मुंबई में एक्सीडेंट के एक केस में 13 साल बाद फैसला आया है। इस मामले में तीन भाई-बहन वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर कार में थे तभी अचानक गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। हादसे में गंभीर रूप से घायल एक बहन को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। कुछ दिन बाद दूसरी बहन को पुलिस ने उसकी मौत का कारण बनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
घटना 14 अक्टूबर 2012 की हैं जब शाम को तीन भाई-बहन वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर कार में थे तभी अचानक हादसा हो गया। जिसके बाद एक बहन को गंभीर चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। कुछ ही दिन बाद दूसरी बहन को पुलिस ने उसकी मौत का कारण बनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उसे रिहा करने में 13 साल और एक सवाल का समय लगा।
एक सवाल के जवाब से आया केस का फैसला
सवाल यह था कि अगर पारुल खुराना लापरवाही से गाड़ी चला रही थी और उसकी वजह से उसकी बड़ी बहन गुंजन की मौत हुई थी तो उनका भाई जो उस रात कार में मौजूद था उसे बचाने के लिए झूठ क्यों बोलेगा? बोरीवली मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले महीने फैसला सुनाया कि वह ऐसा नहीं करेगा। इस फैसले के बाद पारुल को लापरवाही से गाड़ी चलाने और मौत का कारण बनने के आरोपों से बरी किया गया।
पुलिस का कहना था कि जब कार बिजली के खंभे से टकराई तब पारुल गाड़ी चला रही थी। पारुल के बयान का उसके भाई ने भी समर्थन मिला। उसके अनुसार, गाड़ी गुंजन चला रही थी और बेस्ट की बस के टकराने के बाद उसने नियंत्रण खो दिया। इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। ऐसे में मामला इस बात पर आकर टिक गया कि अदालत किसकी बात पर विश्वास करती है।
एक बहन की मौत, दूसरी आरोपी और भाई की गवाही
अदालत ने भाई की बात पर विश्वास किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट एएम मुजावर ने 27 मार्च को पारित और इस सप्ताह उपलब्ध कराए गए आदेश में लिखा, “अगर आरोपी की गलती थी और उसकी लापरवाही के कारण उनकी बहन की मृत्यु हुई थी तो कोई भी समझदार व्यक्ति दुर्घटना में मृत बहन के खिलाफ एक बहन को बचाने के लिए झूठी गवाही नहीं देता।”
पुलिस ने कहा कि कार खंभे से सीधे टकराई थी लेकिन अदालत में प्रस्तुत तस्वीरों से पता चला कि नुकसान गाड़ी के बाईं ओर और पीछे के हिस्से में हुआ था। अदालत ने गौर किया कि जांच अधिकारी ने कभी यह पता नहीं लगाया कि क्या बेस्ट बस भी इसमें शामिल थी जबकि सबूत इसी ओर इशारा कर रहे थे। अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी ने बस के बारे में कोई पूछताछ नहीं की, जिससे पता चलता है कि उसने सही जांच नहीं की।
अदालत ने कहा, “इस संबंध में तस्वीरें रिकॉर्ड पर पेश की गईं जिनमें वाहन के पिछले हिस्से में क्षति दिखाई देती है। इसलिए, इस समय आरोपी के बचाव पर विचार करना आवश्यक है। सभी तथ्यात्मक पहलुओं और रिकॉर्ड पर प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी द्वारा दिया गया बयान काफी हद तक संभावित प्रतीत होता है।”
आज की ताजा खबर, हिंदी न्यूज 8 अप्रैल 2026 LIVE
देश-दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लेटेस्ट अपडेट्स पढ़ने के लिए क्लिक करें
