Supreme Court Judge News: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार ने शनिवार को युवा वकीलों से अनुशासन और लंबे समय तक काम करने की संस्कृति अपनाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने युवा वकीलों में अपने करियर की शुरुआत में ही वीकेंड पर छुट्टी लेने की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रति आगाह भी किया।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि सफलता के लिए अपने पेशे के लिए समर्पण जरूरी है और यह सिर्फ काम के घंटे सीमित करके हासिल नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, “आपको अपने पेशे के प्रति पूरी तरह समर्पित होना चाहिए। जब आप खुद को अपने काम में पूरी तरह झोंक देंगे, तभी नतीजे उत्साहजनक होंगे और इसका जीता-जागता उदाहरण कोई और नहीं, बल्कि मैं खुद हूं। इसलिए मैं सभी युवाओं से अपील करता हूं कि वे बार-बार छुट्टी न लें। मैंने यह चलन खासकर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में देखा है। रविवार को काम न करना और शनिवार शाम से ही छुट्टी मनाना। जबकि बेंगलुरु में, हमारी कोई छुट्टी नहीं होती थी।”
बेंगलुरु में हमारी कोई छुट्टी नहीं होती थी- जस्टिस अरविंद कुमार
जस्टिस अरविंद कुमार ICA के 5वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। जस्टिस कुमार ने इसकी तुलना बार में अपने शुरुआती दिनों से की, जब लंबे समय तक काम करना और बहुत कम ब्रेक लेना ही सामान्य बात थी। उन्होंने बताया, “बेंगलुरु में, हमारी कोई छुट्टी नहीं होती थी। एकमात्र छुट्टी रविवार को शाम 4:30 बजे के बाद मिलती थी। इसके अलावा, हम हमेशा काम करते रहते थे। सुबह जल्दी से जल्दी 11:30 बजे और देर से देर 1:30 बजे तक।”
वकालत के दिनों का एक किस्सा शेयर किया
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पेशेवर विकास के लिए लगातार प्रयास और समर्पण बहुत जरूरी हैं, काम के घंटे कम करने से सीखने और अनुभव पाने का अवसर कम हो सकता है। जस्टिस कुमार ने समर्पण के महत्व को रेखांकित करने के लिए अपने शुरुआती वकालत के दिनों का एक निजी किस्सा भी साझा किया।
एक आर्बिट्रेशन मामले में वे अपनी शादी के महज कुछ ही दिनों बाद सुनवाई में शामिल हुए थे। उसे याद करते हुए उन्होंने बताया, “तुम्हारी शादी तो परसों ही हुई थी और तुम आज यहां मौजूद हो।” अपने इस फैसले की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं अपनी दलीलों की लय (flow of reasoning) को टूटने नहीं देना चाहता था। मैं सीखना चाहता था।” उन्होंने वकीलों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने काम में ईमानदारी बरतें और अपने वरिष्ठों का सम्मान करें।
ट्रांसजेंडर महिला को दिल्ली शिक्षक भर्ती में आवेदन करने मिली अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ट्रांसजेंडर महिला को दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षक के रूप में भर्ती के लिए “ट्रांसजेंडर” श्रेणी के तहत आवेदन करने की अनुमति दी है। साथ ही दिल्ली सरकार के अधीन सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग रिक्तियों और एक व्यापक भर्ती नीति की मांग करने वाली उसकी व्यापक याचिका पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की। पढ़ें पूरी खबर…
