क्या आप भी मायावती जी को देवी की तरह पूजते हैं? भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर से पूछा सवाल तो मिला था ऐसा जवाब

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद से मायावती को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि हमारे यहां देवी की कोई धारणा नहीं है।

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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद (फाइल फोटो-पीटीआई)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद एक बार फिर चर्चा में हैं। यूपी की सियासत में चंद्रशेखर आज़ाद का कद बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है। यूपी के अलावा चंद्रेशेखर ने साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी अगले साल होने जा रहे दिल्ली नगर निगम चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारेगी। एक इंटरव्यू में उनसे जब बीजेपी को लेकर सवाल किया गया था तो उन्होंने साफ कहा था कि वह योगी सरकार का किसी कीमत पर समर्थन नहीं करेंगे क्योंकि बीजेपी से उनकी विचारधारा की लड़ाई है।

अब उनका एक अन्य इंटरव्यू वायरल हो रहा है। इसमें उनसे बीएसपी सुप्रीमो मायावती को लेकर सवाल पूछे गए थे। ‘UP Tak’ के साथ इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था, ‘बीएसपी और आपकी पार्टी एक ही वोट बैंक को टारगेट करती है। मायावती जी ने एक समय कहा था कि दलित उन्हें देवी की तरह पूजते हैं। क्या चंद्रशेखर भी उन्हें देवी की तरह पूजते या मानते हैं?’ इसके जवाब में उन्होंने कहा था, ‘जाति व्यवस्था बहुत खराब है। बाबा साहेब भी इसका बहिष्कार करते थे। हम लोग पैदा होते ही दलित नहीं होते हैं।’

चंद्रेशेखर ने आगे कहा था, ‘मैं प्रयास कर रहा हूं कि बहुजन समाज की बात उठाऊं। मैं दलितों की आवाज उठा रहा हूं। शिक्षक भर्ती अभी चल रही है तो कोई नेता नहीं गया और मैं वहां पड़ा रहा। अल्पसंख्यकों का सीएए-एनआरसी के मामले में मैंने लड़ाई लड़ी। मजदूरों, किसानों के लिए भी मैं ही आगे आया। एक दलित जाति में पैदा होने वाला सबका नेता हो सकता है ये बहुत कठिन है। योगी जी ठाकुर हैं तो वो सबके नेता हो सकते हैं। लेकिन दलित सिर्फ दलित का नेता हो सकता है, इसे मीडिया को नकारना चाहिए। हमारे यहां देवी की कोई धारणा नहीं है।’

स्कॉर्पियो से चलने वाले को आरक्षण क्यों चाहिए? इसके जवाब में चंद्रशेखर ने कहा था, ‘असली सवाल सामाजिक भागीदारी का है। सारा सिस्टम आपके हाथ में है और हम लोग तो अपना अस्तित्व ही खोज रहे हैं। बात इस घर की नहीं है, बात है कि हमारे समाज के कितने लोग सिस्टम का हिस्सा हैं? क्योंकि समाज का भला करने के लिए नीतियां बननी बहुत जरूरी हैं जब हमारे लोग ही सिस्टम में नहीं हैं तो हमारे बारे में कौन सोचेगा?’

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