ओवैसी और अखिलेश यादव को मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं? भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर से पूछा सवाल तो मिला था ये जवाब

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद से एक इंटरव्यू में अखिलेश यादव के गठबंधन को लेकर सवाल किया गया था। इसके जवाब में उन्होंने कुछ ऐसा कहा था।

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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Express Archive Photo)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी के लिए अखिलेश यादव प्रचार कर रहे हैं। अखिलेश ने साफ कर दिया था कि वह इन चुनावों में किसी बड़े दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। इसी क्रम में उन्होंने छोटे दलों के साथ गोलबंदी शुरू कर दी है। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर रावण की अखिलेश यादव से मुलाकात करने की चर्चा की खबरें जोरों पर हैं। लेकिन अखिलेश ने इन चर्चाओं को अफवाह बताकर खारिज कर दिया है।

इसके बाद चंद्रशेखर आजाद से अखिलेश और असदुद्दीन ओवैसी से गठबंधन को लेकर सवाल किया गया था। चंद्रशेखर से सवाल पूछा गया था, ‘ओवैसी मुसलमानों के हित की अधिकार की बात करते हैं। क्या इन दोनों को एक साथ आना चाहिए या नहीं?’ इसके जवाब में उन्होंने कहा था, ‘ये बात तो वो दोनों ही बता सकते हैं। आप मुझसे मेरे विषय में पूछते तो मैं आपको कुछ बता भी पाता, लेकिन पार्टी की कुछ गाइडलाइन होती हैं तो मुझे उसे ही मानना होगा। यही वजह है कि मैं किसी अन्य दल पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं।’

चंद्रशेखर से अगला सवाल किया गया था, ‘अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी को जो भी सत्ता में नहीं देखना चाहते हैं। ऐसे सभी दलों का हमारी पार्टी में स्वागत हैं। हम ऐसे सभी दलों को साथ लेकर चुनाव लड़ेंगे।’ इसके जवाब में चंद्रशेखर ने जवाब दिया था, ‘वो किस तरह काम करना चाहते हैं और वो क्या करना चाहते हैं। अब ये तो अखिलेश जी ही बता पाएंगे। अखिलेश जी अक्सर कहते हैं कि बीजेपी को हराना है, मैं सवाल करता हूं कि जिताना किसे है? मुझे लगता है कि ये लड़ाई अधिकारों की है। हमारी मांग है कि हमें अपने अधिकार पर ही गठबंधन करना चाहिए।’

चंद्रशेखर आजाद आगे कहते हैं, ‘ये कोई पहली बार नहीं है जब राजनतीक दल अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा पहले भी होता आया है। ओम प्रकाश राजभर जी ने भी तो बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। लेकिन जब अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाए तो उन्होंने पार्टी से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद वह विपक्षी दल ही बनकर रहे थे। लोग सिर्फ सम्मान और अधिकार की ही तो लड़ाई लड़ते हैं। कांशीराम जी ने बहुत पहले ही कह दिया था कि हमें सरकार मजबूत नहीं मजबूर होनी चाहिए। क्योंकि मजबूर सरकार ही गरीबों की भलाई कर सकती है।’

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