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बचपन से मोटा है बच्चा तो संभल जाइए, आगे चलकर उसे हो सकती है यह गंभीर बीमारी

इसी अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कुल मोटापाग्रस्त किशोरों का ग्यारह फीसद और वयस्कों का बीस फीसद अकेले भारत में है। भारत की अधिकांश आबादी भोजन प्रेमी है।
Author May 19, 2017 17:45 pm
भारत समेत दुनियाभर में मोटापा की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। (प्रतीकात्मक चित्र)

अगर आपका बच्चा अधिक वजनी है या कम उम्र से ही मोटापे से पीड़ित है तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि कम उम्र का मोटापा जीवन भर के लिए अवसाद का कारण बन सकता है। एक नए शोध में अध्ययनकर्ताओं ने यह पाया है कि आठ और 13 साल की आयु में मोटापा जीवन की किसी अवधि में अवसाद के विकास के तीन गुना जोखिम से संबंधित है।

शोध के दौरान पता चला कि बच्चे और एक वयस्क के रूप में जीवन की दोनों अवधियों में इस रोग से ग्रस्त रहने वालों को केवल वयस्कावस्था में इस समस्या का सामना करने वालों की तुलना में अवसाद होने की चौगुनी संभावना होती है।

व्रीजे यूनिवर्सिटी एम्सटरडम के देबोराह गिब्सन-स्मिथ ने बताया, “हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि कुछ मौलिक चीजें बचपन के अधिक वजन या मोटापा को अवसाद से जोड़ती हैं। आनुवांशिक जोखिम या आत्मसम्मान की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है, जो अक्सर उन लोगों में होती है, जो आदर्श शरीर के प्रकार के अनुरूप नहीं होते हैं।”

इस शोध के लिए अध्ययनकर्ताओं के दल ने 889 प्रतिभागियों का आकलन किया था। यह निष्कर्ष पुर्तगाल में आयोजित यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया था।

आमतौर पर यह माना जाता है कि मोटापा आर्थिक रूप से संपन्न पश्चिमी देशों की समस्या है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह से सही नहीं है। क्योंकि भारत जैसे विकासशील देश में भी यह समस्या धीरे-धीरे अपने पांव पसार रही है। यह उल्लेखनीय है कि मोटापे के मामले में भारत का स्थान दुनिया में तीसरा है। पिछले दिनों ग्लोबल अलायंस फॉर इंप्रूव्ड न्यूट्रिशन (गेन) द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मोटापे के मामले में अमेरिका व चीन के बाद दुनिया में तीसरा स्थान भारत का ही है।

इसी अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कुल मोटापाग्रस्त किशोरों का ग्यारह फीसद और वयस्कों का बीस फीसद अकेले भारत में है। भारत की अधिकांश आबादी भोजन प्रेमी है। लिहाजा, यहां स्वादिष्ट भोजनों की विविधता है। पहले लोग यह भोजन करने के बाद खेती और दूसरे कामों में कठिन शारीरिक श्रम करते थे, जिससे वह भोजन शरीर में कैलोरी की मात्रा नहीं बढ़ा पाता था।

अब आज के इस सुविधाभोगी दौर में लोग खा तो पहले जैसे रहे हैं या उससे कहीं बढ़ कर ज्यादा कैलोरी वाले भोजन कर रहे हैं, पर शारीरिक श्रम बहुत कम या न के बराबर कर रहे हैं। फलस्वरूप मोटापे व अधिक शारीरिक वजन की समस्या दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। इस संदर्भ में भारत का हालिया राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण भी उल्लेखनीय है, जिसके अनुसार भारत में बीस फीसद से अधिक शहरी लोग अतिभारित या मोटे हैं। इन बातों से स्पष्ट है कि मोटापा अब पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।

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