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पर्मानेंट मेकअप के जरिए कैंसर पेशेंट्स के जीवन में खुशियों का रंग भर रही है यह महिला

जर्मन कलर्स और नीडल्स के द्वारा पर्मानेंट मेकअप किया जाता है। पर्मानेंट मेकअप का कोई साइड इफैक्ट नहीं है, बस इस प्रॉसैस को करने के बाद हल्की सी रेडनेस नजर आती है जो 15 से 20 मिनट में चली जाती है।

Author नई दिल्ली | December 13, 2016 6:08 PM
एल्प्स कॉस्मेटिक क्लिनिक की संस्थापक गंगुजन गौड़ कैंसर के इलाज के दौरान अपने आईब्रोज़ गवां चुके लोगों को पर्मानेंट मेकअप के जरिए फिर से उनके चेहरे की रौनक वापस लाने में मदद करती हैं।

हर किसी की चाहत होती है कि वह खूबसूरत और आकर्षक दिखे। खूबसूरती की असली परिभाषा यह है कि आपके चेहरे पर हर वक्त मुस्कान हो और आप हरदम ताजातरीन नजर आएं। लेकिन कैंसर, ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों के दौरान ली जाने वाली दवाएं व इनके उपचार के दौरान की जाने वाली थैरेपी के कारण इंसान के शरीर व सिर के सारे बाल जल जाते हैं। इन बीमारियों में ली जाने वाली दवाओं का असर इतना खतरनाक होता है कि इंसान के चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली आईब्रोज भी खत्म हो जाती हैं, जिससे किसी भी इंसान की सुंदरता फीकी पड़ जाती है। लेकिन आज की आधुनिक और साइंटिफिक दुनिया में किसी भी मर्ज और परेशानी का इलाज कठिन तो हो सकता है लेकिन असंभव बिल्कुल नहीं हो सकता।

कैंसर और ट्यूमर के इलाज के दौरान अपने बाल और आईब्रोज गवां देने वाले ऐसे ही पेशेन्ट्स की जिंदगी में खूबसूरती के रंग भरने का काम कर रही हैं पर्मानेंट मेकअप एक्सपर्ट गुंजन गौड़। कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही किसी के भी रोंगटे खड़े जाएं। इस बीमारी का दर्द कितना भयावह है ये तो वही समझ सकता है, जो इससे होकर गुज़र रहा हो या गुज़र चुका हो। ऐसे ही लोगों के दर्द को समझा है गुंजन गौड़ ने। एल्प्स ब्यूटी ग्रुप की एग्जूग्यूटिव डाइरेक्टर गुंजन गौड़ ने ऐसे लोगों को कुछ पल की खुशी और मानसिक सुकून देने के लिए हाल ही में एक फ्री वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप में उन्होंने कीमोथैरेपी के कारण अपने आईब्रोज़ गवां चुकी महिलाओं का मुफ्त पर्मानेंट मेकअप किया।

गुंजन का इस बारे में कहती हैं, ‘मेरा हमेशा से एक ही सपना था कि मैं अपने प्रोफेशन से जुड़ा कुछ ऐसा काम करूं जिससे लोगों को खुशी दे सकूं और उनकी दुआएं हासिल करूं।जब मैंने पर्मानेंट मेकअप सीखा और इस हुनर का कैंसर और ट्यूमर के इलाज के कारण अपने बाल गवां देने वाले मरीजों की खूबसूरती लौटाने के लिए उपयोग किया उसी वक्त मुझे ये एहसास हो गया कि आज मैं कुछ बन गई हूं। ये बीमारी जिसे हम सब कैंसर के नाम से जानते हैं, ये शारीरिक के साथ-साथ मानसिक पीड़ा भी देती है। ये पीड़ा तब और दोगुनी हो जाती है, जब इंसान के चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली आईब्रोज़, इस बीमारी के इलाज के दौरान खत्म हो जाती हैं। ऐसे में मैं अपने हुनर के बल पर ऐसे लोगों का  इलाज कर उनको उनकी खूबसूरती लौटाने में मदद करती हूं और उनके दर्द को कम करने की कोशिश करती हूं।’  गुंजन ने इसी सोच के तहत कैंसर के इलाज के दौरान अपने बाल गवां देने वाले मरीजों के लिए ब्लिस फाउंडेशन के साथ मिलकर हाल ही में एक वर्कशॉप का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने मुफ्त में कैंसर के इलाज के दौरान अपने आईब्रोज़ गवां चुके लोगों का पर्मानेंट मेकअप किया।

एल्प्स ब्यूटी ग्रुप एग्जिक्यूटिव डाइरेक्टर गुंजन गौड़ फ्री वर्कशॉप के दौरान अपने पेशेंट्स के साथ। एल्प्स ब्यूटी ग्रुप एग्जिक्यूटिव डाइरेक्टर गुंजन गौड़ फ्री वर्कशॉप के दौरान अपने पेशेंट्स के साथ।

क्या होता है पर्मानेंट मेकअप: जो कैंसर के मरीज कीमोथैरेपी के दौरान अपनी आईब्रोज़ के बाल खो चुके होते हैं, उन्हें अपनी खूबसूरती को बनाए रखने के लिए आईब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करना पड़ता है। लेकिन पर्मानेंट आईब्रोज बनवाकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके जरिए मशीन द्धारा एक बार आईब्रो को खूबसूरत शेप व मनचाहे रंग में बना दिया जाता है जो पसीने या नहाने से खराब नहीं होती है। इसका असर लगभग 12 से 15 साल बना रहता है। इस प्रक्रिया को करने में किसी ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती है। जर्मन कलर्स और नीडल्स के द्वारा पर्मानेंट मेकअप किया जाता है। पर्मानेंट मेकअप का कोई साइड इफैक्ट नहीं है, बस इस प्रॉसैस को करने के बाद हल्की सी रेडनेस नजर आती है जो 15 से 20 मिनट में चली जाती है।

गुंजन बताती हैं कि शुरू में पर्मानेंट मेकअप को लेकर कैंसर पेशेंट्स में डर था। ऐसे में उन्होंने खुद लोगों से बात की और उन्हें ये आश्वासन दिया कि जितना दर्द थ्रेडिंग बनवाने के दौरान होता है, बस उतना ही दर्द पर्मानेंट आईब्रोज़ बनवाते वक्त होगा। जिसके बाद लोगों ने इसको अपनाना शुरू किया। कैंसर की लड़ाई से जीत हासिल करने के बाद गुंजन से पर्मानेंट मेकअप के जरिए अपने आईब्रोज़ वापस पाने वाली  निधि कहती हैं, ‘कीमोथैरेपी के दौरान मेरे बाल पूरी तरह से जल चुके थे और रोजाना कहीं बाहर निकलने से पहले मुझे आईब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करना पड़ता था। ये पेंसिल से बनाई हुई आईब्रो या तो हाथ लगने से कभी मिट जाती थी या फिर पसीने या भीगने से खराब हो जाती थी। लेकिन, पर्मानेंट आईब्रोज़ बनवाकर मुझे अब बाहर निकलने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती।’

वीडियो: जानिए क्या होता है पर्मानेंट मेकअप

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