बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल इन दिनों फिल्मी पर्दे पर अपने नेगेटिव रोल को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। अभिनेता पिछले कुछ समय से हिंदी सिनेमा से लेकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री तक में अपने नेगेटिव किरदार से जमकर वाहवाही लूट रहे हैं। लेकिन इस वक्त वह अपने प्रोफेशनल नहीं बल्कि नीजी जीवन को लेकर सुर्खियों में हैं। अभिनेता ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान बताया कि उनकी जिंदगी को पत्नी तान्या ने काफी आसान बना दिया है। अभिनेता खुद को अपनी पत्नी का तीसरा बच्चा मानते हैं।
बॉबी देओल का कहना है कि, “मेरी पत्नी सब कुछ संभालती हैं। उनके तीन बच्चे हैं, मैं खुद को उनका तीसरा बच्चा मानता हूं। वह खुद भी काम करती हैं और मेरे काम को भी संभालती हैं। मेरा मतलब है कि वह आर्थिक मामलों और बाकी चीजों का भी ध्यान रखती हैं। उन्होंने मुझे बिगाड़ दिया है।”
बॉबी देओल के इस बयान पर इंडियन एक्स्प्रेस की टीम ने आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट के एमपावर की मनोवैज्ञानिक रुतुजा वालावलकर से बातचीत की। उनका कहना है कि बॉबी देओल की बात हैरान करने वाली नहीं है। बल्कि खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पत्नी की इतनी खुलकर तारीफ और उनके योगदान की सराहना की। सफलता के पीछे अक्सर व्यक्ति की अपनी मेहनत को श्रेय दिया जाता है, लेकिन पर्दे के पीछे रहकर लगातार साथ देने वाले लोगों को पहचानना इस सफर को एक अलग और गहरी समझ देता है।
मनोवैज्ञानिक नजरिए से कितनी सही है बॉबी देओल की सोच
मनोवैज्ञानिक नजरिए से रुतुजा वालावलकर का कहना है कि किसी भी स्वस्थ रिश्ते में अपने साथी के प्रयासों की सराहना सबसे कम आंका जाने वाला, लेकिन सबसे जरूरी पहलू है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि, “लोग आमतौर पर रिश्ते में प्यार की उम्मीद के साथ आते हैं, लेकिन किसी भी रिश्ते के लंबे समय तक चलने के लिए एक चीज लगातार जरूरी होती है और वह है यह महसूस होना कि आपके प्रयासों को पहचाना और समझा जा रहा है।” उनके अनुसार रिश्तों को लेकर कपल्स की सबसे आम गलती यह होती है कि वे मान लेते हैं कि प्यार अपने आप ही सराहना का एहसास करा देता है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता।
रिश्ते में किन गलतियों से बचना चाहिए
वह बताता है कि, “जैसे-जैसे लोग काम, परिवार और दूसरी जिम्मेदारियों में व्यस्त होते जाते हैं, उनमें से कई लोग यह मानने लगते हैं कि उनके पार्टनर जानते हैं कि वे उनके हर काम के लिए आभारी हैं। लेकिन जब सराहना खुलकर व्यक्त नहीं की जाती, तो सामने वाले की मेहनत अनदेखी रह जाती है। व्यक्ति लगातार काम करता है और देता रहता है, लेकिन बदले में उसे अपनी कोशिशों के लिए सराहना नहीं मिलती। इससे धीरे-धीरे उपेक्षित महसूस होने लगता है।” हालांकि, जब किसी की सराहना खुले तौर पर की जाती है, तो उसका भावनात्मक असर और भी ज्यादा होता है। वह कहती हैं, “इसका मकसद दूसरों को यह दिखाना नहीं है कि आप किसी रिश्ते में हैं या किसी और से अपने रिश्ते की मंजूरी लेना है। इसके बजाय, यह सम्मान दिखाने का एक तरीका है। इससे आपके पार्टनर को महसूस होता है कि आपको उनके साथ होने पर गर्व है और आप इसे सबके समाने जाहिर करने में झिझकते नहीं हैं।”
अनदेखी मेहनत को पहचानना
रुतुजा वालावलकर इस बात पर जोर देती हैं कि बॉबी देओल की बात में सबसे महत्वपूर्ण यह था कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी पत्नी के उन कामों को पहचाना, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं या सम्मान मान लेते हैं। वह कहती हैं कि, “यह सच है कि पैसों को संभालना, रोजमर्रा की परेशानियों का ध्यान रखना, भावनात्मक रूप से साथ देना और घर चलाना लगातार मेहनत मांगता है। हालांकि, इन कामों की शायद ही कभी सराहना की जाती है, जबकि यही किसी परिवार को चलाने की बुनियाद होते हैं।”
रिश्ते में सराहना की ताकत
इसके आगे वह कहती हैं कि रिश्ते में सराहना का एक सकारात्मक असर देखने को मिलता है। “जब किसी व्यक्ति के प्रयासों को पहचाना जाता है, तो उसके लिए रिश्ते में भावनात्मक रूप से जुड़े रहने और अपना योगदान देते रहने की प्रेरणा बढ़ जाती है। किसी के प्रति आभार जताने से सामने वाला भी उसी तरह प्रतिक्रिया दे सकता है। इससे ऐसा माहौल बनता है, जहां दोनों लोग आलोचना या उपेक्षा के बजाय खुद को समझा और पहचाना हुआ महसूस करते हैं। छोटी-छोटी चीजें ही आखिरकार रिश्ते में भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत बनाती हैं।” आम तौर पर स्वस्थ रिश्ते सिर्फ रोमांटिक अंदाज या बड़े इशारों से नहीं बनते, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में पार्टनर के प्रयासों को पहचानने और उनकी सराहना करने से मजबूत होते हैं। वालावलकर कहती हैं कि, “एक साधारण ‘धन्यवाद’ कहना, पार्टनर की तारीफ करना और दूसरों के सामने उनकी मेहनत को स्वीकर करना उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकता है।”
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा बात किए गए विशेषज्ञों की राय पर आधारित है।
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