हर भोजन का अपना समृद्ध इतिहास रहा है। बिरयानी का इतिहास भी काफी पुराना है। बिरयानी का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में लखनऊ या हैदराबादी बिरयानी का ख्याल आता है। ये अपने स्वाद और जायके के लिए मशहूर है। हालांकि, हर क्षेत्र में इसका रंग, रूप और स्वाद बदल जाता है।कहीं मसाले तेज होते हैं तो कहीं हल्के और कहीं मांस प्रधान।

चिकन या मटन बिरयानी काफी पसन्द की जाती है। वहीं, शाकाहारी लोगों के पास भी बिरयानी के कई विकल्प हैं। भारत के साथ ही दुनिया में बिरयानी की वैरायटी की भरमार है। आइए जानते हैं बिरयानी का इतिहास क्या है।

बिरयानी का इतिहास (Photo Source: ChatGPT AI Image)

वर्तमान समय में बिरयानी दक्षिण एशिया के सबसे प्रसिद्ध भोजनों में से एक है। इतिहासकार मानते हैं कि भारत में बिरयानी मुगल काल के दौरान प्रचलित हुई। हालांकि, इसकी सटीक उत्पत्ति को लेकर आज भी मतभेद हैं।

फारस का पिलाऊ
इतिहासकार मानते हैं कि बिरयानी का संबंध फारसी व्यंजन (अब ईरान) ‘पिलाऊ’ या ‘बिरिंग बिरयान’ से है। पिलाऊ को ही भारत में पुलाव कहा जाता है।  यह ईरान में धीमी आंच पर पकाए जाने वाला व्यंजन है जिसे दही और मसालों में मेरिनेट कर मांस के साथ बनाया जाता है। माना जाता है कि ईरानी लोग जब भारत आए तो अपने साथ पिलाऊ भी लाए, जो समय के साथ अपने रूप, रंग और स्वाद को बदलते हुए बिरयानी बना।

भारत कैसे पहुंची बिरयानी (Photo Pexels)

दक्षिण भारत कैसे पहुंचा
कुछ विद्वान मानते हैं कि दक्षिण के मालाबार तट पर अरब व्यापारियों के माध्यम से बिरयानी भारत आयी। वहीं, प्राचीन तमिल साहित्य में दूसरी शताब्दी में ‘ऊन सोरु’ नामक चावल के व्यंजन का जिक्र किया गया है जिसमें चावल, घी, हल्दी, धनिया, काली मिर्च और तेजपत्ता डाल कर बनाया जाता है।

अकबर के समय की बिरयानी (Photo Source: Freepik)

आइने-अकबरी में जिक्र
इतिहासकारों के अनुसार मुगल बादशाह अकबर के ग्रंथ आइने-अकबरी में पुलाव और बिरयानी दोनों का उल्लेख मिलता है। इसमें दोनों व्यंजनों की सामग्री और उसकी मात्रा तक के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसमें दुज्द-बिरयान नामक व्यंजन का जिक्र है जिसमें चावल घी, मांस और नमक का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, कीमा पुलाव का भी जिक्र किया गया है जिसे चावल और मांस के साथ घी, छिली हुई दाल, अदरक, प्याज काली मिर्च, जीरा, इलायची और लौंग जैसी सुगंधित चीजों को डालकर बनाया जाता था। इतिहासकारों के अनुसार आइने-अकबरी में ही बिरयान नामक मसालेदार मटन व्यंजन का भी जिक्र किया गया है। इसे कई तरीकों से बनाया जाता था।

पिलाउ से बिरयानी बनने का सफर (Photo Source: Freepik)

17वीं शताब्दी में पुर्तगाली पादरी सोबास्टियन मैनरिके ने 1641 में शाहजहां के समय लाहौर की यात्रा की थी तो उन्होंने शाही तंबू-नगर में बिकने वाले व्यंजनों का जिक्र किया था। उन्होंने फारसी पुलाव और मुगल बिरयानी के बीच अंतर बताते हुए मुगल बिरयानी को अधिक सुगंधित और समृद्ध बताया था।

औरंगजेब को पसंद आया था बेटे का रसोइया
इतिहासकारों के अनुसार इसका जिक्र औरंगजेब के समय भी मिलता है। उनके पत्रों में बिरयानी का उल्लेख मिलता है। उन्होंने अपने बेटे को एक पत्र लिखे हुए कहा था कि, ” सर्दियों में तुम्हारी बनाई खिचड़ी और बिरयानी का स्वाद आज भी याद है। उन्हें इस्लाम खान द्वारा बनाई गई ‘काबुली’ को इसके आगे फीकी बताया था। साथ ही वह अपने बेटे के रसोइए को अपने पास बुलाने चाहते थे”।

मुगल काल में बिरयानी का विकास (Photo Source: Pexels)

मुगल काल की एक और कहानी है
माना जाता है कि मुगल रसोइयों ने बिरयानी को स्वादिष्ट और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने, समय के साथ इसमें कई प्रयोग किए। एक और कहानी शाहजहां के समय की है। कहा जाता है कि, एक बार शाहजहां की बेगम मुमताज महल ने मुगल सैनिकों को कमजोर हालत में देखा तो उन्होंने रसोइयों को मांस और चावल से पौष्टिक व्यंजन बनाने का आदेश दिया। इसके बाद उन्होंने जो व्यंजन बनाया उसे बिरयानी कहा गया। मुगल काल में बिरयानी को सुगंधित बनाने के लिए उसमें केवड़े का इस्तेमाल किया जाता है।

तैमूर लंग के सैनिक कैसे बनाते थे बिरयानी (Photo Source: Pexels)

