आपके नाम से ब्यूरोक्रेसी थर-थर कांपती है? शेखर गुप्ता के सवाल पर मायावती ने दिया था कुछ ऐसा जवाब

मायावती से एक इंटरव्यू में शेखर गुप्ता ने पूछा था, ‘ब्यूरोक्रेसी थर-थर कांपती है से आपका क्या मतलब था?’ इसके जवाब में मायावती ने कुछ ऐसा जवाब दिया था।

Mayawati, BSP Supremo
बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Photo- Indian Express)

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। मायावती ने साफ कर दिया है कि इस बार पार्टी किसी भी बाहुबली को टिकट नहीं देगी। मायावती सबसे पहली बार साल 1995 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने पहले कार्यकाल का अनुभव साझा किया था। मायावती ने बताया था कि उन्होंने सीएम बनते ही जिले के DM-SSP को लिखित में आदेश दे दिए थे और वह इस पर रिव्यू बैठक भी करती थीं।

DM-SSP को आदेश: मायावती से साल 2005 में एक इंटरव्यू के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने पूछा था, ‘आपकी ब्यूरोक्रेसी के साथ एक टेंशन रहती है। बिजनौर में आपने एक बार कहा कि ब्यूरोक्रेसी आपके नाम से थर-थर कांपती है। तो थर-थर कांपने से आपका क्या मतलब था?’ इसके जवाब में मायावती कहती हैं, ‘मतदाता को ये एहसास है कि ब्यूरोक्रेट्स कभी भी फील्ड में नहीं जाते थे। उनकी बात तक नहीं सुनते थे। जब मैं सीएम बनी तो मैंने हर जिले के DM-SSP को आदेश दिए कि वह दफ्तर में बैठेगा और लोगों की समस्याओं को सुनेगा।’

मायावती आगे कहती हैं, ‘मेरे समय में अधिकारी समय का ध्यान रखते थे। वह सुबह 10 बजे से दफ्तर में बैठते थे। लोगों की समस्याओं को सुनते थे और काम करते थे।’ शेखर गुप्ता कहते हैं, ‘ये थर-थर कांपने वाली क्या बात है?’ इस पर बीएसपी सुप्रीमो कहती हैं, ‘मैं जब उन्हें समय के साथ दफ्तर पहुंचने और काम करने का मौका देती थी तो उसका एक टाइम भी बांधती थी कि आपको इतने समय में इतना काम करना है।’

1995 में बनीं पहली बार सीएम: बकौल मायावती, इसके बाद मैं एक रिव्यू बैठक भी करती थी। कमिश्नर के साथ मीटिंग में अगर कुछ भी रिव्यू खराब मिलता था तो मैं उन अधिकारियों पर कार्रवाई भी करती थी। ब्यूरोक्रेसी अगर काम में विश्वास रखती है तो उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ। लेकिन जो अधिकारी ‘कामचोर’ थे उन लोगों को परेशानी भी होती थी। क्योंकि उन्हें इस बात का एहसास होता था कि अगर काम नहीं किया तो तबादला या कुछ अन्य कार्रवाई की जाएगी।’

बता दें, मायावती साल 1995 में पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। उस समय मायावती सबसे कम उम्र में सूबे की सीएम बनी थीं। हालांकि ये सरकार लंबे समय तक नहीं चल सकी थी। साल 2007 में पहला मौका आया जब बीएसपी सबसे बड़ी पार्टी बनी और मायावती एक बार फिर यूपी की सीएम बनीं और अपना कार्यकाल भी पूरा किया।

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