सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की एक महिला वोटर को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को आदेश दिया कि महिला को जल्द से जल्द सुनवाई का मौका मिले, ताकि वह 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपना वोट दे सके। ऐसा इसलिए कि क्योंकि महिला के पास 2015 से वैध पासपोर्ट है। उसका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में भी था और वह तब से हर चुनाव में वोट देती रही है।

56 वर्षीय मनोवारा खातून एक प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं। उनकी ओर से याचिका दायर करने वाली अधिवक्ता रंजीता रोहतगी के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के बाद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, “एसआईआर प्रक्रिया के बाद याचिकाकर्ता को बाहर किए जाने से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने 3 अप्रैल को अपीलीय न्यायाधिकरण से संपर्क किया था। जिसमें कहा गया था कि हम अपीलीय न्यायाधिकरण से अनुरोध करते हैं कि याचिकाकर्ता की अपील पर यथाशीघ्र सुनवाई की जाए।”

खातून की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि महिला के पास पासपोर्ट है। उनका नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है और उन्होंने सभी चुनावों में मतदान किया है। उन्होंने बताया कि खातून ने 3 अप्रैल को अपनी अपील दायर की थी, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।

अपनी याचिका में खातून ने कहा कि वह विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं और रिलायबल एफएमएस प्राइवेट लिमिटेड, संचित विनिमय प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक और संचित विनिमय एलएलपी में भागीदार हैं। याचिका के अनुसार, इनमें से एक कंपनी फैसिलिटी मैनेजमेंट सेवाएं प्रदान करती है।

खातून ने कहा कि सभी मानदंडों को पूरा करने और याचिकाकर्ता के 2002 से नियमित मतदाता होने, 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम होने और 2015 से वैध भारतीय पासपोर्ट होने के बावजूद, उन्हें 27.03.2026 को प्रकाशित मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिया गया है या बाहर कर दिया गया है।

उन्होंने आग्रह किया कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में सतगछिया विधानसभा क्षेत्र संख्या 145 की मतदाता सूची में उनका नाम बहाल किया जाए और/या अपील न्यायाधिकरण को निर्देश जारी किए जाएं कि वह 3 अप्रैल को दायर उनकी अपील की सुनवाई के बाद उनके मामले पर तुरंत विचार करे ताकि उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में अपना वोट डालने की अनुमति दी जा सके, जो उनका वैधानिक अधिकार है।

ओडिशा में SIR से पहले ही हटाए गए 9.8 लाख नाम, चुनाव आयोग ने दिए वेरिफिकेशन के आदेश

ओडिशा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया मई से शुरू हो सकती है। इस बीच राज्य में 9.8 लाख नाम गलत तरीके से हटाने को लेकर शिकायत आनी शुरू हो गई, जिस पर चुनाव आयोग सख्त हो गया है। चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) ने फाइनल रोल तैयार करने से पहले सख्त वेरिफिकेशन का आदेश दिया है। CEO ऑफिस के अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि गलत तरीके से नाम हटाने के बारे में काफी शिकायतें मिली हैं, जिनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहां वोटर मौजूद पाए गए और ऐसे मामले भी हैं जहां बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने नाम हटाने से पहले न तो फील्ड विजिट किया और न ही सही वेरिफिकेशन किया। पढ़ें पूरी खबर।