जीवन में सफलता के लिए सबसे पहली सीढ़ी अनुशासन को माना जाता है। सिर्फ सफलता ही नहीं मानसिक शांति और लक्ष्यों की प्राप्ति का भी इसे कुंजी माना जाता है। इसके बिना जीवन में भटकाव, तनाव और असफलता आती है। आज के आधुनिक युग में जिंदगी जितनी रफ्तार से आगे बढ़ रही है, अनुशासन उतना ही तेजी से पीछे छूटता जा रहा है। आज लोग लेट रात तक जगते हैं, घंटों फोन चलाते हैं, न खाने समय है और न ही सुबह उठने का समय है। यहां तक कि काफी लोग तो शारीरिक गतिविधियों से भी वंचित हैं। अगर घर में बच्चे हैं, तो उनको अनुशासन में रखना बेहद जरूरी है और इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसी और की नहीं बल्कि माता-पिता की होती है।

काफी लोग ऐसे हैं जो बच्चों के गलती पर उन्हें डांटता-फटकारते हैं। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी है कि उन्हें प्यार, धैर्य और सही मार्गदर्शन के साथ अच्छे व्यवहार की आदतें सिखाई जाएं। अनुशासन का मतलब सिर्फ बच्चों को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार बनाना है। कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से आप बच्चों को स्मार्ट तरीके से अनुशासन सिखा सकते हैं। आइए जानते हैं:

1- नियम क्यों है जरूरी

सही समय पर सोना, उठना और पढ़ने का नियम ही जीवन को सफल बनाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप अपने बच्चे के लिए कुछ जरूरी नियम तय करें और इसे लागू करने के लिए डांटने के बजाए उसे आसान भाषा में समझाएं। जैसे- समय पर सोना-उठना, खाना, पढ़ाई, खेल-कूद, अपनी चीजों को व्यवस्थित रखना और सबसे जरूरी स्क्रीन टाइम को सीमित रखना।

2- खुद उदाहरण बनें

बच्चे सबसे अधिक अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। यदि आप समय का पालन करते हैं, दूसरों से सम्मानपूर्वक बात करते हैं और नियमों का पालन करते हैं, तो बच्चे भी इन्हीं आदतों को अपनाते हैं। ऐसे में किसी और को देखकर अच्छी आदतों को अपनाने के लिए सबसे पहले खुद में बदलाव करें।

3- समझाने का तरीका

बच्चे गलतियां खूब करते हैं। कई बार ये छोटी होती हैं तो कभी बड़ी भी होती हैं। गलती करने पर बच्चे को डांटना या फटकारना नहीं चाहिए और न ही सजा देनी चाहिए। इससे उनके मन में डर बैठ सकता है और वे अपनी गलतियां और बातों को पैरेंट्स से छिपाने भी लग सकते हैं। ऐसे में बेहतर यही होगा कि गलती करने पर बच्चे को प्यार से समझाएं। उसे सही और गलत के बारे में बताएं। चीजों की जरूरत के बारे में समझाएं।

4- जिद को विकल्प में बदलें

कई बार बच्चे किसी चीज को लेकर जिद करने लगते हैं, ऐसे में अक्सर पैरेंट्स उन्हें डांटने लगते हैं। लेकिन इसका उनपर गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसके लिए आप बच्चों को विकल्प दे सकते हैं। मान लीजिए आपका बच्चा पढ़ाई के लिए मना कर रहा है, ऐसे में उसे विकल्प दें कि अगर पढ़ाई नहीं करोगे तो खेलने का समय कम हो जाए या नहीं जाने दें। उसे बताएं कि पहले पढ़ाई करे फिर खेलने या अपने मनपसंद का काम करे। ऐसे में आप छोटे-छोटे विकल्प की मदद से बच्चे में उसकी जिम्मेदारी को सरल तरीके से समझा सकते हैं। इससे उन्हें सही निर्णय लेने की भी आदत पड़ती है।

5- सराहना

बच्चों की जब सराहना करते हैं, तो वे खूब खुश होते हैं। उन्हें अच्छा लगता है कि उनके काम की तारीफ हो रही है। इससे बच्चा भविष्य में भी अच्छे कामों को दोहराने के लिए प्रेरित होता है। आप उसकी छोटी-छोटी चीजों की प्रशंसा करें। अगर आपके नियमों का वह पालन करता है, तो उसकी तारीफ करें।

6- धैर्य और निरंतरता जरूरी

अनुशासन एक दिन में नहीं आता है। इसके लिए एक लंबा समय लगता है। किसी भी चीज में जल्दबाजी न करें। आपने जो भी नियम बनाया है उसे बार-बार बदले नहीं और न ही नियमों के पालन करने में बार-बार ढील दें। बच्चों को निरंतरता और धैर्य से सिखाई गई बातें लंबे समय तक याद रहती हैं।

7- माहौल क्यों जरूरी

आप अपने घर के माहौल को इस तरह बनाएं कि बच्चे को अनुशासन दबाव नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा लगे। जिस घर में प्यार, सम्मान और भरोसे का माहौल होता है, वहां बच्चे इसे जीवन का हिस्सा मानते हैं। इसके साथ ही बच्चों की बातों को जरूर सुनें। उसे समझने की कोशिश करें कि वह क्या कहना चाहता है और इसका हल क्या है। उसे प्यार से समझाएं कि कौन सा व्यवहार सही और कौन सा गलत है।

अनुशासन में रहने से बच्चों में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और अच्छे संस्कार भी विकसित होते हैं। इसलिए बच्चों को डांटकर नहीं समझदारी के साथ उन्हें जीवन के मूल्यों के बारे में बताने की कोशिश करें।

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