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Children’s Day 2020: क्यों मनाया जाता है बाल दिवस? जानिये इस दिन का महत्व और इतिहास

Children's Day 2020:: चिल्ड्रेंस डे का इंतजार हर बच्चा बेसब्री से करता है। घर से लेकर विद्यालयों तक इस दिन हर बच्चे को खास महसूस कराया जाता है।

childrens day, childrens day 2020, bal diwas, bal diwas nibandh, bal diwas speechChildren’s Day 2020: साल 1964 से चाचा नेहरू को श्रद्धांजलि देने हेतु 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाने लगा

Children’s Day 2020: देश में प्रत्येक साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। भारत देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस के दिन उनकी याद में बाल दिवस मनाया जाता है। साल 1889 में 14 नवंबर को ही पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म हुआ था। पंडित नेहरू को बच्चों से बेहद लगाव था, बच्चे प्यार से उन्हें चाचा नेहरू कहकर पुकारते थे। बच्चों की शिक्षा व बेहतर जीवन के लिए नेहरू जी हमेशा आवाज उठाते थे।

बता दें कि वैश्विक तौर पर बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता है। वर्ष 1964 से पूर्व भारत में भी इसी दिन बाल दिवस मनाया जाता था। साल 1964 से चाचा नेहरू को श्रद्धांजलि देने हेतु 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाने लगा।

बाल दिवस का इतिहास: साल 1964 में जवाहरलाल नेहरू के देहांत के बाद उनके जन्मदिवस को देश भर में ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला लिया गया। पंडित नेहरू कहा करते थे कि, “आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे। जिस तरह से हम उन्हें लाएंगे, उससे देश का भविष्य निर्धारित होगा।”

क्यों इतना महत्वपूर्ण है ये दिन: चिल्ड्रेंस डे का इंतजार हर बच्चा बेसब्री से करता है। घर से लेकर विद्यालयों तक इस दिन हर बच्चे को खास महसूस कराया जाता है। स्कूल-कॉलेजों में रंगारंग सांस्कृति कार्यक्रमों का आयोजन होता है। ये दिन पूरी तरह से बच्चों को समर्पित होता है। बच्चों का मन बेहद नाजुक होता है, छोटी से छोटी बात उनके मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं। बाल दिवस के दिन सभी बच्चों को खासतौर पर गरीब व लाचार बच्चों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने एवं बाल श्रम एवं बाल शोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया जाता है। इस दिन चर्चाएं होती हैं जिसमें बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत, उनकी सही शिक्षा, पोषण, संस्कार के बारे में बातचीत होती है।

किस तरह मनाया जाता है: इस मौके पर विद्यालयों में भाषण, वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। कई स्कूलों में नाटक और तरह-तरह के मनोरंजक कार्यक्रम भी होते हैं। वहीं, कुछ जगहों पर मॉर्निंग असेंबली से लेकर सभी कार्य शिक्षक करते हैं। बाल दिवस के दिन कई स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है और म्यूजियम, चिड़िया-घर, तारामंडल व अन्य शैक्षणिक जगहों पर पिकनिक के लिए ले जाता है। साथ ही, चॉकलेट, बिस्किट, कपकेक जैसे छोटे-मोटे गिफ्ट्स दिये जाते हैं।

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