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Children’s Day Speech: बाल दिवस पर ये स्‍पीच देकर बच्चों तक पहुंचा सकते हैं पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का संदेश

Children's Day 2017 Speech (बाल दिवस निबंध एवं भाषण): पंडित जवाहरलाल नेहरु ने इस देश को विकसित देश बनाने के लिए बाल शिक्षा, कल्याण, अधिकारों और सम्पूर्ण सुधार का सपना देखा था।

childrens day, children's day 2017, children's day speech, children day, children day 2017, children day speech in hindi Children’s Day 2017 Speech: 1964 में नेहरु की मृत्यु के बाद उनके जन्मदिन को पूरे भारत में बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाने लगा।

Children’s Day 2017 Speech: संयुक्त राष्ट्र की सभा में 20 नवंबर को अधिकारिक रुप से बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी। भारत में 14 नवंबर को भारत के पहले प्रधानमंत्री के जन्मदिन को बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है। पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिन को बाल दिवस के रुप में इसलिए चुना गया क्योंकि नेहरु जी का बच्चों के प्रति विशेष स्नेह था। नेहरु जी बच्चों को देश के भविष्य की तरह देखते थे। नेहरु जी अपना अधिकतम समय बच्चों के साथ बिताना पसंद करते थे, वो हमेशा बच्चों के प्रति अपना लगाव जाहिर करते थे और चाहते थे देश को कामयाबी की राह तक देश के ये बच्चे ही पहुंचाए और इस देश को विकसित बनाए।

भारत के आजाद होने के बाद 500 देसी रियासतों को एक झंडे के नीचे लाने से लेकर देश के युवाओं के लिए रोजगार आदि जैसे कार्य कर आधुनिक भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। योजना आयोग का गठन करने के बाद पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया, जिससे भारत में उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ। नेहरु ने भारत की विदेश नीति में भी प्रमुख भूमिका निभाई। आज भारत के बच्चे हर क्षेत्र में अपने देश का नाम रौशन कर रहे हैं और दुनिया के सामने उदाहरण रख रहे हैं कि कला, विज्ञान, अध्यात्म किसी भी क्षेत्र में भारत किसी से भी कम नहीं है। भारत देश के बच्चों के लिए चाचा नेहरु ने इसी तरह का सपना देखा था।

पंडित जवाहरलाल नेहरु ने इस देश को विकसित देश बनाने के लिए बाल शिक्षा, कल्याण, अधिकारों और सम्पूर्ण सुधार का सपना देखा था और उसे पूर्ण करने के लिए हमेशा उत्साहित रहते थे और अपने काम को गर्मजोशी से करना पसंद करते थे। नेहरु जी बहुत ही प्रेरणादायक और प्रेरित प्रकृति के थे। वह हमेशा बच्चों को कठिन परिश्रम और बहादुरी के कार्य करने के लिए प्ररित करते थे। बच्चों को उनके बचपन के अधिकार प्राप्त हो सकें इसके लिए उन्होनें बच्चों के स्वास्थ के लिए परिश्रम किया। बच्चों से स्वार्थहित प्रेम के कारण उन्हें चाचा नेहरु का नाम दिया गया।

1964 में उनकी मृत्यु के बाद उनके जन्मदिन को पूरे भारत में बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाने लगा। हमेशा बिना किसी व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय, पारिवारिक और वित्तीय जिम्मेदारी के बचपन और बच्चों के समर्थक रहे। उनका मानना था कि बचपन जीवन का सबसे अच्छा समय होता है ये हमेशा खुशियों और स्वास्थय से भरा होना चाहिए जिससे वो हमेशा अपने देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार रहें और देश का नाम हमेशा ऊंचा करें और इसे एक विकसित देश बनाएं।

देश के हर नागरिक को अपने कर्तव्यों को समझते हुए राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए हर क्षेत्र में अग्रसर रखना होगा। बाल दिवस के दिन उल्लास की गतिविधियों जैसे खेल-कूद, नाटक-नृत्य आदि का आयोजन किया जाता है। ये वो दिन है जिसमें बच्चों से हर प्रतिबंध को हटाया जाता है और उन्हें अपने अनुसार उड़ान भरने का मौका दिया जाता है। स्कूलों में इस दिन को खास बनाने के लिए कार्यक्रम रखे जाते हैं। फैंसी ड्रेस, डांस, नाटक आदि जैसे कार्यक्रम रखे जाते हैं। इस दिन नेहरु जी की सीख बच्चों को समझाने का प्रयास किया जाता है। इस तरह से बच्चों के जीवन में चाचा नेहरु के महत्व को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। इस दिवस को हर कोई अपने अनुसार बेहतर रुप में मनाने का प्रयास करता है।

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