सोशल मीडिया पर खाने-पीने से जुड़े कई तरह के वीडियो सामने आते रहते हैं। इनमें कुछ ऐसे किचन हैक्स भी होते हैं, जिन्हें देखकर लोग कुछ नया आजमाने की कोशिश करते हैं। खासकर तब, जब घर में किसी जरूरी चीज की कमी हो। हाल ही में एक वीडियो में देखा गया कि चने से दही जमाने के लिए कल्चर या स्टार्टर बनाने का दावा किया गया था। अब तक हम देखते आए हैं कि मुख्य रूप से दूध से दही बनाई जाती है। लेकिन अब सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि चने की मदद से भी दही बना सकते हैं।
इस दावे की सच्चाई के बारे में जानने के लिए इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने बावा ग्रुप ऑफ होटल्स के डायरेक्टर ऑफ कुलिनरी शेफ स्वप्निल मुले से बात की तो उन्होंने बताया कि छोले से दही जैसा उत्पाद बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि, “छोलों को रातभर पानी में भिगोने से उनमें प्राकृतिक रूप से फर्मेंटेशन यानी किण्वन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे इनमें मौजूद प्राकृतिक फाइबर अच्छे बैक्टीरिया जैसे लैक्टोबैसिलस के बढ़ने में मदद करते हैं।”
स्टार्टर कैसे तैयार करें
छोले को रातभर पानी में भिगोएं। इसके बाद थोड़े से बचे हुए पानी और ताजे पानी की मदद से उन्हें पीसकर पेस्ट बना लें। पारंपरिक तरीके से भिगोए और उबले हुए छोलों को पानी के साथ पीसकर कुछ समय के लिए प्राकृतिक रूप से फर्मेंट होने के लिए छोड़ दिया जाता है।
केआईएमएस हॉस्पिटल, थाने की चीफ डाइटिशियन अमरीन शेख ने बताया कि, “इस मिश्रण को ढककर साफ बर्तन में कमरे के तापमान पर रखना चाहिए। इसमें मौदूद प्राकृतिक सूक्ष्मजीव फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। जब इसमें हल्की खट्टी गंध और स्वाद आने लगे, तो इसकी थोड़ी मात्रा को दूसरे बैच में स्टार्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।”
सामान्य दही से कितना अलग है छोले से बनी दही
यह प्रक्रिया सामान्य दही के एक चम्मच को स्टार्टर के रूप में इस्तेमाल करने से अलग है। अमरीन शेख के मुताबिक, “इसमें मौजूद सूक्ष्मजीवों की मात्रा और प्रकार का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। इसलिए इसे बनाते समय साफ-सफाई और फर्मेंटेशन की सही परिस्थितियों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।” सामान्य डेयरी दही लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया, खासकर लैक्टोबैसिलस की कुछ प्रजातियों की मदद से बनाया जाता है। ये बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज को फर्मेंट करते हैं। सामान्य दही में अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन, कैल्शियम और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
अमरीन शेख कहती हैं कि, “चने से बना फर्मेंटेड उत्पाद प्राकृतिक रूप से डेयरी-फ्री होता है। इसलिए यह उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो दूध या डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करते। चने से इसमें प्लांट प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और कई अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। फर्मेंटेशन की प्रक्रिया कुछ पोषक तत्वों को पचाना आसान बना सकती है और दालों में मौजूद कुछ ऐसे तत्वों को कम कर सकती है, जो पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा डालते हैं।” हालांकि, पोषण के मामले में छोले से बना फर्मेंटेड दही सामान्य दही के बराबर नहीं होता। “छोलों का फर्मेंटेशन अपने आप इसे कैल्शियम, प्रोटीन की गुणवत्ता या प्रोबायोटिक सामग्री के मामले में सामान्य दही के बराबर नहीं बना पाता।”
घर पर बनाते समय किन बातों को रखें ध्यान
घर पर इसे बनाते समय साफ बर्तन, साफ पानी और सही तरीके से स्टोर करना बहुत जरूरी होता है। “अगर मिश्रण से खराब या अजीब गंध आने लगे, उसका रंग असामान्य हो जाए, उसमें फफूंद दिखाई दे या वह ज्यादा खराब होने लगे, तो उसे फेंक देना चाहिए।” इसके आगे अमरीन शेख कहती हैं कि अगर आप प्रोबायोटिक फायदे के लिए फर्मेंटेड प्लांट-बेस्ड उत्पाद लेना चाहते हैं, तो ऐसे बाजार में उपलब्ध उत्पाद का इस्तेमाल करना ज्यादा भरोसेमंद विकल्प है, जिसमें प्रोबायोटिकि कल्चर की जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई हो।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस की टीम द्वारा बात किए गए विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी नई दिनचर्या या उपाय को अपनाने से पहले अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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