मन वह सूक्ष्म और अदृश्य शक्ति है जिसके द्वारा मनुष्य सोचता है, महसूस करता है, इच्छा करता है, याद रखता है और निर्णय लेता है। मन के भीतर की दुनिया बहुत बड़ी होती है। इसमें तमाम तरह के विचार उत्पन्न होते हैं। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जिन्हें हर चीज जानने की इच्छा होती है। हर क्षेत्र में वह रुचि रखते हैं। शायद आपने अपने आसपास ऐसे लोगों को देखा होगा जो कॉफी पीते-पीते अचानक ग्रीक पौराणिक कथाओं पर बात करने लगते हैं, फिर कोई बेहद खराब मजाक कर दे और उसके कुछ ही देर बाद अंतरिक्ष से जुड़ी कोई दिलचस्प जानकारी साझा करने लगे। उनकी रुचियां पहली नजर में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग लग सकती हैं।
‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ क्या है
एक दिन वह इतिहास पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री देख रहा होता है, तो अगले दिन मनोविज्ञान के बारे में पढ़ रहा होता है। कुछ घंटों बाद वह कला, तकनीक या किसी बिल्कुल अनोखी चीज के बारे में मिली कोई रोचक जानकारी आपको भेज देता है। ऐसे लोगों के लिए अब एक नाम भी इस्तेमाल किया जाने लगा है ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ यानी अलग-अलग क्षेत्रों की चीजों में गहरी रुचि रखने वाला व्यक्ति। हाल ही में इंस्टाग्राम पर ‘तुशार्स एस्केप’ के एक रील के बाद इस शब्द ने लोगों का ध्यान खींचा। इस रील में ‘इंटेलेक्चुअल ओम्रीवोर’ यानी ऐसे लोगों के बारे में बताया गया, जो एक पल किसी ‘गंभीर दार्शनिक विषय’ पर चर्चा कर सकते हैं और अगले ही पल कोई ‘बेवकूफी भरा मजाक’ कर सकते हैं। उन्हें कई अलग-अलग विषयों के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी होती है। कई बार वे बिल्कुल सामान्य बातचीत के बीच ऐसी बात भी कह देते हैं, जो आपको सोचने पर मजबूर कर दे।
‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ पर एक्सपर्ट की राय
सुनने में यह उस दोस्त जैसा लगता है, जिसे हर चीज के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी होती है। लेकिन क्या वास्तव में ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ का मतलब यही है। माइंडवेल काउंसल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल ने इंडियन एक्सप्रेस की टीम को बताया कि ऐसा पूरी तरह नहीं है। जरूरी नहीं कि उन्हें सब कुछ पता हो, वे बस और जानना चाहते हैं। सिंघल के मुताबिक, ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ मूल रूप से ऐसा व्यक्ति होता है, जिसकी ज्ञान हासिल करने में व्यापक रुचि होती है। “ऐसे लोग दर्शन, मनोविज्ञान, इतिहास, विज्ञान, कला, संस्कृति, तकनीक, हास्य या रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े किसी भी विषय में रुचि ले सकते हैं।”
जानकारी से ज्यादा ज्ञान महत्व रखता है
किसी एक क्षेत्र में गहराई से विशेषज्ञता हासिल करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के विपरीत, ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ अलग-अलग विचारों और नजरियों को जानना पसंद करता है। जरूरी नहीं कि वह जिस भी विषय के बारे में पढ़े या जाने, उसमें विशेषज्ञ बनना चाहता हो। वह बस उसे समझना चाहता है। सिंघल कहती हैं, “यह बहुत सारी चीजों के बारे में जानकारी रखने से ज्यादा ज्ञान पाने की इच्छा के बारे में है। ऐसे लोग सवाल पूछना, नई चीजों के बारे में सीखना और उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं।” इसलिए अगर कभी आपके मन में किसी चीज को लेकर अचानक सवाल आया हो कि आखिर वह इस तरह काम क्यों करती है और फिर उसका जवाब जानने के लिए आप इंटरनेट पर घंटों अलग-अलग चीजें पढ़ते रहे हों, तो आप खुद को इस तरह के लोगों से जोड़कर देख सकते हैं।
एक पल गंभीर तो अगले ही पल मजाकिया क्यों
