रिश्तों में हर कोई प्यार, अपनापन और इमोशनल सेफ्टी चाहता है, लेकिन कई बार कुछ लोग अनजाने में ऐसे पार्टनर की ओर आकर्षित हो जाते हैं जो भावनात्मक रूप से उपलब्ध (इमोशनली अनअवेलेबल) नहीं होते। यानी वे अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं करते, कमिटमेंट से बचते हैं या रिश्ते में दूरी बनाए रखते हैं। यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।
द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, रिलेशनशिप कोच और थेरेपिस्ट एकता भानुसाली ने इस विषय पर विस्तार से बात की है। उनका कहना है कि महिलाएं जानबूझकर इमोशनली अनअवेलेबल पुरुषों को नहीं चुनतीं, बल्कि कई बार उनका मन बचपन में बने इमोशनल पैटर्न की ओर आकर्षित हो जाता है।
बचपन के अनुभव निभा सकते हैं बड़ी भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति का बचपन ऐसे माहौल में बीता हो जहां उसकी इमोशनल नीड्स को पर्याप्त महत्व न मिला हो या माता-पिता में से कोई इमोशनली कम जुड़ा रहा हो, तो बड़े होने पर वही व्यवहार उसे फैमिलियर और नॉर्मल लग सकता है।
एकता भानुसाली के अनुसार, हमारा मस्तिष्क अक्सर उन्हीं इमोशनल एक्सपीरियंस को सुरक्षित और फैमिलियर मानता है, जिनके बीच हम बड़े हुए हैं। यही वजह है कि कुछ लोग अनजाने में ऐसे साथी की ओर आकर्षित हो सकते हैं जिनका व्यवहार उनके बचपन के अनुभवों से मिलता-जुलता हो।
पारिवारिक माहौल का भी पड़ सकता है असर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय परिवारों में ट्रेडिशनल रूप से कई बार पिता अपनी भावनाएं कम जाहिर करते हैं। ऐसे माहौल में पली-बढ़ी कुछ बेटियां बाद में ऐसे रिश्तों की ओर आकर्षित हो सकती हैं, जहां भावनात्मक दूरी मौजूद हो। हालांकि, यह हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता और हर परिवार का अनुभव अलग होता है।
कमिटमेंट से डरने की क्या हो सकती है वजह?
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. रिम्पा सरकार के अनुसार, अधिकांश लोग गहरा और स्टेबल रिलेशनशिप चाहते हैं, लेकिन कमिटमेंट के साथ इमोशनल रिस्क और इनसिक्योरिटी भी जुड़ी होती है। यही कारण है कि कुछ लोग रिश्ते में पूरी तरह शामिल होने से हिचकिचाते हैं।
उन्होंने बताया कि आज के समय में करियर, फाइनेंशियल प्रेशर, पर्सनल गोल्स, सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर उपलब्ध बहुत सारे विकल्प भी लोगों के रिश्तों को प्रभावित कर रही है। कई लोग चाहते हैं कि उनका पार्टनर उनकी हर इमोशनल और पर्सनल जरूरत पूरी करे, जिससे रिश्तों को लेकर अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं और कमिटमेंट मुश्किल लगने लगता है।
इमोशनली अनअवेलेबल व्यक्ति की पहचान कैसे करें?
डॉ. सरकार के मुताबिक, भावनात्मक रूप से अनुपलब्ध व्यक्ति में कुछ सामान्य संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे- गहरी भावनात्मक बातचीत से बचना। रिश्ते के भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब न देना। रिश्ता गंभीर होने पर दूरी बनाने लगना। अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त न कर पाना। एक्सक्लूसिव या लंबे समय के रिश्ते पर बात करने से बचना। कभी बहुत करीब आना और फिर अचानक दूरी बना लेना।
क्या महिलाएं ही ऐसे पुरुषों की ओर आकर्षित होती हैं?
रिपोर्ट में डॉ. सरकार ने इस गलतफहमी को भी दूर किया कि सभी महिलाएं स्वाभाविक रूप से इमोशनली अनअवेलेबल पुरुषों को पसंद करती हैं। उनके अनुसार, रिसर्च इस बात का समर्थन नहीं करती। वास्तव में, किसी भी जेंडर के लोग अपने अटैचमेंट स्टाइल, पास्ट एक्सपीरियंस या इमोशनल नीड्स जरूरतों के कारण बार-बार ऐसे रिश्तों में पड़ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती आकर्षण और लंबे समय तक रिश्ते की सफलता दो अलग-अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति की मिस्टीरियस या इंडिपेंडेंट इमेज शुरुआत में अट्रैक्टिव लग सकती है, लेकिन वही गुण लंबे समय तक स्वस्थ रिश्ते की गारंटी नहीं होते।
(डिस्क्लेमर: यह लेख द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट और एक्सपर्ट्स द्वारा शेयर की गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी मानसिक या भावनात्मक समस्या के लिए योग्य मेंटल हेल्थ स्पेशलिस्ट या काउंसलर से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।)
