चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू होने जा रहे हैं। इसमें देवी भक्त 9 दिनों तक माता की उपासना करते हैं। बहुत सारे लोग दूर-दूर मंदिरों में जाकर मैया के दर्शन करते हैं। माता के 51 शक्तिपीठ हैं। देवी पुराण के मुताबिक मां के शक्ति पीठ भारत ही नहीं बल्कि आसपास के देशों में भी स्थापित हैं।

शक्तिपीठ वो जगह हैं जहां माता सती के अंग और आभूषण 51 टुकड़ों में गिरे थे। यह स्थान बेहद पवित्र और अलौकिक हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से सभी कष्ट दूर होते हैं। क्या आपको पता है यह कहां-कहां स्थित हैं और कहां माता सती का कौन सा अंग गिरा था। अगर नहीं तो आइए जानें पवित्र धामों की पूरी सूची।

पहले जानें 51 शक्तिपीठ का रहस्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दक्ष भव्य यज्ञ करा रहे थे तब उन्होंने सभी देवी-देवताओं को इसके लिए आमंत्रित किया। वहीं माता सती और भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। शिवजी के मना करने के बाद भी वह यज्ञ के आयोजन में पहुंच गई। वहां उन्हें देखकर राजा दक्ष बहुत क्रोधित हो गए।

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उन्होंने सती के सामने भगवान शिव का बहुत अपमान किया। इससे दुखी होकर वह अग्निकुंड में कूद गईं और प्राण त्याग दिए। यह खबर फैलते ही तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। शिवजी सती की देह उठाकर तांडव करने लगे। ऐसा करने से सृष्टि पर खतरा मंडराने लगा।

तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को भस्म कर दिया। इसी दौरान उनके शरीर के 51 टुकड़े हुए और वो धरती पर अलग-अलग जगहों पर गिर गए। जहां-जहां उनके अंग और आभूषण गिरे वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ।

कहां गिरा था माता सती का कौन सा अंग?

1) कात्यायनी, मथुरा- बाल

2) अमरनाथ, जम्मू कश्मीर- गला

3) फुलारा, पश्चिम बंगाल- निचला होंठ

4) ज्वाला देवी, कांगड़ा- जीभ

5) ललिता, प्रयागराज- उंगलियां

6) नारायणी, कन्याकुमारी- ऊपरी दांत

7) सावित्री, कुरुक्षेत्र- सीधे पैर का टखना

8) मगध, पटना- शरीर का दाहिना भाग

9) दाक्षायनी, बुरांग(तिब्बत)- दाहिनी हथेली

10) महिषासुरमर्दिनी, कोल्हापुर- तीसरी आंख

11) भ्रामरी, नासिक- ठोड़ी

12) अंबाजी, गुजरात- दिल

13) गायत्री, पुष्कर- कलाई

14) अंबिका, भरतपुर- बायां पैर

15) सर्वशैल पूर्वी, गोदावरी- बायां गाल

16) श्रावणी, कन्याकुमारी- रीढ़ की हड्डी

17) गंडकी चंडी, नेपाल- गाल

18) त्रिपुरमालिनी, जलंधर- लेफ्ट ब्रेस्ट

19) विशालक्षी, वाराणसी- कुंडल

20) बहुला, पश्चिम बंगाल- बायां हाथ

21) महिषमर्दिनी, पश्चिम बंगाल- भौंहों के बीच सिर का भाग

22) दक्षिणा काली, कोलकाता- उंगलियां

23) देवगर्भा, बीरभूम- हड्डी

24) विमला मुर्शिदाबाद- मुकुट

25) कुमारी शक्ति, हुगली- कंधा

26) नर्मदा, अमरकंटक- दायां नितंब

27) रामगिरि, चित्रकूट -दायां वक्ष

28) भ्रमरांबा, कुरनूल- दाहिनी पायल

29) महाशिरा, काठमांडू- कूल्हे

30) हिंगलाज, पाकिस्तान- सिर

31) सुगंधा, बांग्लादेश- नाक

32) जय दुर्गा, झारखंड- कान

33) जेसोरेश्वरी, बांग्लादेश- हथेली

34) भवानी, बांग्लादेश- दाहिना हाथ

35) महा लक्ष्मी, बांग्लादेश- गर्दन

36) श्री पर्वत, लद्दाख – दाएं पैर की पायल

37) पंच सागर,वाराणसी- निचला दाड़

38) मिथिला, दरभंगा – बायां कंधा

39) रत्नावली, चेन्नई- दायां कंधा

40) कालमाधव, अन्नुपुर- बायां नितंब

41) नागपूशनी, श्रीलंका- पायल

42) भ्रामरी, जलपाईगुड़ी- बायां पैर

43) नंदिनी, पश्चिम बंगाल- हार

44) मंगल चंडिका, पश्चिम बंगाल- दाहिनी कलाई

45) कपालिनी पुरबा, पश्चिम बंगाल- बायां टखना

46) अवंती, उज्जैन- ऊपरी होंठ

47) जयंती, मेघालय- बायीं जांघ

48) त्रिपुरा सुंदरी, त्रिपुरा- दायां पैर

49) बिराजा, ओडिशा- नाभि

50) अपर्णा, बांग्लादेश- बाएं पैर की पायल

51) कामाख्या, गुवाहाटी- योनि

डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।