कई जानवर इंसानों के हाव-भाव, आवाज, चेहरे के भाव और व्यवहार में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को बारीकी से महसूस कर सकते हैं। यही वजह है कि अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या जानवर इंसानों का झूठ भी पकड़ सकते हैं? हालांकि अब तक इसका कोई प्रमाणिक साक्ष्य नहीं है कि जानवर इंसानों का झूठ पहचान सकते हैं। लेकिन कई रिसर्च बताती हैं कि वे इंसानी व्यवहार में होने वाले बदलाव, तनाव, घबराहट और भावनात्मक बदलावों पर प्रतिक्रिया जरूर देते हैं।
इंसान अक्सर अपनी भाषा और तर्क पर गर्व करता है, लेकिन असल में कई जानवर इंसानी व्यवहार में होने वाले बदलावों को पहचानने में उनसे बेहतर माने जाते हैं। पॉलीग्राफ के आविष्कार या माइक्रो-एक्सप्रेशन के अध्ययन से बहुत पहले ही जानवर जीवित रहने के लिए कई जरूरी संकेतों जैसे आवाज के लहजे, शरीर की मुद्रा, गंध और व्यवहार में बदलाव को पहचानना सीख गए थे, जो बताते हैं कि कुछ गड़बड़ है। ऐसे कई जानवर हैं जो इंसानों के बदलते संकेतों को पहचान सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 जानवरों के बारे में, जिन्हें इंसानी हाव-भाव और व्यवहार को समझने में माहिर माना जाता है।
कुत्ते
जानवरों में कुत्ते सबसे बेहतर तरीके से इंसानों के व्यवहार को समझने वाले माने जाते हैं। कई रिसर्च के अनुसार कुत्ते भरोसेमंद और अविश्वसनीय इंसानों के बीच फर्क कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति बार-बार खाने वाले डिब्बे के बजाय खाली डिब्बे की ओर इशारा करता है, तो कुत्ते जल्दी ही उसके इशारों पर भरोसा करना छोड़ देते हैं। वहीं सीखे हुए व्यवहार के अलावा कुत्तों के सूंघने की क्षमता भी तेज होती है। तनाव के समय निकलने वाले स्ट्रेस हार्मोन से इंसान के शरीर की गंध में हल्का सा बदलाव आता है, जिसे कुत्ते तुरंत पहचान लेते हैं। कुत्ते चेहरे के हाव-भाव और आवाज में होने वाले बदलाव को समझने में माहिर होते हैं।

घोड़े
घोड़े शिकार बनने वाले जानवर हैं, इसलिए उनमें खतरे को जल्दी और सही तरीके से पहचानने की क्षमता विकसित की है। वे इंसानों की बॉडी लैंग्वेज, दिल की धड़कन और भावनात्मक स्थिति को बेहद बारीकी से महसूस कर सकते हैं। कई स्टडीज में पाया गया है कि घोड़े असली शांति और केवल दिखावे के आत्मविश्वास के बीच अंतर समझ सकते हैं। अगर कोई घुड़सवारी करते समय असहज या डर महसूस कर रहा है, तो घोड़े तुरंत पहचान लेते हैं। ऐसे इसलिए क्योंकि घोड़े इंसान की बॉडी पॉश्चर, मांसपेशियों के तनाव और भावनात्मक संकेतों में अंतर को पहचान लेते हैं, जिससे वे खुद भी असहज या बेचैन हो सकते हैं।

तोता
तोता बहुत ही होशियार होता है जो इंसानों के व्यवहार को समझ लेता है। भले ही वे झूठ न पकड़ पाएं, लेकिन इंसानों के व्यवहार और हाव-भाव को अच्छी तरह समझने में सक्षम होते हैं। हालांकि वे नैतिक रूप से यह नहीं पहचान सकते है कि कौन झूठ बोल रहा है, लेकिन व्यवहार में होने वाली गलतियों को वे जल्दी भांप लेते हैं। अगर किसी इंसान की आवाज, चेहरे के भाव और रोजमर्रा का व्यवहार आपस में मेल नहीं खाते, तो तोते बेचैन हो सकते हैं या उस व्यक्ति से दूरी बनाने लगते हैं। उनकी याददाश्त काफी तेज होती है और वे आवाजों को लंबे समय तक याद रख सकते हैं। यही वजह है कि वे पहचान लेते हैं कि कोई परिचित व्यक्ति सामान्य तरीके से व्यवहार कर रहा है या नहीं।

हाथी
हाथी अपनी इमोशनल इंटेलिजेंस और सामाजिक जागरूकता की वजह से जाने जाते हैं। वे अपनी प्रजाति और इंसानों, दोनों के छोटे-छोटे भावनात्मक संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हैं। कंजर्वेशनिस्ट और रिसर्चर ने यह देखा है कि हाथी इंसानों के शांत व्यवहार और धोखे भरे या बेचैन व्यवहार के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। खास तौर पर भरोसे से जुड़े मामलों में, जैसे खाना खिलाना या मेडिकल केयर।

चूहा
लेबोरेटरी स्टडीज में पाया गया है कि चूहे फर्क कर सकते हैं कि कौन-सा इंसान उनसे अच्छा व्यवहार करता है और कौन नहीं। समय के साथ चूहे उन इंसानों के साथ ज्यादा घुलना-मिलना पसंद करते हैं, जो उनके साथ अच्छा व्यवहार करता है। जब कोई इंसान उनके साथ असामान्य व्यवहार करता है या नकारात्मक व्यवहार करता है, तो चूहे उनसे दूर रहने की कोशिश करते हैं। इससे पता चलता है कि ये जानवर शब्दों की बजाय व्यवहार के पैटर्न के आधार पर भरोसेमंद इंसान की पहचान कर सकते हैं।

