जलियांवाला बाग कांड के विरोध में आंदोलन हुआ था। जिसमें देशवासियों ने बापू का पूरा साथ दिया था। उसके बाद गांधी जी ने नमक सत्यग्रह की शुरुआत की जो सफल रहा।

    14:44 (IST)01 Oct 2020
    गांधी जी ने कई महान शख्सियत को किया है प्रभावित

    वह बहुत सारे राजनीतिक नेताओं खासतौर से देश के युवाओं के लिये प्रेरणादायी और अनुकरणीय व्यक्ति है। दूसरे महान नेता जैसे मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, जेम्स लॉसन आदि महात्मा गाँधी की अहिंसा और स्वतंत्रता की लड़ाई के लिये शांतिपूर्ण तरीकों से प्रेरित हुए।

    14:09 (IST)01 Oct 2020
    राष्ट्रीय उत्सव गांधी जयंती

    सरकारी अधिकारियों द्वारा नई दिल्ली में गाँधीजी की समाधि या राजघाट पर बहुत तैयारियों के साथ गाँधी जयंती मनायी जाती है। राजघाट के समाधि स्थल को फूलों की माला तथा फूलों से सजाया जाता है तथा इस महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। समाधि पर सुबह के समय धार्मिक प्रार्थना भी रखी जाती है। इसे पूरे देशभर में स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थीयों के द्वारा खासतौर से राष्ट्रीय उत्सव के रुप में मनाया जाता है।

    13:42 (IST)01 Oct 2020
    लोगों के दिलों में जिंदा हैं बापू

    मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें राष्ट्रपिता के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। ये काफी कम लोग जानते हैं कि 2 अक्टूबर को हर साल विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने अहिंसा आंदोलन के दम पर अंग्रेजों से देश को आज़ाद करा दिया था। इसलिए बापू आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं।

    13:15 (IST)01 Oct 2020
    2 अक्टूबर है खास

    हर साल २ अक्टूबर को हम पूरे हर्षोल्लास के साथ गांधी जयंती मानते हैं। इस दिन सरकारी अधिकारियों द्वारा दिल्ली के राजघाट पर तैयारियां की जाती हैं। राजघाट महात्मा गांधी का समाधी स्थल है। इस दिन राजघाट के समाधि स्थल को फूलों से सजाया जाता है और देश के सभी नेता राजघाट पर आकर देश के राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते है। समाधि के स्थान पर 2 अक्टूबर को सुबह प्रार्थना भी होती है।

    12:41 (IST)01 Oct 2020
    अस्पृश्यता के घोर खिलाफ थे...

    उनके अनुसार, ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने के लिये अहिंसा और सच्चाई ही एकमात्र हथियार है। वह कई बार जेल भी गये हालाँकि देश को आजादी मिलने तक उन्होंने अपने अहिंसा आंदोलन को जारी रखा। वह हमेशा सामाजिक समानता में भरोसा रखते थे इसीलिये अस्पृश्यता के घोर खिलाफ थे।

    12:18 (IST)01 Oct 2020
    राष्ट्रपिता तथा बापू के रुप में प्रसिद्ध...

    तीसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम के रुप में हर साल गाँधी जयंती को मनाया जाता है। महात्मा गाँधी जन्म दिवस पर को उनको श्रद्धांजलि देने के लिये पूरे देश के भारतीय लोगों द्वारा 2 अक्टूबर को इसे मनाया जाता है। गाँधी देश के राष्ट्रपिता तथा बापू के रुप में प्रसिद्ध है। वो एक देशभक्त नेता थे और अहिंसा के पथ पर चलते हुए पूरे देश का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में नेतृत्व किया।

    12:02 (IST)01 Oct 2020
    सत्य और अहिंसा...

    महात्मा गांधी हमारे देश के ऐसे महान पुरुष थे, जिन्होंने अपना सम्पुर्ण परोपकार में ही लगा दिया। वे एक ऐसे दिव्य विभूति थे, जिन्होंने परतंत्रता की बेड़ी ही तोड़ने के लिए सत्य और अहिंसा का अमोध अस्त्र प्रदान किया। ब्रिटिश साम्राज्य की अपार शक्ति और प्रभाव को इस अमोध अस्त्र से प्रभावहीन करके विश्व इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। उनके इस अदभुत अस्त्र को सम्पूर्ण विश्व ने सहर्ष स्वीकार किया। समस्त विश्व में उन्हें एक चमत्कारी पुरुष ही नही, अपितु एक अवतारी, महापुरुष के रूप उन्हें सम्मान के भाव से देखा और अनुभव किया जाता है।

    11:51 (IST)01 Oct 2020
    Gandhi Jayanti 2020: गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस

    15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी थी। इस विशेष दिन को देश में राष्ट्रीय अवकाश भी मनाया जाता है। हालाँकि स्कूलों में, दफ्तरों में गाँधी जयंती के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है जहाँ पर गाँधी जी के जीवन के बारे में जुड़े तथ्य आदि बनाते जाते हैं, निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।

    11:42 (IST)01 Oct 2020
    गांधी जयंती पर क्या होता है विशेष

    2 अक्टूबर के दिन राजधानी दिल्ली में अदभुत रूप में गांधी जयंती मनाई जाती है। इस दिन प्रातः काल महात्मा गांधी जी की समाधि राजघाट पर एक से एक महान व्यक्ति पुष्प चढ़ाते है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते है।

    देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, भूतपूर्व-प्रधानमंत्री, गण्यमान्य राजनेताओं सहित अनेक समाज-सेवी और राष्टभक्त गांधी समाधि राजघाट पर जाकर पुष्पांजलि के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वहाँ पर महात्मा गांधी के प्रति श्रंद्धाभाव से प्राथना-सभा भी होती है।

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