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इन योगासनों के जरिए मधुमेह के साथ मोटापा को भी करें नियंत्रित, बाबा रामदेव से जानिए

मधुमेह के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि इन योगासनों के जरिए मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Image: Freepik)

मधुमेह और मोटापे के कारण कई तरह की बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। डायबिटीज होने का सबसे बड़ा कारण मोटापा ही है। जब लोगों को मोटापे से नुकसान होने लगता है तो वे मोटापा कम करने के लिए कई उपाय करने लगते हैं। क्या आप जानते हैं कि योग के माध्यम से मधुमेह और मोटापे को भी नियंत्रित कर सकते हैं। मधुमेह के लिए कई योग मुद्राएं हैं जो आपको रोग पर नियंत्रण पाने में मदद कर सकती हैं। आइए बाबा रामदेव से जानते हैं-

बाबा रामदेव के मुताबिक आजकल मोटापा एक आम बीमारी हो गई है। कई लोग मोटापे की वजह से परेशान रहते हैं। मोटापा मधुमेह जैसी कई तरह की बीमारियों के होने की संभावना को बढ़ा देता है। इसलिए लोग अपने चर्बी और वजन को कम करने के लिए जिम जाते हैं, या फिर मोटापा कम करने के लिए डाइट पर कंट्रोल करते हैं। लेकिन योग के जरिए भी मोटापे पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

सर्वांगासन (Benefits of Sarvangasana)

  • यह थायराइड को सक्रिय और स्वस्थ बनाता है। इसलिए मोटापा, दुर्बलता, कद में कमी और थकान आदि विकार दूर होते हैं।
  • अधिवृक्क, शुक्राणु कॉर्ड और डिम्बग्रंथि ग्रंथियों को मजबूत करता है।
  • यह आसन दमा की 2-3 अवस्थाओं के लिए भी उपयोगी पाया गया है; क्योंकि इस आसन में कंधे स्थिर होते हैं।
  • पेट के अंगों, आंतों आदि का भार फ्रेनिक पेशी पर पड़ने से तथा श्वास-प्रश्वास में भाग लेने से डायफ्राम के स्वर में सुधार होता है।

उत्तानपादासन (Benefits of Uttanapadasana)

  • यह आसन आंतों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है और कब्ज, गैस, मोटापा आदि को दूर करता है और जठर की आग को प्रज्वलित करता है।
  • नाभि का विचलन, हृदय रोग, पेट दर्द, और श्वसन रोगों में भी उपयोगी।
  • यह पीठ दर्द में विशेष रूप से फायदेमंद होता है यदि इसे प्रत्येक पैर से धीरे-धीरे किया जाए।

हलासन (Benefits of Halasana)

  • यह रीढ़ को स्वस्थ और लचीला बनाकर पिछले हिस्से की मांसपेशियों को भी स्वस्थ बनाता है (पीठ की चर्बी कम करने के लिए योग)।
  • यह थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करके मोटापा, बौनापन और कमजोरी आदि को दूर करता है।
  • अपच, गैस, कब्ज, तिल्ली और यकृत वृद्धि, और हृदय रोग में लाभकारी।
  • अग्न्याशय को सक्रिय करता है और मधुमेह को दूर करता है।
  • मासिक धर्म में दर्द जैसे स्त्रीरोग संबंधी रोगों में भी यह आसन उपयोगी है।

नौकासन ((Benefits of Naukasana)

  • इसके लाभ उत्तानपादासन के समान हैं।
  • प्राणवायु के प्रवेश से हृदय और फेफड़े भी मजबूत होते हैं।
  • अत्र (आंत), पेट, अग्न्याशय और यकृत को स्वस्थ बनाता है।

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