Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनडीपीएस एक्ट के तहत एक मादक पदार्थ मामले में आरोपी 60 साल की महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने टिप्पणी की कि इसी तरह के अपराधों में बार-बार शामिल होने के कारण उसने एक महिला होने की विश्वसनीयता खो दी है।”
जस्टिस मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 26 मार्च, 2026 के उस आदेश को चुनौती देने वाली एसएलपी की सुनवाई कर रही थी, जिसमें शाहडोल जिले के धनपुरी पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/20 के तहत दर्ज अपराध संख्या 186/2025 के संबंध में महिला की चौथी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
याचिकाकर्ता के आचरण पर कोर्ट ने उठाया सवाल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में ही पीठ ने याचिकाकर्ता के आचरण पर सवाल उठाया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने टिप्पणी की, “आप यह सब क्यों कर रहे हैं? इस उम्र में आपको एक शालीन जीवन जीना चाहिए।”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सी. अंकिता अप्पन्ना ने कहा कि ट्रायल धीमी गति से चल रहा है। पिछले एक साल में केवल दो गवाहों से पूछताछ की गई है, जबकि अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों का हवाला दिया था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आपराधिक इतिहास की ओर ध्यान दिलाया। जस्टिस मिश्रा ने टिप्पणी की, “आप पहली बार अपराध करने वाली व्यक्ति नहीं हैं। आपका एक इतिहास रहा है।”
जब वकील ने जोर दिया कि याचिकाकर्ता की उम्र और स्वास्थ्य स्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए तो बेंच सहमत नहीं हुई। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “आपने एक महिला होने की विश्वसनीयता खो दी है। अब आप एक महिला नहीं, बल्कि एक ‘लेडी डॉन’ हैं।”
जवाब में, वकील ने तर्क दिया कि बार-बार आपराधिक मामले दर्ज होने से ही किसी को लगातार हिरासत में रखने का औचित्य साबित नहीं होता और जिस व्यक्ति पर पहले से ही मुकदमा चल रहा हो, उसे आसानी से नए मामलों में फंसाया जा सकता है। वकील ने कहा, “राज्य की मशीनरी ऐसी है कि अगर मैं एक मामले में अंदर जाती हूं, तो मुझे आसानी से दूसरे मामले में फंसाया जा सकता है।”
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता 28 मई, 2025 से हिरासत में है। अपनी याचिका में, उसने हाई कोर्ट द्वारा जमानत देने से इनकार करने को चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि उससे बरामद कथित नशीला पदार्थ की सीमा से कम था। इसलिए, एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत सख्त पाबंदियां लागू नहीं होनी चाहिए।
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