पूर्व अभिनेत्री त्विषा शर्मा की मौत मामले में सास और पूर्व जज गिरिवाला सिंह को गुरुवार को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने इसकी जानकारी भोपाल के मुख्य जिला न्यायाधीश को दी थी। इस खबर में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि किया क्या पूर्व जज की तरह अन्य किसी आरोपी को सीबीआई या पुलिस गिरफ्तार करती है तो क्या इसकी जानकारी संबंधित जिला जज को दी जाती है।
इस सवाल को लेकर जब सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील एपी सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है। ऐसा नहीं कि सीबीआई ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया तो इसकी जानकारी वहां के प्रधान न्यायाधीश को दी गई है। सिंह ने बताया कि यह प्रक्रिया है। जब पुलिस या सीबीआई किसी आरोपी को गिरफ्तारी करती है तो 24 घंटे के अंदर इसकी जानकारी उस जिले के मुख्य न्यायाधीश को देनी होती है।
सीनियर अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि फिर चाहें वह पूर्व जज की न होकर किसी सांसद, विधायक,मंत्री या किसी आम आदमी की गिरफ्तारी क्यों न होती, तब भी पुलिस या एजेंसी वहां के जिला न्यायाधीश को 24 घंटे के अंदर जानकारी देती। उन्होंने कहा कि कानून सभी लिए बराबर है। ऐसा नहीं है कि गिरिबाला, पूर्व जज हैं इसलिए सीबीआई ने भोपाल के न्यायाधीश को जानकारी दी, आम आदमी क्यों न होता तब भी पुलिस या सीबीआई या फिर कोई और एजेंसी इसी प्रक्रिया का पालन करती।
वहीं, इलहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक ने बताया कि पुलिस या सीबीआई को 24 घंटे के अंदर आरोपी को अदालत में भी पेश करना होता है। इसके बाद जांच एजेंसी अदालत से आरोपी की रिमांड की मांग करती है। रिमांड के दौरान सीबीआई का मुख्य काम अपराध की कड़ियों को जोड़ना और सबूत जुटाना होता है। पूछताछ में आरोपी से घटना का समय, कारण, अन्य साथियों के नाम और सबूत छिपाने की साजिश से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।
उन्होंने बताया कि अगर मामले में एक से ज्यादा आरोपी या गवाह हैं, तो उन्हें आमने-सामने बैठाकर उनके बयानों का मिलान किया जाता है। बयानों में विरोधाभास होने पर कड़ाई से पूछताछ की जाती है। कई बार सीबीआई आरोपी को उस जगह ले जाती है, जहां अपराध हुआ था। वहां घटना को री-क्रिएट करके यह समझने की कोशिश की जाती है कि वारदात कैसे हुई।
‘टनल व्यू’ जांच क्या है? त्विषा मौत मामले में सीबीआई इसके जरिए कर रही जांच
टनल व्यू के बारे में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील एपी सिंह बताते हैं कि यह एक ऐसी डिजिटली पद्धति या तकनीक है। जिसमें किसी अपराध के अंतिम क्षणों को पुनर्निर्माण किया जाता है। इसमें पुलिस और जांच एजेंसियां कई तरह की जानकारी एक साथ मिलाती हैं। पढ़ें पूरी खबर।
