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Ravish Kumar Lifestyle: रवीश कुमार ने बीच में ही छोड़ दी थी पत्रकारिता की पढ़ाई, कुकिंग का शौक; जानिये क्यों नहीं लगाते हैं सरनेम

NDTV के साथ रवीश कुमार (Ravish Kumar) का 25 सालों का सफर खत्म हो गया। अब वे अपने यू-ट्यूब चैनल पर दिखेंगे।

Ravish Kumar Lifestyle: रवीश कुमार ने बीच में ही छोड़ दी थी पत्रकारिता की पढ़ाई, कुकिंग का शौक; जानिये क्यों नहीं लगाते हैं सरनेम
Ravish Kumar Lifestyle: NDTV से रिजाइन के बाद रवीश कुमार अपने यू-ट्यूब चैनल पर दिखेंगे। (Express Archive)

रवीश कुमार (Ravish Kumar) ने एनडीटीवी (NDTV) से इस्तीफा दे दिया है। अब वो अपने यू-ट्यूब चैनल पर नजर आएंगे। रवीश कुमार साल 1996 में एनडीटीवी से जुड़े थे और तभी से चैनल के साथ थे। पिछले ढाई दशकों में के दौरान रवीश कुमार (Ravish Kumar) के तमाम प्रोग्राम, मसलन- ‘रवीश की रिपोर्ट’, ‘हम लोग’, ‘देश की बात’ और ‘प्राइम टाइम’ (Prime Time) जैसे खासा चर्चित रहे।

कौन हैं रवीश कुमार? (Ravish Kumar Biography)

5 दिसंबर 1974 को जन्में रवीश कुमार (Ravish Kumar) मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी के रहने वाले हैं। रवीश की शुरुआती पढ़ाई पटना के लोयोला हाईस्कूल से हुई। इसके बाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए। यहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के देशबंधु कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसी दौरान उनके शिक्षकों ने उन्हें पत्रकारिता में जाने की सलाह दी। Outlook को दिये एक इंटरव्यू में रवीश कहते हैं कि मैंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) में दाखिला ले लिया, लेकिन कोर्स पूरा नहीं कर पाया। चूंकि मैं इतिहास बैकग्राउंड का था, इसलिये आईआईएमसी का कोर्स मुझे समझ में नहीं आया।

रवीश कुमार ने 7 साल डेट के बाद की है लव मैरिज

रवीश कुमार (Ravish Kumar) ने नयना दासगुप्ता (Nayana Dasgupta) से शादी की है। दोनों की दो बेटियां हैं। नयना, मूल रूप से बंगाल से ताल्लुक रखती हैं और इन दिनों प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज में इतिहास की प्रोफेसर हैं। जेएनयू से पढ़ी-लिखी नयना और रवीश की मुलाकात कॉलेज के दिनों में हुई थी। दोनों ने 7 साल एक-दूसरे को डेट किया और फिर शादी कर ली थी। हालांकि शुरुआत में रवीश और नयना के परिवार को इस इंटरकास्ट शादी से ऐतराज था, लेकिन बाद में चीजें ठीक हो गईं।

10वीं क्लास में हटा दिया था सरनेम

रवीश कुमार (Ravish Kumar) जब दसवीं में थे, उन्हीं दिनों अपने नाम से सरनेम हटा दिया था। बाद में सरनेम पांडेय की जगह सिर्फ रवीश कुमार लिखने लगे। रवीश कुमार अपने कई इंटरव्यू में इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि उन्होंने अपने गांव में जातिगत भेदभाव को बहुत करीब से देखा-महसूस किया था। इसी वजह से सरनेम हटाने का फैसला ले लिया था।

सुबह 6 बजे जग जाते हैं, 7 बजे से काम शुरू

रवीश कुमार (Ravish Kumar Lifestyle) सुबह 6 बजे तक जग जाते हैं। 7 बजे से लैपटॉप पर काम भी शुरू कर देते हैं। कहते हैं कि मैं सोना चाहता हूं लेकिन कई बार नींद नहीं आती है। रवीश कुमार को कविताओं का शौक है। Unfiltered With Samdish को दिये इंटरव्यू में रवीश कुमार बताते हैं कि प्रख्यात लेखक कुंवर नारायण उनके पसंदीदा कवियों में से एक हैं। इसके अलावा अनुपम मिश्र, शम्सुर्रहमान फारूकी, विनोद कुमार शुक्ल भी उनके पसंदीदा लेखक हैं। रवीश के पास मारुती की विटारा ब्रीजा कार है।

रवीश को कुकिंग का शौक है

रवीश कुमार को खाना बनाने का भी शौक है। वह कहते हैं कि पहले मैं हफ्तों बाहर रहता था। ऑफिस से देर रात को घर लौटता था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान एक मौका मिला, घर को घर की तरह देखने का। नई चीजें सीखीं। उनमें से एक है चिकन बनाना। दोस्तों ने इसमें काफी मदद की, रेसिपी भेजी। फिर मैंने बनाकर उन्हें तस्वीर भेजी कि देखो कैसा बना है। बता दें, रवीश कुमार को रेमन मैग्सेसे जैसा प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुका है।

धमकी की वजह से रास्ता बदलकर चलना पड़ा था

रवीश कुमार कहते हैं कि मुझे लगातार धमकियां मिलती रही हैं। पहले अपनी जिंदगी खुलकर जीता था, लेकिन बंदूक के साये में जीना किसे पसंद है? मुझे धमकियां एक खास वर्ग और विचारधारा के लोगों से मिलीं, जो अब बहुत पावरफुल हो गए हैं। कई बार ऐसा हुआ कि मुझे बार-बार रास्ता बदलना पड़ा। बताया गया कि इस रास्ते से मत जाइये, खतरा है। रवीश (Ravish Kumar) कहते हैं कि मुझसे ज्यादा मेरे परिवार ने इसकी कीमत चुकाई, खासकर बच्चे। लॉकडाउन के दौरान मैंने इस बात को और करीब से समझा। कहीं जाता हूं तो लोग छिपकर बच्चों की तस्वीरें लेने लगते हैं। बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है।

NDTV से जाने के बाद नहीं हुई अर्णब गोस्वामी से बात

आपको बता दें कि कभी अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) भी एनडीटीवी का हिस्सा थे। बाद में वे अलग हो गए। रवीश कुमार बताते हैं एनडीटीवी छोड़ने के कुछ दिन बाद तक अर्णब से बात हो जाया करती थी, हाय…हैलो जैसी। लेकिन उसके बाद बात नहीं हुई। अर्णब, ऑक्सफोर्ड से पढ़े हैं। शायद, ऑक्सफोर्ड के इतिहास में वह सबसे खराब स्टूडेंट होंगे। सात-आठ सौ साल के इतिहास में किसी ने इतना खराब न्यूज प्रजेंटर नहीं देखा।

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First published on: 01-12-2022 at 01:14:58 pm
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