वर्तमान समय में कई ऐसे भारतीय व्यंजन हैं जिनकी दीवानगी न सिर्फ देश बल्कि दुनिया में भी है। भारतीय रसोई में वेज से लेकर नॉनवेज व्यंजनों की भरमार है। कई ऐसे भारतीय व्यंजन हैं जिनके बनाने का तरीका, स्वाद और उनकी पौष्टिकता के चलते लोग बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं। इस वक्त दो ऐसे भारतीय सीफूड व्यंजन सामने आए हैं, जिन्हें विश्व भर में व्यापक रूप से पसंद किया जा रहा है। दरअसल, “टेस्ट एटलस नाम की एक ऑनलाइन फूड गाइड ने दुनिया के 100 सबसे लोकप्रिय सीफूड व्यंजनों की लिस्ट जारी की है।” इसी लिस्ट में भारत के दो लोकप्रिय व्यंजनों को जगह मिली है। टेस्ट एटलस ने पश्चिम बंगाल की चिंगरी मलाई करी को 63वां स्थान और केरल की करीमीन पोलिचाथु को 94वें स्थान पर रखा है।
क्यों इतनी खास है चिंगरी मलाई करी
गोवा के टिकिटी (Tikitii) रेस्टोरेंट में एग्जीक्यूटिव शेफ वीरेंद्र सिंह राय बताते हैं कि, यह उन व्यंजनों में से एक है, जिसमें सादगी ही इसकी खासियत है। वह बताते हैं कि, “बंगाल का यह बेहद लोकप्रिय व्यंजन नारियल के दूध, खुशबूदार साबुत मसालों और ताजे झींगों के बेहतरीन मेल के लिए जाना जाता है। झींगों की प्राकृतिक मिठास नारियल के दूध की मलाईदार बनावट के साथ अच्छी तरह मिलती है। इसमें सही मात्रा में डाला गया मसाला इसके स्वाद को और बेहतर बना देता है।”
शेफ और फूड राइटर सदाफ हुसैन बताते हैं कि बंगाल और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सदियों से ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। व्यापारिक रास्तों, औपनिवेशिक दौर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कारण दोनों क्षेत्रों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। इससे एक जगह के खान-पान का प्रभाव दूसरी जगह तक पहुंचने का रास्ता भी बना। उनके अनुसार, “मलेशिया और सिंगापुर के व्यंजनों में आमतौर पर लेमनग्रास और गलंगल जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है, जबकि बंगाली चिंगरी मलाई करी में ऐसा नहीं होता।” इसके बजाय बंगाली तरीके से बनाई जाने वाली इस करी में स्थानीय सामग्री और ऐसे मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो बंगाल की पारंपरिक खान-पान की संस्कृति से जुड़े हैं।
इससे पहले टेस्ट एटलस ने चिंगरी मलाई करी को दुनिया के ‘बेस्ट श्रिम्प डिशेज’ की सूची में 11वां स्थान दिया था।
करीमीन पोलिचाथु की खासियत क्या है
करीमीन पोलिचाथु केरल का एक पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय सीफूड व्यंजन है। यह केरल की खास समुद्री भोजन बनाने की शैली की बेहतरीन मिसाल है। शेफ राय के अनुसार, “इस व्यंजन की ताजी करीमीन यानी पर्ल स्पॉट मछली को मसालेदार और खुशबूदार मसाला पेस्ट में मैरीनेट किया जाता है। इसके बाद मछली पर स्वादिष्ट मसालों का पेस्ट लगाया जाता है और इसे केले के पत्ते में लपेटकर पारंपरिक तरीके से तवे पर पकाया जाता है, जब तक कि मछली पूरी तरह नरम न हो जाए।” केले का पत्ता मछली में एक खास हल्की मिट्टी जैसी खुशबू और स्वाद जोड़ता है। साथ ही, यह मछली को नरम और रसदार बनाए रखने में मदद करता है और सभी मसालों के स्वाद को अच्छी तरह मिलाता है।
शेफ राय का कहना है कि करीमीन पोलिचाथु की सबसे खास बात मछली की ताजगी और मसाले के गर्म, गहरे और हल्के तीखे स्वाद के बीच संतुलन है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आराम देने वाला व्यंजन भी है और केरल की पारंपरिक सीफूड संस्कृति को अच्छी तरह दर्शाता है।
टेस्ट एटलस की लिस्ट में शामिल अन्य मशहूर सीफूड व्यंजन
1- कोंचिटास ए ला परमेसाना
कोंचिटास ए ला परमेसाना पेरू का लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है, जिसे आमतौर पर स्टार्टर के रूप में परोसा जाता है। इसमें स्कैलप्स के ऊपर कद्दूकस किया हुआ पार्मेजान चीज डाला है और फिर इसे कुछ मिनट तक ग्रिल किया जाता है।
2- टाकोस गोबर्नाडोर
मेक्सिको के लोकप्रिय व्यंजनों में से एक टाकोस गोबर्नाडोर भी है, जिसका नाम सिनालोआ के एक गवर्नर के नाम पर पड़ा है। इसे बनाने के लिए गर्म टॉर्टिला में झींगे, कद्दूकस किया हुआ चीज, धनिया, प्याज और टमाटर भरे जाते हैं। इसके बाद टॉर्टिला को आधा मोड़कर मक्खन लगाया जाता है और तवे पर पकाया जाता है।
3- ओटोरो निगिरी सुशी
ओटोरो निगिरी सुशी को जापानी व्यंजनों की एक बेहद खास और महंगी डिश माना जाता है। इसमें हाथ से दबाकर बनाए गए सुशी राइस के ऊपर टूना मछली के फैटी हिस्से के स्लाइस रखे जाते हैं। टूना के अलग-अलग हिस्सों को ओटोरो( फैटी), चुटोरो (मीडियम-फैटी) और अकामी (रेड मीट) के नाम से जाना जाता है।
4- कलामार तावा
कलामार तावा तुर्की का एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसमें साफ किए गए स्क्विड को मोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इन्हें दूध में भिगोने के बाद आटा, बेकिंग सोडा और नमक से बने घोल में डुबोकर गर्म तेल में तला जाता है। इसे आमतौर पर तुर्की टार्टर जैसी सॉस और नींबू के टुकड़ों के साथ परोसा जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों से हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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