Gardening Tips: रुक्मिणी के पौधे को इक्सोरा के नाम से भी जाना जाता है। यह अपनी चमकदार पत्तियों और खूबसूरत फूलों की वजह से घर के गार्डन, बालकनी या गमले की रौनक बढ़ा सकता है। इसमें लाल, गुलाबी, पीले और नारंगी रंग के फूल बड़े-बड़े गुच्छों में खिलते हैं। सही देखभाल न मिलने की वजह से कई बार पौधा हरा-भरा रहते है लेकिन उसमें पर्याप्त फूल नहीं खिलते हैं। इस वजह से पौधे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।

अगर आपने घर में रुक्मिणी का पौधा लगाया है और उसमें कम फूल आ रहे हैं या पौधा हर-भरा नहीं दिख रहा है, तो यह आर्टिकल आपके काम आ सकता है। यहां बताई गई गार्डनिंग टिप्स की मदद से आप पौधे की देखभाल कर सकते हैं और उसे लंबे समय तक घना और हर-भरा बनाए रख सकते हैं।

मिट्टी और ड्रेनेज की सही व्यवस्था

पौधे के बेहतर विकास के लिए सही मिट्टी बहुत जरूरी होती है। अगर पौधा लगा हुआ है, तो समय-समय पर गुड़ाई करते रहें। पौधे को स्वस्थ रखने के लिए गमले में ड्रेनेज की व्यवस्था सही रखें। मानसून के दौरान पौधे की मिट्टी को ज्यादा पानी देने की आवश्यकता नहीं है। जब मिट्टी की ऊपरी परत सूख जाए, तभी उसमें पानी दें।

पर्याप्त धूप है जरूरी

रुक्मिणी के पौधे को हरा-भरा और स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो उसे रोजाना कम से कम 4-6 घंटे की सीधी धूप वाली जगह पर रखें। अगर पौधा छाया में रहेगा तो उसकी पत्तियां हरी-भरी रहेंगी लेकिन फूल कम हो सकते हैं। इसलिए इसे पर्याप्त रोशनी वाली जगह पर रखें।

समय-समय पर प्रूनिंग करें

रुक्मिणी की लंबी और फैली हुई टहनियों को हल्की प्रूनिंग की जा सकती है। सूखी, कमजोर और खराब टहनियों को हटाएं। इससे पौधा स्वस्थ रहता है और उसमें नई शाखाएं निकल सकती हैं। अगर लंबे समय से रुक्मिणी के पौधे की ग्रोथ नहीं हो रही है, तो प्रूनिंग न करना भी इसका एक कारण हो सकती है।

जैविक खाद का इस्तेमाल

पौधे की ग्रोथ के लिए समय-समय पर जैविक खाद या वर्मीकंपोस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। खाद से पौधे की ग्रोथ बेहतर हो सकती है और नए फूल खिलने में भी मदद मिल सकती है। इसके लिए केले के छिलकों से बना जैविक खाद इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही नियमित रुप से लिक्विड फर्टीलाइजर का इस्तेमाल पौधों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। करीब 20 से 25 दिनों पर गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट दे सकते हैं।