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फैशन में झुमका

फैशन में सिर्फ कपड़ों और पहनावों को लेकर नहीं, साज-शृंगार और दूसरी सजावटी चीजों को लेकर भी खूब प्रयोग हो रहे हैं।

Author April 15, 2018 01:45 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

फैशन में सिर्फ कपड़ों और पहनावों को लेकर नहीं, साज-शृंगार और दूसरी सजावटी चीजों को लेकर भी खूब प्रयोग हो रहे हैं। उसी कड़ी में इन दिनों कानों में पहनी जाने वाली बालियों, बुंदों आदि की जगह अब बड़े आकार के झुमकों ने ले ली है। लगभग पूरे गाल को ढकने और विभिन्न आकृतियों वाले झुमके इन दिनों फैशन में हैं। परिधान, शारीरिक बनावट और अवसरों के अनुसार किस-किस तरह के झुमके पहनना उचित होता है, बता रही हैं मीना। 

खनक सिर्फ चूड़ियों में या रुनझुन सिर्फ पायलों में नहीं होती। आजकल जो झुमके चलन में हैं उनमें भी खनक और रुनझुन सुनाई देती है। आजकल जिस तरह के कान के बड़े-बड़े झुमकों का चलन बढ़ा है, उससे चेहरे पर कुछ अतिरिक्त करने की जरूरत महसूस नहीं होती। बस दो झुमके महिलाओं के व्यक्तित्व को निखार देते हैं। कनॉट प्लेस, जनपथ या सरोजिनी नगर कोई भी बाजार हो, ब्रास, मेटल, चांदी वर्क, मोती, शीशा आदि से बने झुमके लड़कियों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। ये झुमके चाहे किसी स्टॉल में हों या सड़क पर खुले में बेचे जा रहे हों, लड़कियों की भीड़ देखते ही बनती है।
आज झुमकों का कोई भी डिजाइन किसी से अछूता नहीं रहा है। अफगान से लेकर अमेरिका तक के ट्रैंडी झुमके हिंदुस्तान के बाजारों में देखने को मिल जाएंगे। आजकल बाजारों में ट्रेसल, थ्रेड, आदिवासी स्टाइल, कपड़े से बने झुमके, पंख, विभिन्न आकृतियों से बने झुमके आदि लड़कियों को खूब भा रहे हैं। झुमके केवल शृंगार का हिस्सा न रह कर व्यक्तित्व और आत्मविश्वास का हिस्सा बन गए हैं।
चेहरे के आकार के अनुसार पहनें झुमके
किसी का चेहरा भारी होता है, तो किसी का पतला। अब यह जरूरी नहीं कि हर तरह के झुमके हर फेसकट पर अच्छे लगें। हालांकि यह सबकी अपनी पसंद होती है कि वह किस तरह के झुमके पहनना पसंद करता है। फैशन डिजाइनर रोहित बल के साथ काम करने वाले सुशांत बताते हैं कि अगर किसी का चेहरा पतला है, तो उसे चौड़ाई वाले झुमके पहनने चाहिए। जिनके चेहरे भारी होते या भरे हुए दिखते हैं उन्हें चौड़े झुमके या बड़े आकार वाले झुमके नहीं पहनने चाहिए, क्योंकि झुमकों का आकार चौड़ा होता है, जो छतरी की तरह दिखाई देते हैं। अगर भारी चेहरे वाली महिलाएं भारी झुमके पहनती हैं तो उनका तालमेल ठीक से नहीं बन पाता। भारी चेहरे वाली महिलाओं को चांदबाली जैसे कम चौड़ाई वाले झुमके या लंबे झुमके पहनने चाहिए। इस तरह के दो आयाम वाले झुमके पहनने से आप सुंदर तो दिखेंगी ही, अगर आप किसी शादी या पार्टी में जाती हैं तो वहां आपकी तस्वीरें साइड एंगल से सुंदर आएंगी। वे यह भी कहते हैं कि यह जरूरी नहीं कि भारी झुमके भारी चेहरे वाली महिलाएं नहीं पहन सकतीं, क्योंकि यह सभी की अपनी पसंद पर निर्भर करता है।
कॉलेज के लिए पहनें चकमदार झुमके
खुद को सजाने-संवारने और प्रेजेंट करने का कॉलेज सबसे अच्छा स्थान होता है। तो अगर आप भी कॉलेज जाती हैं और खुद को आकर्षक दिखाना चाहती हैं तो चकमदार रंग के झुमके पहन सकती हैं। एक संस्था के साथ काम करने वाली फैशन डिजाइनर नीलम थपलियाल बताती हैं कि आजकल जवान युवतियां चमकदार रंग और खूब सारे रंग की बालियां या झुमके पहनना पसंद कर रही हैं। वे बताती हैं कि वे जो गहने तैयार करती हैं उनमें पेपर क्विलिंग, बीड्स, अखबार और कपड़ा आदि जैसे वेस्ट मटिरियल का इस्तेमाल होता है। इस सामग्री से बने झुमके एक तो हल्के होते हैं, दूसरे सस्ते होते हैं। इसलिए कॉलेज जाने वाली लड़कियां इस तरह की एक्ससरीज पहनना ज्यादा पसंद करती हैं। हम कोशिश करते हैं कि अपनी एक्ससरीज में ट्रैंडी रंगों का इस्तेमाल करें। वे बताती हैं कि दो तरह की महिलाएं होती हैं। एक तो वे जो भारतीय शैली के झुमके पहनना पसंद करती हैं और दूसरी वे जो पश्चिमी ढंग के झुमके पहनती हैं। जो लड़कियां भारतीय शैली को पसंद करती हैं और कुर्ता, लहंगा या साड़ी पहनती हैं, वे मिट्टी से जुड़े रंगों के झुमके ज्यादा पसंद करती हैं। वे संतरी, मस्टर्ड, लाल, हरा आदि रंगों की ज्वैलरी पसंद कर रही हैं। नीलम बताती हैं कि कॉलेज जाने वाली लड़कियां एथनिक स्टाइल के झुमके पहन सकती हैं। इस तरह के झुमके उनके चेहरे की रौनक और चमक बढ़ा देते हैं।

