फिटकरी आपने कभी न कभी जरूर देखी होगी। आजकल के लोग तो इसे ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन पहले लोग इसे कई तरह से प्रयोग में लाया करते थे। मामूली कट लगने या शेविंग के बाद होने वाली छोटी खरोंच पर इसे लगा लिया करते थे। आज भी कई घरों में यह डिब्बे या अलमारी में पड़ी मिल जाती है। मामूली कट लगने या शेविंग के बाद होने वाली छोटी खरोंच पर किया जाता था।

यहां फिटकरी से जुड़े ऐसे घरेलू उपाय बताए गए हैं जो आपके काम आ सकते हैं। स्किन और मुंह की बदबू के लिए इसे कैसे करें इस्तेमाल और किन बातों का रखें ध्यान आइए जानें। इससे पहले यह जान लें कि फिटकरी को हर समस्या का इलाज समझना सही नहीं है। खासकर चेहरे या मुंह से जुड़ी परेशानी में इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में और सावधानी के साथ करना चाहिए।

दाग-धब्बों के लिए फिटकरी का पानी

फिटकरी में एस्ट्रिंजेंट यानी त्वचा को कसने वाला गुण होता है। ऐसा माना जाता है कि त्वचा को थोड़ी देर के लिए कसा हुआ महसूस करा सकती है। इसके लिए बहुत कम मात्रा में फिटकरी को पानी में अच्छी तरह घोलकर इस्तेमाल किया जाता है। आंखों के आसपास इसे न लगाएं और जलन होने पर तुरंत धो दें। जरूरी बात इससे दाग-धब्बे स्थायी रूप से खत्म हो जाते हैं या रंगत बदल जाती है, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता।

नहाने के पानी में फिटकरी

कुछ लोग नहाने के पानी में थोड़ी मात्रा में फिटकरी डालकर इस्तेमाल करते हैं। इसे त्वचा की सामान्य सफाई के लिए पारंपरिक घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। कुछ लोग इसमें गुलाब जल मिलाकर भी त्वचा पर लगाते हैं। संवेदनशील या बहुत रूखी त्वचा वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।

मामूली कट या शेविंग के बाद

फिटकरी का यह बेहद पुराने घरेलू इस्तेमालों में से एक है। पहले के समय में शेविंग के दौरान लगे छोटे कट पर लोग अक्सर फिटकरी लगा लेते थे। इसके कसैले प्रभाव के कारण मामूली रक्तस्राव को रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे गहरे कट, बड़े घाव या संक्रमित त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए।

मुंह की बदबू में मदद के लिए

फिटकरी से बने कुछ माउथ रिंस पर हुए अध्ययनों में मुंह के बैक्टीरिया और प्लाक को कम करने की संभावना देखी गई है। इसलिए कुछ लोग फिटकरी के हल्के घोल से कुल्ला करने की सलाह देते हैं। लेकिन इसे सामान्य माउथवॉश या दांतों की बीमारी का इलाज नहीं मानना चाहिए। कुल्ला करने के बाद पानी थूक दें। फिटकरी वाला पानी निगलें नहीं।

दांतों और मसूड़ों की परेशानी में कुल्ला

यह भी पुराने घरेलू उपायों में से एक है। कुछ शोधों में alum वाले mouth rinse (मुंह कुल्ला करने वाले घोल) के इस्तेमाल से मुंह के बैक्टीरिया और दांतों पर जमने वाली परत (plaque) को कम करने में मदद मिल सकती है। फिर भी दांत दर्द, मसूड़ों से खून आना या संक्रमण जैसी समस्या होने पर सिर्फ फिटकरी पर निर्भर रहना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में डेंटिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

पैरों की बदबू के लिए

पैरों में ज्यादा पसीना आने की वजह से कई बार बदबू की समस्या हो जाती है। फिटकरी के कसैले गुणों के कारण कुछ लोग इसका इस्तेमाल पैरों की सफाई के लिए करते हैं। इसे हल्के घोल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन पैरों में खुजली, घाव, फंगल इंफेक्शन या त्वचा फटने की समस्या हो तो घरेलू उपाय करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख फिटकरी के पारंपरिक घरेलू इस्तेमाल और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। फिटकरी किसी बीमारी या त्वचा संबंधी समस्या का इलाज नहीं है। चेहरे, त्वचा, दांत या मसूड़ों पर इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करें और जलन या एलर्जी होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें। किसी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह को घरेलू नुस्खों का विकल्प न मानें।