तैमूर लंग के समय की बिरयानी
बिरयानी को लेकर एक और मत है कि तैमूर लंग ने जब 1398 ईस्वी में भारत पर आक्रमण किया था, तो उस दौरान उसके सैनिक शाम को जब जंग के बाद अपने डेरे में जाते थे तो मिट्टी के बर्तन में चावल, मसाले और मांस डालकर इसे गड्ढे में पकाते थे।

क्या कहते हैं इतिहासकार
फूड इतिहासकार लिजी कॉलिंघम अपनी एक किताब में लिखती हैं कि मुगल दरबार की रसोई में फारसी पिलाउ जब हिंदुस्तान के तीखे और सुगंधित चावल व्यंजनों से मिला तो के नई शाही डिश बिरयानी ने जन्म लिया। उनके अनुसार भारत में बिरयानी का विकास मुगल शासक अकबर (1556-1605) के शासनकाल में हुआ।

मुगलों और फारस से भी प्राचीन है बिरयानी का भारत से रिश्ता (Photo Source: Pexels)

वहीं, लेखिका प्रतिभा किरण के अनुसार बिरयानी की जड़ें भारत से ही हैं। उनका अनुमान है कि मध्याकालीन भारत में पिलाउ एक सैनिक भोजन हुआ करता था। उस दौरान एक ही बर्तन में चावल और लाल मांस पकाया जाता है। समय के साथ पकाने की अलग-अलग विधियों ने बिरयानी को रूप दिया।

मुगलों के आने से पहले भारत के इस क्षेत्र में मौजूद था ये व्यंजन (Photo Source: Pexels)

इस्लामी भोजन के इतिहास पर गहरी पकड़ने रखने वाली लेखिका सलमान हुसैन और अन्य कई शोधकर्ताओं का मानना है कि बिरयानी मुगल काल से पहले ही फारस से साउथ एसिया पहुंची थी। खासकर दक्षिण भारत के दक्कन क्षेत्र में। उनका मानना है कि यह व्यंजन यात्रियों, सौनिक-शासकों और तीर्थयात्रियों के माध्यम से आया होगा।

एक और मशहूर भोजन इतिहासकार के.टी. अचाया मानते हैं प्रचीन और प्रारंभिक मध्यकालीन भारतीय ग्रंथों में मांस और मसालों के साथ पकाए गए चावल का उल्लेख मिलता है। ऐसे में मिश्रित चावल व्यंजन मुगलों से भी पहले भारतीय भोजन संस्कृति का हिस्सा थे। तमिल में भी चावल से बने ‘ऊन सोरु’ नामक व्यंजन का जिक्र मिलता है जो मुगलों से भी प्राचीन भारतीय व्यंजन है।

भारत की मशहूर बिरायनी कौन कौन सी हैं (Photo Source: Freepik)

देशभर में मशहूर हैं बिरयानी की वैरायटी

सबसे मशहूर क्यों है हैदराबादी बिरयानी (Photo Source: Pexels)

1- हैदराबादी बिरयानी
भारत में सबसे अधिक प्रसिद्ध हैदराबादी बिरयानी है जो अपने खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती है। यह 18वीं सदी में निजामों के दौर में प्रसिद्ध हुई। इसमें मांस से ज्यादा महत्व केसर की सुगंध को दिया जाता था। यही पहचान आज भी है।

2- कलकत्ता बिरयानी
कलकत्ता बिरयानी भी खूब मशहूर है। इसमें मांस से ज्यादा प्राथमिकता सुनहरे आलू को दिया जाता है। मांस की संख्या कम होती है और सुनहरे तले आलू ज्यादा होते हैं। इसकी हल्की मिठास इसे अन्य बिरयानी से अलग बनाती है।

3- लखनवी बिरयानी
कई लखनवी फूड्स भी आज देशभर में मशहूर हैं जिसमें से एक बिरयानी भी है। यह अपने मुलायम और हल्के मसाले के लिए प्रसिद्ध है।

लखनवी बिरयानी (Photo Source: Freepik)

4- मेमनी बिरयानी
गुजरात और सिंध क्षेत्रों में लैंब यानी मेमने के मांस से बनी बिरयानी काफी प्रसिद्ध है। इसका स्वाद थोड़ा तीखा होता है। इसमें भूरे प्याज और आलू डालकर सर्व किया जाता है।

5- थालास्सेरी बिरयानी
केरल में थालास्सेरी बिरयानी काफी आम व्यंजन है, जो अपने मीठे और नमकीन स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इसे चिकन, भुने काजू, किशमिश और सौंफ डालकर बनाया जाता है। वहीं, चावल और ग्रेवी अलग-अलग पकाए जाते हैं।

भारतीय बिरयानी का स्वाद (Photo Source: Freepik)

6- सिंधी बिरयानी
सिंधी बिरयानी को बनाने में चिकन, सब्जियों और मसालों को इस्तेमाल किया जाता है। खासकर इसमें हरी मिर्च, भुने मेवे और आलूबुखारा डाला जाता है। जिसके चलते इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है।

मुगल, भारतीय या फारस- कहां से आई बिरयानी (Photo Source: Pexels)

यह तो तय है कि ‘पिलाऊ’ या ‘बिरिंग बिरयान’ भले की फारस का व्यंजन रहा हो, लेकिन बिरयानी मुगल शाही के रसोइयों से निकली हुई डिश है। हर मुगल शासक ने अपने-अपने शासनकाल में इसे लेकर कई बदलाव किए। कहीं इसे मांस के साथ पकाया गया, तो कहीं सब्जियों के साथ परोसा गया। आज भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में बिरयानी अपने रंग, रूप और स्वाद के लिए मशहूर है। बिरयानी के स्वाद पर आज भी कई प्रयोग किए जाते हैं।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।

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