इन्होंने जान बचाई तो क्या हम भंडारा खाने आए थे? एलोपैथी विवाद के बीच बोले बाबा रामदेव; कहा- सच्चाई नहीं छिपा सकते

योग गुरु रामदेव और IMA के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। रामदेव ने अब एक बार फिर एलोपैथी से इलाज पर सवाल खड़े किए हैं। रामदेव ने कहा कि 95-98 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल की कोई जरूरत नहीं है।

Swami Ramdev
योग गुरु रामदेव (Photo- Indian Express)

योग गुरु रामदेव ने एलोपैथी से होने वाले इलाज पर कई सवाल खड़े किए थे। 22 मई को अपने एक बयान में रामदेव ने कहा था ‘एलोपैथी एक बकवास विज्ञान है’। रामदेव के इस बयान के बाद से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और रामदेव के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। अब रामदेव ने अपने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि एलोपैथी से सिर्फ 10 प्रतिशत गंभीर मरीजों का इलाज संभव है, 90 प्रतिशत मरीज योग से ठीक हुए।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए रामदेव ने बिल्कुल साफ शब्दों में कह दिया कि महामारी में सिर्फ डॉक्टरों ने ही लोगों की जान नहीं बचाई और अगर ऐसा कहा जाता है तो ये सबसे बड़ा झूठ है। रामदेव बोले, ‘इलाज इन डॉक्टरों ने ही किया, ये दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है। बीमारी का असली इलाज सिर्फ योग-नेचुरोपैथी में है। सिर्फ इन्हीं डॉक्टरों ने इलाज किया तो क्या हम भंडारा खाने आ गए? मैं नहीं मानता कि डॉक्टरों ने बहुत कुछ किया। लेकिन, ये कहना सिर्फ इन्हीं डॉक्टरों ने इलाज किया तो ये सरासर गलत होगा।’

रामदेव ने एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया के बयान का भी उदाहरण दिया जिसमें उन्होंने कहा था 90 प्रतिशत लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं। रामदेव बोले, ‘रणदीप गुलेरिया ने 90 प्रतिशत कहा, मैं कहता हूं 95-98 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। वे ठीक हुए हैं योग और स्वस्थ जीवन शैली से।’

रामदेव के दावों के बावजूद सरकार ने कोरोना की होमकिट में कोरोनिल को शामिल नहीं किया है। जब इस पर योग गुरु से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘ये कोई हमारा दोष नहीं है, ये सरकार की नीतियों का दोष है। आप इसे हम पर क्यों थोपते हो। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि डॉक्टरों ने किसी की जान नहीं बचाई। कई डॉक्टरों ने अपनी जान देकर लोगों की जान बचाई, उनका धन्यवाद। ऐसे समय में उन्हें मदद तो करनी ही चाहिए नहीं तो मेडिकल साइंस का क्या मतलब है। अस्पताल जाने से 10 प्रतिशत लोगों की जान डॉक्टरों ने बचाई, 90 प्रतिशत लोग योग-आयुर्वेद से बची।’

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल ये पूरा विवाद रामदेव के एक बयान से शुरू हुआ। 22 मई को रामदेव ने अपने एक बयान में कहा- ‘एलोपैथी एक बकवास विज्ञान है’। इस पर IMA ने कड़ी नाराजगी जताते हुए रामदेव से तुरंत अपना बयान वापस लेने के लिए कहा। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए रामदेव से बयान वापस लेने के लिए कहा। रामदेव ने ट्विटर पर एक पत्र शेयर कर बयान वापस ले लिया।

इसके बाद रामदेव ने 25 सवालों की एक लंबी-चौड़ी लिस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने एलोपैथी और IMA से सवाल पूछे। योग गुरु ने तो ये तक सवाल कर लिया कि हिंसक, क्रूर और हैवान को इंसान बनाने वाली एलोपैथी में कोई दवाई बताएं? इसके बाद रामदेव का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह IMA को चुनौती भी दे रहे थे। अब ये मामला और गहरा गया है। IMA ने रामदेव के खिलाफ दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दी है। इसमें उनके खिलाफ महामारी एक्ट और राजद्रोह के तहत केस दर्ज करने की मांग की गई है।

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