अखिलेश यादव को अपनी गाड़ी में बैठाकर नेताजी के घर ले गए थे अमर सिंह, मुलायम सिंह यादव हो गए थे नाराज

दिवंगत राजनेता अमर सिंह ने बताया था कि मुलायम सिंह यादव एक बार अखिलेश से बहुत नाराज हो गए थे और वह खुद उन्हें कार में बैठाकर नेताजी के घर ले गए थे।

Akhilesh Yadav, Mulayam Singh Yadav
अखिलेश यादव के साथ मुलायम सिंह यादव (Photo- Indian Express)

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि इस बार वह किसी बड़े दल के साथ चुनाव नहीं लड़ेंगे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस साथ चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ था। इससे पहले मुलायम परिवार में कलह भी सामने आई थी।

दिवंगत राजनेता अमर सिंह ने अखिलेश यादव से नाराजगी का एक किस्सा साझा किया था। अमर सिंह ने टीवी शो ‘आप की अदालत’ में बताया था, ‘समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता बलराम यादव को अखिलेश यादव ने एक मिनट में बाहर कर दिया था। मुलायम सिंह यादव को जब ये बात पता चली तो वो बहुत नाराज हो गए थे। अपने साथ अखिलेश यादव को गाड़ी में बैठाकर मैं मुलायम सिंह यादव के घर ले गया था।

लखनऊ में अखिलेश से मिले: अमर सिंह आगे बताते हैं, ‘मैंने कहा कि कुछ भी हो अखिलेश है तो आपका बेटा ही। उनका जबरदस्ती हाथ पकड़कर मैंने अखिलेश के सिर पर रखवा दिया था। ये भी मैं कहूंगा कि अखिलेश यादव ने मुझे बहुत सम्मान भी दिया। हाल ही में मैं लखनऊ गया था तो अखिलेश 3-4 घंटे मेरे साथ घूमता रहा था। ये सारा जहर परिवार के एक व्यक्ति ने ही घोला है।’ इस बीच वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा कहते हैं, ‘कहीं आप रामगोपाल यादव की बात तो नहीं कर रहे हैं?’

दो वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था जिम्मेदार: अमर सिंह कहते हैं, ‘अब मैं कोई बात तो नहीं करना चाहता, लेकिन ये सब बातें सबको पता है। मुझे तो उन्होंने कहा कि अगर अमर सिंह यूपी आएंगे तो वापस नहीं जाएंगे। उनकी बातों को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने मुझे सुरक्षा भी दे दी।’ यूपी के दो वरिष्ठ अधिकारियों का जिक्र करते हुए अमर सिंह ने कहा था, ‘नवनीत सहगल और रमा रमण के इशारे पर अखिलेश यादव काम कर रहे हैं। जबकि इन अधिकारी के इशारे पर ही मुलायम सिंह पर सपा कार्यालय में लाठियां चलाई गई थीं।’

बता दें, साल 2017 के चुनाव में बीजेपी के 300 से ज्यादा सीटें मिली थीं और योगी आदित्यनाथ सूबे के मुख्यमंत्री बने थे। जबकि समाजवादी पार्टी सिर्फ 47 सीटों पर ही सिमट गई थी।

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