शादी के बाद पति फिरोज गांधी के परिवार के किसी रीति-रिवाज को नहीं मानती थीं इंदिरा गांधी, ससुराल से बना ली थी दूरी

इंदिरा गांधी ने फिरोज गांधी से शादी की थी और इसके बाद वह अपने ससुराल आ गई थीं, लेकिन यहां वह ससुराल के किसी रीति-रिवाज़ को नहीं मानती थीं। वह खुद को परिवार के सदस्यों से अलग दिखाने की कोशिश में लगी रहती थीं।

Feroze Gandhi, Indira Gandhi
फिरोज गांधी के साथ इंदिरा गांधी (Photo- Indian Express)

भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1942 में फिरोज गांधी से शादी की थी। दोनों की शादी का उस समय काफी विरोध भी हुआ था, जिसकी मुख्य वजह थी इंदिरा का हिंदू और फिरोज का पारसी होना। इन सब चीजों को नज़र अंदाज कर इंदिरा के पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दोनों की शादी धूमधाम से करने का फैसला किया था। आनंद भवन में दोनों की शादी के मौके पर देशभर की शख्सियतों को आमंत्रित किया गया था।

फिरोज के परिवार से खुद को अलग देखती थीं: पहले पंडित नेहरू नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फिरोज से शादी करें, लेकिन उन्हें इंदिरा के फैसले के आगे झुकना पड़ा। हालांकि शादी के बाद दोनों के रिश्तों में तल्खियां भी बहुत जल्दी देखने को मिलीं। चर्चित लेखक बार्टिल फाक अपनी किताब ‘फिरोज: द फॉरगेटेन गांधी’ में इसका विस्तार से जिक्र किया है। बर्टिल लिखते हैं, शादी के बाद इंदिरा गांधी ससुराल में रहने के लिए आ गई थीं।

इंदिरा गांधी ने शादी के बाद पहले दिन से ही फिरोज के परिवार और अपने बीच एक लकीर खींच ली थी। वह कभी ससुराल के किसी रीति-रिवाज को नहीं मानती थीं और उन्होंने ससुराल से भी एक तरह से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। 1984 में फिरोज के भतीजे सरूश गांधी ने भी इसका जिक्र किया था। सरूश ने बताया था, भले ही इंदिरा गांधी की शादी हमारे परिवार में हो गई थी, लेकिन वह कभी इस बात को नहीं भूल पाई थीं कि वह नेहरू के बेटी हैं। वह परिवार के बीच खुद को अलग पाती थीं और अन्य सदस्यों से खुद को अलग दिखाने के प्रयास में लगी रहती थीं।

बदल गया था इंदिरा का स्वभाव: सरूश ने बताया था कि वह हमेशा हम लोगों के साथ अलग व्यवहार करती थीं और परिवार के बुजुर्ग लोगों के साथ इज्जत से पेश आती थीं। जबकि फिरोज गांधी को ये बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने हर बार इंदिरा गांधी के ऐसे बर्ताव का विरोध ही किया। यहीं से दोनों के रिश्तों में मतभेद की शुरुआत हुई थी।

साल 1960 में फिरोज गांधी के निधन के बाद इंदिरा गांधी के स्वभाव में एक बदलाव भी देखने को मिला। वह काफी हद तक अमीर-गरीब का फर्क मिटा चुकी थीं क्योंकि वह उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं।

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