कई बार रोजमर्रा की जिंदगी में भागदौड़ करते-करते मन थक जाता है। दिनभर की भागदौड़ भरी जिंदगी में जरूरतें पूरा करते हुए एक समय ऐसा आता है जब मन को सुकून और शांति चाहिए होती है। शरीर की थकावट को तो फिर भी दूर किया जा सकता है, लेकिन एक बार मन थक जाए तो उसके लिए बेहतर वातावरण और शांति जरूरी होती है। ऐसे में लोग शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और शोर-शराबे से दूर किसी ऐसी जगह की तलाश करते हैं जहां मन को सुकून मिले और शरीर फिर से तरोताजा हो जाए। वैसे तो भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां पर सुकून के पल बिता सकते हैं, लेकिन नागालैंड का एक खूबसूरत गांव है, जहां आप कुछ दिन एक अलग जिंदगी का अनुभव कर सकते हैं। इस गांव को भारत का पहला ग्रीन विलेज भी कहते हैं।

नागालैंड अपनी धुंध की ढकी पहाड़ियों, घने जंगल, मनमोहक सूर्यास्त-सूर्योदय दृश्य, ट्रेकिंग और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहीं पर भारत और म्यांमार सीमा के पास ‘खोनोमा’ गांव है, जिसे भारत का पहला ‘ग्रीन विलेज’ कहते हैं। इस गांव में आज भी लोग अपने घर के दरवाजे को खुला रखते हैं। पुरानी परंपराओं और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रखने की कला यहां के लोगों में आज भी जिंदा है। साल 1998 में यह गांव खूब चर्चा में रहा। यहां के लोगों ने अपने जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए शिकार पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गांव की कई ऐसी खास बातें हैं, जो इसे भारत का पहला ग्रीन विलेज बनाती हैं।

अगर आपको प्रकृति से गहरा जुड़ाव है और उसे करीब से देखना चाहते हैं, तो इस गांव की यात्रा कर सकते हैं। शांत वातावरण में चारों ओर पहाड़ों से घिरे हुए किसी कोने में बैठकर अपने मन को वह सुकून दे सकते हैं, जो उसे शहर में नहीं मिल पाता।

खोनोमा गांव की खासियत

नागालैंड के खोनोमा गांव में अंगामी जनजाति के लोग रहते हैं। साल 2005 में इसे भारत का पहला ग्रीन विलेज घोषित किया गया था। इस जनजाति के लोग अपनी शानदार हस्तशिल्प के लिए जाने जाते हैं। खासतौर से बांस और बेंत से खूबसूरत और उपयोगी चीजें बनाने में माहिर होते हैं।

घर और दुकानों पर नहीं लगाते ताला

इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर चोरी की घटनाएं लगभग न के बराबर हैं। लोग अपने घरों और दुकानों को अक्सर बिना ताला लगाए छोड़ देते हैं। यह लोगों के आपसी भरोसे, अनुशासन और एकता का प्रतीक माना जाता है। कई बार दुकान पर आदमी भी नहीं होता। ऐसे में जिसे जो सामान चाहिए वह ले लेता है और वहीं पर पैसे रख देता है। हर सामान पर कीमत का टैग लगा होता है, जिससे लोगों को भुगतान करने में आसानी होती है।

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गांव के नाम के पीछे की कहानी

इस गांव का नाम ख्वूनो नाम के एक छोटे स्थानीय पौधे पर रखा गया है। गांव के आसपास बड़ी संख्या में यह पौधा पाया जाता है। इसी के चलते इस गांव का नाम खोनोमा पड़ा। यहां के लोग पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना जीवन यापन करने पर विश्वास रखते हैं। जैविक और पर्यावरण के अनुकूल खेती करते हैं। इसके अलावा पशुपालन और जंगलों से मिलने वाले संसाधनों के सहारा अपना जीवनयापन करते हैं। इसके अलावा खोनोमा के पहाड़ियों पर बनी सीढ़ीनुमा जमीन पर पारंपरिक रूप से धान की खेती की जाती है। मानसून के मौसम में यहां का नजारा काफी हरा भरा रहता है।

आसपास घूमने लायक जगहें

जुकू वैली

अगर आप खोनोमा गांव जा रहे हैं, तो उसके आसपास कई सुंदर और मनमोहक जगहें हैं, जहां आप सुकून के पल बिता सकते हैं। यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित जुकू वैली है, जिसकी गिनती पूर्वोत्तर भारत की सबसे खूबसूरत घाटियों में की जाती है। इसे फूलों की घाटी भी कहा जाता है। रंग-बिरंगे जंगली फूलों का नजारा देखकर ऐसा लगता है कि कालीन बिछी हुई हो। यहां पर आपको झरने, दुर्लभ फूल और पक्षी भी देखने को मिल सकते हैं। खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा काफी शानदार होता है।

जापकू पीक

जापकू पीक को नागालैंड की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माना जाता है। यहां से आप कोहिमा और आसपास की पहाड़ियों का शानदार और मनमोहक नजारों का आनंद उठा सकते हैं।

किसामा हेरिटेज विलेज

अगर आपको देश-दुनिया की अलग-अलग संस्कृति के बारे में जानने की दिलचस्पी है, तो खोनोमा से करीब 15-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित किसामा हेरिटेज विलेज जा सकते हैं। यहां आप नागालैंड की संस्कृति को करीब से देख और जान सकते हैं। हर साल यहां हॉर्नबिल फेस्टिवल आयोजित किया जाता है, जिसमें नागालैंड की सभी प्रमुख जनजातियां अपनी संस्कृति, लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन करती हैं।

पुलीबाद्जे वाइल्ड लाइफ सेंचुरी

अगर आप पक्षी या प्रकृति प्रेमी हैं, तो खोनोमा से कुछ ही दूरी पर स्थित पुलीबाद्जे वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घूमने जा सकते हैं। यहां आपको कई दुर्लभ पक्षी और जंगली जानवर देखने को मिल सकते हैं।

शिलोई झील

नागालैंड की प्रसिद्ध झीलों में से एक शिलोई झील भी है। इस झील के आसपास की हरियाली के बीच बैठकर आप मन को शांत कर सकते हैं। इसके साथ ही कुछ देर टहल भी सकते हैं।

कब जाएं

खोनोमा घूमने के लिए सबसे सुहावना मौसम अक्टूबर से अप्रैल तक माना जाता है। इस दौरान यहां की वादियां हरी-भरी नजर आती हैं और वातावरण भी काफी शांत रहता है। वहीं, जून से सितंबर में मानसून के चलते गांव और आसपास की पहाड़ियां हरियाली से खिल उठती हैं। हालांकि, बारिश के कारण सफर थोड़ा मुश्किल भरा भी हो सकता है।

कैसे पहुंचे

अगर आप हवाई मार्ग के जरिए खोनोमा गांव पहुंचना चाहते हैं, तो इसके दीमापुर एयरपोर्ट पर उतरना होगा। वहां से ये गांव करीब 75-80 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस के जरिए पहुंच सकते हैं।

रेल व सड़क मार्ग

नजदीकी रेलवे स्टेशन भी दीमापुर है, जहां से यह गांव करीब 75-80 किलोमीटर दूर है। यहां से पहले कोहिमा जाना होता है फिर वहां से खोनोमा गांव सिर्फ 20 किलोमीटर दूर रह जाता है। वहां से आप बस और टैक्सियों के जरिए आगे का सफर कर सकते हैं। वहीं, अगर सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं तो दीमापुर या कोहिमा से टैक्सी और स्थानीय कैब आसानी से मिल जाती है।

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