कांशीराम से किसी को मिलने नहीं देती थीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती, जानिए क्या थी वजह

बीएसपी सुप्रीमो ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह कांशीराम से किसी को इसलिए नहीं मिलने देती थीं क्योंकि विरोधी पार्टियां उनके ऊपर हमला भी करवा सकती थीं।

Mayawati, BSP Supremo
बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Photo- Indian Express)

बीएसपी सुप्रीमो मायावती साल 1995 में पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। मायवती को राजनीति में लाने वाले कांशीराम थे। मायावती ने कभी नहीं सोचा था कि वह राजनीति में आएंगी, वह तो IAS बनना चाहती थीं, लेकिन कांशीराम उन्हें राजनीति में आगे लेकर जाना चाहते थे। साल 2006 में कांशीराम का निधन हो गया था। इससे पहले मायावती पर कांशीराम से किसी नहीं मिलने देने के आरोप लगे थे।

मई 2005 में वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने मायावती से पूछा था, ‘आप पर कांशीराम के परिवार ने नहीं मिलने देने के आरोप लगाए। ऐसी क्या वजह है कि आपने नहीं मिलने दिया?’ मायावती ने कहा था, ‘कांशीराम जी के परिवार को विरोधी पार्टियों के द्वारा लालच दिया गया, कुछ पैसों का भी लालच दिया गया। विरोधियों के हाथ में वो खेल गए तो परिवार ने भी कांशीराम जी के यहां रुकने का विरोध किया। वह तो कोर्ट तक पहुंचे, लेकिन बहुजन समाज मेरे साथ खड़ा रहा।’

क्यों नहीं मिलने देती थीं मायावती? मायावती आगे कहती हैं, ‘मैं कांशीराम जी का परिवार से ज्यादा ध्यान रख रही हूं। सब कहते हैं कि एक बेटा भी उनका ऐसे ध्यान नहीं रख सकता था। एम्स के डॉक्टर की टीम आई थी और उन्होंने कांशीराम जी की दवाई देखी थीं। उन्होंने इन दवाइयों को बिल्कुल ठीक बताया था।’ शेखर गुप्ता सवाल करते हैं, ‘आप कांशीराम जी को छिपाकर रखती हैं। किसी को आप उनसे मिलने नहीं देतीं।’

मायावती कहती हैं, ‘मैं उन्हें छिपाकर क्या रखूंगी? अब पता नहीं कोई व्यक्ति किस शरारत के तहत यहां आ गया। मुझे जेड+ की सिक्योरिटी मिली है। अब पता नहीं विरोधी पार्टी के लोग किसी षड्यंत्र के तहत किसी असामाजिक तत्व को मेरे घर पर भेज दें और ऐसी कोई चीज रख दें कि मेरा घर ही उड़ जाए। मैं और कांशीराम जी भी उड़ जाएं। तो ऐसे मैं किसी भी व्यक्ति को नहीं मिलने दे सकती हूं।’

बकौल मायावती, कांशीराम जी ने खुद कहा था कि मेरे घर वाले लोग बिल्कुल गलत कर रहे हैं। वह स्वार्थी लोग हैं। मायावती जो कर रही हैं वो बिल्कुल सही कर रही हैं। ये विवाद तो अस्पताल से ही शुरू हो गया था। इसमें कुछ भी नया नहीं है।

घर पहुंचे कांशीराम: मायावती ने केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद एक भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने दलितों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का इस्तेमाल करने पर आपत्ति जाहिर की थी। इस भाषण की बात उस समय ‘बामसेफ’ नाम से संगठन चला रहे कांशीराम तक पहुंची थी।

कांशीराम मायावती के दिल्ली स्थित घर पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने मायावती को उनके संगठन से जुड़ने का ऑफर दिया था, लेकिन मायावती के लिए ये फैसला करना आसान नहीं था। बाद में वह आगे आईं और कांशीराम का साथ देने का फैसला किया। देखते ही देखते मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बन गईं।

पिता नहीं चाहते थे राजनीति में जाएं: मायावती के पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी राजनीति में जाए। वह मायावती को सिविल सर्वेंट के रूप में देखना चाहते थे। मायावती यूपीएससी की तैयारी भी कर रही थीं, लेकिन उन्होंने पिता की मर्जी के खिलाफ फैसला लिया था।

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