कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और उनके परिवार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां के पास एक नहीं तीन पासपोर्ट है। तीनों लिविंग पासपोर्ट हैं। जिसमें अबू धाबी, इजिप्ट और तीसरा एंटीगुआ बारबुडा का है। जिनका मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में जिक्र नहीं किया गया।
पवन खेड़ा के आरोप के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा ने उन दस्तावेजों की जांच नहीं की जिनके आधार पर उनके परिवार पर आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद असम पुलिस की टीम ने मंगलवार को पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर तलाशी ली। यह तलाशी रिनिकी भुइयां द्वारा दर्ज कराए गए एक मामले के सिलसिले में की गई।
असम पुलिस द्वारा कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज FIR में मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित BNS की 14 धाराओं के तहत आरोप शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, एफआईआर में पवन खेड़ा और अज्ञात को आरोपी बनाया गया है। इसमें चुनाव के संबंध में झूठा बयान देना, धोखाधड़ी, जालसाजी से संबंधित विभिन्न आरोप, आपराधिक धमकी, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना, शांति भंग करने वाले बयान देना, मानहानि और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।
ऐसे में आइए BNS की उन 14 धाराओं का मतलब और उसके अंतर्गत सजा का प्रावधान जानते हैं इन विभिन्न धाराओं में आरोपी को कितनी दिन की सजा और जुर्माना देना पड़ सकता है।
BNS की धारा 175
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 175 चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के खिलाफ झूठे बयान फैलाने या प्रकाशित करने से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए किसी उम्मीदवार के व्यक्तिगत आचरण या चरित्र के बारे में झूठ बोलता है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी होगा। इस धारा के अंतर्गत यदि व्यक्ति झूठ जानता है या मानता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।
BNS की धारा 3(5)
BNS 2023 की धारा 3(5) (पुराना IPC धारा 34) ‘सामान्य आशय’ (Common Intention) के सिद्धांत पर आधारित है। इसके अनुसार, यदि कई लोग मिलकर कोई आपराधिक कृत्य करते हैं, तो हर व्यक्ति उस अपराध के लिए ऐसे जिम्मेदार होगा, जैसे उसने वह अपराध अकेले किया हो। यह सामूहिक साजिश में शामिल सभी लोगों को समान रूप से दोषी ठहराती है।
BNS की धारा 3(6)
BNS की धारा 3(6) (पूर्ववर्ती IPC धारा 35 के समान) आपराधिक इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा किए गए साझा कृत्य से संबंधित है। यह धारा बताती है कि यदि कोई अपराध आपराधिक इरादे से कई लोग मिलकर करते हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति उस अपराध के लिए उतना ही जिम्मेदार होगा जितना कि उसने अकेले किया हो।
BNS की धारा 318
भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 धोखाधड़ी (Cheating) से संबंधित है, जो पुराने IPC की धारा 415 और 420 का स्थान लेती है। यह धारा कहती है कि यदि कोई व्यक्ति बेईमानी से किसी को धोखा देकर, संपत्ति सौंपने, या शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, तो वह 318 के तहत दोषी है।
इस धारा के अंतर्गत अगर वो साधारण धोखाधड़ी है तो तीन वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। वहीं अगर गंभीर धोखाधड़ी है जो धारा 318 (4) के अंतर्गत आती है तो 5-7 साल तक की सजा हो सकती है।
BNS की धारा 336 (4)
BNS 2023 की धारा 336(4) उन मामलों से संबंधित है जहां जालसाजी (Forgery) का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा/ख्याति को नुकसान पहुंचाना है। इसके तहत दोषी को 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है, यदि उसने जाली दस्तावेज का इस्तेमाल बदनाम करने के लिए किया हो।
BNS की धारा 337
भारतीय न्याय संहिता की धारा 337 (जो पुरानी IPC की धारा 466 के समान है) न्यायालय के रिकॉर्ड, सार्वजनिक रजिस्टर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, या सरकारी पहचान पत्रों (जैसे आधार, वोटर आईडी) में जालसाजी (Forgery) करने से संबंधित है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
