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जिस ऐप को सरकारी एजेंसी ने बताया सुरक्षा के लिए खतरा, उसी का इस्तेमाल करते दिखे रक्षा मंत्री

एक्सपर्ट्स ने रक्षा मंत्री की मीटिंग में जूम ऐप के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किये हैं और इसे प्राइवेसी से समझौता बताया है।

Author Published on: April 6, 2020 6:44 PM
रक्षा मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में जिस जूम ऐप का इस्तेमाल किया, उसे CERT सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए खतरा बता चुकी है।

कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते देश में इन दिनों लॉक डाउन है। केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम कार्यालय भी आंशिक तौर पर बंद हैं। कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। तमाम सरकारी मीटिंग्स भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हो रही हैं। इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भी सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल बिपिन रावत, तीनों सेना प्रमुखों और अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मीटिंग की और COVID-19 से निपटने के लिए उठाए जा रहे तमाम कदमों समीक्षा की।

हालांकि अब रक्षा मंत्री की इस मीटिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस वीडियो कांफ्रेंसिंग में जिस जूम ऐप (Zoom App) का इस्तेमाल किया, उसे सरकार की ही एजेंसी CERT (कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बता चुकी है।

क्या कहा था CERT ने? : इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस यानी सीईआरटी ने पिछले हफ्ते ही जूम एप (Zoom App) को लेकर साफ शब्दों में चेतावनी दी थी। CERT ने कहा था कि जूम ऐप साइबर थ्रेट का बड़ा जरिया बना सकता है और इससे साइबर क्राइम बढ़ सकता है। एजेंसी ने कहा था कि इस ऐप के जरिए साइबर अपराधी सरकारी और निजी ऑफिस से डाटा चोरी कर उसका गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

इसके अलावा जूम ऐप पर डाटा लीक होने का भी खतरा है। CERT ने यूजर्स की सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए कुछ सुझाव भी दिए थे और कहा था कि इस ऐप का इस्तेमाल करने से पहले इसे अपडेट रखें। इसके अलावा पासवर्ड का खास ख्याल रखें और मजबूत पासवर्ड बनाएं। साथ ही ऐप में वेटिंग फीचर को भी ऑन रखें।

एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? : एक्सपर्ट्स ने रक्षा मंत्री की मीटिंग में जूम ऐप के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किये हैं और इसे प्राइवेसी से समझौता बताया है। सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने रक्षा मंत्री के वीडियो कांफ्रेंसिंग की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘जूम दावा करता है कि वो एंड टू एंड इनक्रिप्शन ऑफर करता है। लेकिन एक जांच में पाया गया कि जब जूम पर हुईं मीटिंग्स की इनक्रिप्शन और डिक्रिप्शन कीज को चीन के सर्वर पर भेजा जाता है, तब सिक्योरिटी के साथ समझौता होने का खतरा रहता है। भारत के रक्षा मंत्री को इससे बचना चाहिए’।

उधर, वरिष्ठ पत्रकार अनंत कृष्णन ने लिखा, ‘सुरक्षा कारणों से मैं जूप ऐप के इस्तेमाल से बच रहा था। लेकिन अब देख रहा हूं कि भारत के रक्षा मंत्री सीडीएस से बात करने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये चौंकाने वाला है…’।

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