यहीं पर ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ की यह खासियत काफी दिलचस्प लगती है। सिंघल भी इस बात से सहमत हैं कि ऐसा व्यक्ति आसानी से गंभीर बातचीत से मजाक या हास्य की ओर जा सकता है। लेकिन इसका यह मतलब जरूरी नहीं कि उसका सोचने का तरीका बिखरा हुआ है। वह कहती हैं, “इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि वे अलग-अलग तरह के विचारों और अनुभवों को जानना चाहते हैं। दरअसल, अलग-अलग विषयों से जुड़ी उनकी जानकारी कई बार उन्हें बातचीत में दिलचस्प बना देती है
क्योंकि वे कई तरह के विषयों के संपर्क में रहते हैं, इसलिए वे ऐसी चीजों के बीच संबंध देख सकते हैं, जिन्हें सीमित रुचियों वाला व्यक्ति शायद नजरअंदाज कर दे। उदाहरण के लिए, इतिहास की किसी घटना पर हो रही बातचीत उन्हें इंसान के व्यवहार के बारे में सीखी कोई बात याद दिला सकती है। वहीं, मनोविज्ञान पर चर्चा करते-करते वे किसी फिल्म, किताब या फिर रोजमर्रा की जिंदगी के बिल्कुल अलग अनुभव से जुड़ी कोई बात समाने रख सकते हैं। और कई बार, अलग-अलग चीजों के बीच बनने वाले ऐसे अनोखे संबंध ही बातचीत को यादगार बना देते हैं।
क्या हर ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ बुद्धिमान होता है
सिंघल का कहना है कि हर ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ को बहुत ज्यादा बुद्धिमान मान लेना सही नहीं हैं। “मैं ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ को न तो कोई बिल्कुल अलग तरह का व्यक्ति मानूंगी और न ही ऐसा व्यक्ति, जो सामान्य से ज्यादा बुद्धिमान हो।” ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अलग-अलग विषयों को जानने-समझने और उनके बीच संबंध जोड़ने के लिए कितना इच्छुक है।
क्या कई चीजों को लेकर जिज्ञासु होना ही काफी है
जरूरी नहीं है कि अपने इंस्टाग्राम बायो में 10 तरह की रुचियां लिख लेने भर से कोई व्यक्ति ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ नहीं बन जाता। सिंघल के मुताबिक, जिज्ञासा इस व्यक्तित्व की सबसे अहम विशेषता है, लेकिन जरूरी यह है कि व्यक्ति अपनी जिज्ञासा को जानने और समझने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास भी करे। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति कह सकता है कि उसे इतिहास, मनोविज्ञान, खगोल विज्ञान और कला में रुचि है, लेकिन वह कभी-कभार ही इन विषयों के बारे में पढ़ता या जानता है। वहीं, एक ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ लगातार सवाल पूछता रहता है, नई जानकारी तलाशता है और ऐसे नजरियों को भी समझने की कोशिश करता है, जो उसके अपने विचारों से बिल्कुल अलग हो सकते हैं।
क्या थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला कहलाता है ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’
सिंघल कहती हैं कि, “जरूरी नहीं कि वे जिस चीज के बारे में जानना चाहते हैं, उसमें विशेषज्ञ बनें।” उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को मनोविज्ञान के बारे में इतनी जानकारी हो सकती है कि वह इतिहास पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री देखते समय चीजों को एक अलग नजरिए से समझने लगे। इससे उसके मन में इंसान के व्यवहार और उसकी सोच को लेकर जिज्ञासा पैदा हो सकती है। यही जिज्ञासा उसे किसी दूसरे विषय की ओर ले जा सकती है। बाद में वह खगोल विज्ञान के बारे में भी पढ़ सकता है, वहीं से कुछ रोचक बातें जान सकता है और फिर दोस्तों के साथ बातचीत के दौरान दोनों अलग-अलग विषयों से जुड़ी किसी बात को आपस में जोड़ सकता है। इसलिए ‘इंटेलेक्युअल ओम्नीवोर’ का मतलब सिर्फ ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिसे ‘हर चीज के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी हो।”
यह ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति नई चीजों को जानना चाहता है या नहीं, सवाल पूछता रहता है या नहीं, अनजान और नए विचारों को समझने की कोशिश करता है या नहीं और ऐसी चीजों के बीच संबंध खोज पाता है, जो पहली नजर में एक-दूसरे से बिल्कुल जुड़ी हुई नहीं लगतीं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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