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Baisakhi 2017: जानिए बैसाखी का त्योहार क्यों है खास, किसान के लिए क्या है इसका महत्व

Baisakhi 2017 Wishes: हर वर्ष इस त्योहार को 13 या 14 अप्रेल को मनाया जाता है। किसानो के लिए यह त्योहार एक नई उम्मीद और उमंग लेकर आता है। इस त्योहार का कृषि के जुडे होने के कारण विशेष महत्व है।
केरल में इस त्योहार को विशु के नाम से जानते हैं तो वहीं बंगाल में इस नब वर्ष कहते हैं। (photo source – Indian express)

भारत में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। इन्ही त्योहारो में से एक है बैसाखी का त्योहार। इस त्योहार को विशेष रुप से पंजाब से मनाया जाता है। हर वर्ष इस त्योहार को 13 या 14 अप्रेल को मनाया जाता है। किसानो के लिए यह त्योहार एक नई उम्मीद और उमंग लेकर आता है। इस त्योहार का कृषि के जुडे होने के कारण विशेष महत्व है। क्योंकि इसके त्योहार के बाद ही गेंहूं की फसल की कटाई शुरु होती है। कहा जाता है कि किसान इस त्योहार के बाद ही गेहूं की फसल की कटाई शुरु करते हैं। कुछ विशेषज्ञों की माने तो 13 अप्रैल 1699 को सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की। स्थापना करने के कारण इस दिन इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

बैसाखी त्योहार के दिन ही सिखों के नए साल की शुरुआत होती है। इस दिन के बाद से किसानों के खेतों में राबी की फसल की कटाई की शुरुआत होती है। इस त्योहार को देश के अलग- अलग हिस्सो में अलग- अलग नामों से जाना जाता है। केरल में इस त्योहार को विशु के नाम से जानते हैं तो वहीं बंगाल में इस नब वर्ष कहते हैं। तमिल में पुथंडू और बिहार में इसे वैषाख तो वहीं असम में रोंगाली बिहू के नाम से जाना जाता है।

इस त्योहार के विशेष होने का इंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह उठने के बाद किसान नहाकर पूजा-पाठ करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और घर में स्पेशल पकवान बनाए जाते हैं।

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