पश्चिमी परिधान पर आकृतियों वाले झुमके
रैप्रॉन, जंपसूट्स, लंबी बाजू वाली ड्रेस, स्कर्ट्स, गाउन, ट्राउजर्स, टैपर्ड पैंट्स आदि जैसे पश्चिमी परिधानों के साथ आप हाथी, मछली, मोर, कमल और गुलाब का फूल, चप्पल, गणेश आदि की आकृति वाले झुमके पहन सकती हैं। आजकल बाजार में कई जानवरों और पक्षियों की आकृतियों के झुमके आ रहे हैं, जो चलन में भी खूब हैं। अगर आप कामकाजी महिला हैं तो सिल्वर ओक्साइड, मोती, कुंदन, टेराकोटा, हूप, इअरकफ्स, चांदबाली जैसी कई धातुओं के बने झुमके पहन सकती हैं। इन धातुओं से बनी कृत्रिम ज्वैलरी कामकाजी महिलाओं को खूब लुभा रही है। कामकाजी महिलाओं के पास इतना समय नहीं होता कि वे खुद को संवारने में बहुत अधिक समय लगाएं। ऐसे में उन्हें ऐसे झुमकों का चुनाव करना पड़ता है जो सभी तरह की पोशाकों के साथ चल जाएं। वे ऐसे झुमकों का चुनाव करती हैं, जो हल्के हों और लगभग सभी परिधानों के साथ मैच करते हों। आजकल आने वाले झुमकों की खासियत है कि दिखने में तो भारी होते हैं, लेकिन पहनने पर उतने भारी नहीं होते। जो महिलाएं रोजाना दफ्तर जाती हैं उनके लिए मुश्किल हो जाता है भारी गहनों को संभालना। ऐसे में उन्हें हल्के झुमके ही पहनने चाहिए। वेस्टर्न लुक देने के लिए आप कानों में बड़े-बड़े ट्रेसल के झुमके, गले में हल्की एक्ससरीज, कंधों पर साइड वाला छोटा बैग या हैंड बैग और पैरों में हाई हील पहन सकती हैं।
मेकअप नहीं, तो पहनें अफगानी झुमके
झुमकों पर गाने और कविताएं खूब लिखी गई हैं, उन्हें फिल्माया भी गया है। इनकी लोकप्रियता पहले भी थी और आज भी है। अगर आप मेकअप की बहुत शौकीन नहीं हैं, तो आप अफगानी झुमके पहन सकती हैं। अफगानी झुमकों की खासियत यह है कि इनमें कई रंग होते हैं। एक ही झुमके में घुंघरू और कई रंग होते हैं। ये देखने में चांदी के बने हुए लगते हैं। इन झुमको का रंग इतना चमकदार होता है कि चेहरे पर किसी और मेकअप की जरूरत ही महसूस नहीं होती। नीलम बताती हैं कि अगर किसी के चेहरे का रंग कुछ फीका है तो उसे अफगानी झुमके या ऐसे झुमके पहनने चाहिए, जिनका रंग चमकदार हो। ऐसे लोगों को खुशरंग पहनने चाहिए। भारी झुमके केवल देखने में भारी होते हैं, पहनने में हल्के होते हैं, उन्हें पहन कर आप असहज महसूस नहीं करेंगी। सुशांत बताते हैं कि झुमकों का हमारे कपड़ों के साथ महत्त्व बढ़ जाता है। चेहरे पर चमक ही झुमकों के कारण आती है। वे बताते हैं कि कई बार हमारे आउटफिट्स गला बंद होते हैं, जिनमें कोई और ज्वैलरी काम नहीं कर पाती। ऐसे में कान के झुमके ही होते हैं, जो किसी की खूबसूरती बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसलिए आजकल बड़े-बड़े इयरिंग्स का चलन ज्यादा है।
घट रही है सोने के गहनों की मांग
आज जिस तरह से कृत्रिम गहनों की मांग बढ़ी है, उससे सोने के गहनों की मांग घट गई है। अब केवल शादी-ब्याह में सोने के झुमके पहने हुए दिखती हैं महिलाएं। रोहित बल के साथ काम करने वाले सुशांत बताते हैं कि सोने की मांग इसलिए भी घटी है, क्योंकि कृत्रिम गहनों ने सोने की ज्वैलरी को अच्छे से कॉपी किया है। साथ ही कृत्रिम गहनों में विभिन्नता बढ़ जाती है। महंगाई अधिक है। कोई महिला जितने रुपए में सोने के कान का एक झुमका खरीदेगी उतने में कृत्रिम झुमकों के कई सैट खरीद लेगी, जिससे उनके वॉर्डरोब में कई तरह के झुमके हो जाएंगे। इसलिए भी महिलाओं में कृत्रिम झुमकों की मांग बढ़ रही है। समूची सुंदरता को प्रदर्शित कर रहा है झुमका। ०

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