Aravalli Row: अरावली पहाड़ियों की 100 मीटर ऊंचाई वाली विवादित परिभाषा को स्वीकार करने वाले अपने फैसले पर रोक लगाने के पांच महीने बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट अपना रूख साफ किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं को फिर से परिभाषित नहीं कर देती, तब तक अरावली के एक इंच हिस्से को भी खनन के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

खनन पट्टा धारकों और खनन पट्टा प्राप्त करने के इच्छुक लोगों की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा कि पट्टों को अंतिम रूप दिए बिना भी नवीनीकरण और पट्टों को देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, “हम अरावली में खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने की अनुमति देने वाला कोई आदेश पारित नहीं करेंगे।”

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम अरावली की एक इंच भूमि का भी किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे, जब तक कि हम उस नई परिभाषा से संतुष्ट नहीं हो जाते, जो हमारे द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तावित की जाएगी, जिसमें एमिकस क्यूरी के परमेश्वर, केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों द्वारा सुझाए गए नामों को ध्यान में रखा जाएगा।”

अरावली के पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर दशकों से हो रहे अवैध खनन के हानिकारक प्रभावों से भलीभांति परिचित मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा, “यह सारी समस्या शक्तिशाली खनन लॉबी के कारण उत्पन्न हुई है। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हमें रिपोर्ट प्राप्त किए बिना और आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों के बारे में हमें संतुष्ट किए बिना किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

पिछले साल 29 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अरावली पहाड़ियों के लिए 100 मीटर की ऊंचाई की परिभाषा को स्वीकार करने वाले सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर के फैसले पर पर्यावरणविदों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं का स्वतः संज्ञान लिया था। पीठ ने अरावली क्षेत्र में सभी खनन गतिविधियों और नए खनन पट्टों के नवीनीकरण को रोकने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर के फैसले के संचालन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए पीठ ने अपने आदेश में कहा था, “यह स्थगन तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि वर्तमान कार्यवाही तार्किक अंतिम स्थिति तक नहीं पहुंच जाती और यह सुनिश्चित करते हुए कि वर्तमान ढांचे के आधार पर कोई अपरिवर्तनीय प्रशासनिक या पारिस्थितिक कार्रवाई नहीं की जाती है।”

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की “संरचनात्मक और पारिस्थितिक” अखंडता की रक्षा के लिए एक व्यापक परिभाषा तैयार करने हेतु, उनका “विस्तृत, समग्र और वैज्ञानिक” परीक्षण करने के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया था। एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर ने अदालत को सूचित किया कि सरकार से परामर्श के बाद संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक सूची अदालत को सौंप दी गई है। पीठ ने कहा कि वह पक्षों की सुनवाई के बाद समिति के गठन हेतु मामले को जल्द ही सूचीबद्ध करेगी।

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