बारिश का मौसम गार्डनिंग के लिए अनुकूल माना जाता है, लेकिन कुछ सावधानियां न बरतने पर यही मौसम पौधों के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। अगर आपका पौधा अचानक मुरझाने लगे, पत्ते पीले पड़ने लगें या बढ़ना बंद कर दें, तो इसकी वजह सिर्फ खाद या धूप की कमी या ज्यादा पानी देना नहीं, बल्कि Root Rot (जड़ों का सड़ना) भी हो सकता है।

समस्या यह है कि जब तक पत्तों में बदलाव दिखता है, तब तक कई बार जड़ों का काफी हिस्सा खराब हो चुका होता है। इसलिए शुरुआती संकेत पहचानना जरूरी है। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी (RHS) के मुताबिक लगातार गीली मिट्टी और खराब ड्रेनेज जड़ों के सड़ने का प्रमुख कारण हैं।

अब पहले जानें क्या होता है Root Rot?

रूट रॉट का मतलब है जड़ों का सड़ना। यह तब होता जब मिट्टी बहुत ज्यादा समय तक ज्यादा पानी से भरी रहती है। इसके पीछे की वजह यह भी है जब जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है या फिर फंसग-फफूंद जैसे रोग लग जाते हैं तो जड़े खराब होने लगती हैं। जड़ें पानी और पोषक तत्वों को ऊपर तक पहुंचाती हैं। जब वे खराब होने लगती हैं, तो पूरा पौधा धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाता है।

किन पौधों में खतरा ज्यादा रहता है?

कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो कम पानी पसंद करते हैं। इसलिए बारिश में इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए। जैसे स्नेक प्लांट, एलोवेरा, कैक्टस, सक्यूलेंट्स, ZZ प्लांट, जेड प्लांट।

पौधे की जड़े सड़ने से पहले देती हैं ये संकेत

पत्ते पीले पड़ने लगते हैं

अगर पौधे को पर्याप्त पानी मिलने के बावजूद पत्ते पीले हो रहे हैं, तो यह Root Rot का शुरुआती संकेत हो सकता है।

पौधा दिखता है मुरझाया हुआ

मिट्टी गीली होने के बावजूद पौधा झुका हुआ या मुरझाया दिखे, तो समझिए जड़ें ठीक से काम नहीं कर पा रहीं।

नई पत्तियां निकलना बंद होना

स्वस्थ पौधे लगातार नई ग्रोथ दिखाते हैं। अगर नई पत्तियां नहीं आ रहीं या बहुत छोटी निकल रही हैं, तो जड़ों की जांच करें।

मिट्टी से बदबू आना

सड़ी हुई जड़ों और फंगस की वजह से मिट्टी में सड़े अंडे जैसी या बासी गंध आने लग सकती है।

तना नीचे से मुलायम पड़ना

अगर मिट्टी के पास वाला हिस्सा दबाने पर नरम लगे, तो यह जड़ों और तने में सड़न फैलने का संकेत हो सकता है।

जड़ें काली और मुलायम होना

अगर पौधे को गमले से निकालने पर जड़ें सफेद या हल्के भूरे रंग की बजाय काली, भूरी, मुलायम या चिपचिपी दिखें, तो यह Root Rot की पहचान है।

बारिश में Root Rot से पौधों को बचाने के तरीके

मिट्टी सूखी लगे तभी पानी दें

बारिश के मौसम में रोज पानी देने की जरूरत नहीं होती। उंगली को 2–3 इंच मिट्टी में डालकर नमी जांचें। अगर मिट्टी अभी भी नम है, तो पानी न दें।

गमले में ड्रेनेज होल

गमले से अगर एक्स्ट्रा पानी बाहर नहीं निकलेगा, तो जड़ों के आसपास पानी जमा रहेगा और सड़न का खतरा बढ़ जाएगा। गमले के नीचे रखी प्लेट में जमा पानी भी 20–30 मिनट बाद खाली कर दें।

सही पॉटिंग मिक्स चुनें

बहुत भारी या चिकनी मिट्टी पानी रोककर रखती है। इसलिए 40 फीसदी गार्डन सॉइल, 30 फीसदी कोकोपीट, 20 फीसदी कम्पोस्ट, 10 फीसदी रेत या पर्लाइट का इस्तेमाल करें। इससे पानी आसानी से निकलता है और जड़ों तक हवा पहुंचती है।

बारिश में पौधों को सुरक्षित जगह रखें

अगर कई दिनों तक तेज बारिश हो रही हो, तो गमलों को ऐसी जगह रखें जहां रोशनी मिले लेकिन सीधे बारिश का पानी न गिरे।

पीले पत्तों को तुरंत हटाएं

बीमार पत्तियां फंगल संक्रमण फैलाने की वजह बन सकती हैं। इसलिए साफ कैंची से उन्हें काट दें।

जड़ों की समय-समय पर जांच करें

अगर पौधा बिना वजह मुरझा रहा है, तो उसे गमले से निकालकर जड़ों को देखें।

गमलों के बीच पर्याप्त दूरी रखें

पौधों को बहुत पास-पास रखने से हवा का प्रवाह कम हो जाता है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे फंगस का खतरा बढ़ता है।

संक्रमित मिट्टी दोबारा इस्तेमाल न करें

अगर किसी गमले में Root Rot हो चुका है, तो उसी मिट्टी का दोबारा उपयोग न करें। नई, साफ पॉटिंग मिक्स लें और गमले को अच्छी तरह साफ करें।

जरूरत से ज्यादा खाद न डालें

बारिश में पौधों की ग्रोथ का पैटर्न बदल सकता है। बहुत अधिक खाद देने से तनाव बढ़ सकता है और कमजोर जड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। संतुलित मात्रा में ही खाद दें।

पौधे खरीदते समय जड़ों की जांच करें

अगर नया पौधा खरीद रहे हैं, तो देखें कि जड़ें सफेद और स्वस्थ हों। पहले से संक्रमित पौधा आपके दूसरे पौधों तक भी समस्या पहुंचा सकता है।