BNS की धारा 338
BNS की धारा 338 मूल्यवान प्रतिभूतियों, वसीयतनामा, या गोद लेने के अधिकार पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी से संबंधित है। यह धारा ऐसे जाली दस्तावेज़ बनाने, या किसी को वित्तीय/चल संपत्ति हस्तांतरित करने वाले जाली दस्तावेज़ तैयार करने पर आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान करती है।
BNS की धारा 340
BNS की धारा 340 (जो पुराने कानून की धारा 471 के समान है) जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली बताकर इस्तेमाल करने से संबंधित है। इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी कि कोई दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जाली है। उसे धोखे से या बेईमानी से असली के रूप में इस्तेमाल करता है, तो उसे जाली दस्तावेज़ बनाने के बराबर ही दंडित किया जाता है। यह प्रावधान दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने और धोखाधड़ी रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
BNS की धारा 341(1)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 341(1) जाली मुहर, प्लेट या अन्य उपकरण बनाने या अपने पास रखने से संबंधित है, जिसका उद्देश्य जालसाजी करना है। इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी के इरादे से जाली मुहर/उपकरण बनाता है या उसे कब्जे में रखता है, तो उसे 7 साल तक की सजा और जुर्माने की सजा हो सकती है।
BNS की धारा 351(1)
BNS की धारा 351(1) आपराधिक धमकी को परिभाषित करती है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को उसके शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है, ताकि उसमें भय पैदा हो या उसे अपनी इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य करने के लिए मजबूर किया जा सके, तो यह एक अपराध है।
BNS की धारा 352
भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित है। यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी को इस हद तक उकसाता है कि उससे सार्वजनिक शांति भंग होने या कोई अन्य अपराध होने की संभावना हो।
BNS की धारा 353
BNS की धारा 353 (जो पहले IPC की धारा 505 के समान है) सार्वजनिक उपद्रव या भय फैलाने वाले झूठे बयानों, अफवाहों या रिपोर्टों के प्रसार को अपराध मानती है। यह धारा तीन साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों के साथ संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) अपराध है, जो सोशल मीडिया सहित डिजिटल माध्यमों पर गलत सूचनाओं को लक्षित करती है।
BNS की धारा 356
भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 मानहानि से संबंधित है। यह धारा किसी व्यक्ति, कंपनी या समूह की प्रतिष्ठा को जानबूझकर शब्दों, संकेतों या दृश्यों के माध्यम से नुकसान पहुंचाने को अपराध मानती है। दोषी को दो साल तक की जेल, जुर्माना, या कम्युनिटी सर्विस की सजा हो सकती है।
BNS की धारा 61 (2)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 (2), जो पूर्ववर्ती IPC की धारा 120B के समान है, आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy) के लिए सजा का प्रावधान करती है। यदि दो या अधिक व्यक्ति गंभीर अपराध (मौत, आजीवन कारावास, या 2 वर्ष से अधिक की सजा) की साजिश रचते हैं, तो उन्हें मुख्य अपराधी की तरह ही दंडित किया जाएगा।
‘पाताल से भी ढूंढ निकालेगी असम पुलिस’, घर से गायब हुए पवन खेड़ा तो हिमंता ने दी खुली चेतावनी
असम विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार से दो दिन पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर तीन विदेशी पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए थे। इसके बाद हिमंता की पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज कराई। जिसके आधार पर मंगलवार को असम पुलिस दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के घर पहुंची, जहां वे नहीं मिले। इसके बाद सीएम हिमंता का आक्रामक बयान आया है कि असम पुलिस किसी भी इंसान को पाताल से भी ढूंढ निकालेगी। पढ़ें पूरी खबर।
इंडियन एक्सप्रेस की असम संवाददाता सुकृता बरुआ के इनपुट के साथ।
