अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और उनके संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा फरवरी 2027 तक बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। कमेटी ने 28 फरवरी 2027 तक का अतिरिक्त समय मांगा था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कमेटी को अब 30 नवंबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि इसके बाद समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कमेटी की मांग पर नाराजगी जताते हुए कहा, ”कमेटी ने मूल रूप से मेरे रिटायरमेंट तक मामले को टालने के लिए समय मांगा है।” गौर करने वाली बात है कि CJI सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे।
कोर्ट ने कमेटी से कहा कि जरूरत पड़े तो दिन-रात काम करके तय समयसीमा में रिपोर्ट पूरी की जाए। कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत इस मामले से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनने का निर्देश भी दिया गया है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर किसी खास मुद्दे पर तुरंत फैसला जरूरी हो तो कमेटी उस पर अलग से अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इससे सुप्रीम कोर्ट जरूरी मामलों पर अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किए बिना फैसला ले सकेगा।
क्या है अरावली की परिभाषा का विवाद?
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें तत्कालीन CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने अरावली पहाड़ियों की पहचान के लिए ऊंचाई आधारित परिभाषा को मंजूरी दी थी। इसके तहत स्थानीय ऊंचाई से 100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंची भूमि को अरावली हिल्स और 500 मीटर के दायरे में आने वाली ऐसी दो या उससे अधिक पहाड़ियों को अरावली रेंज माना गया था।
इस परिभाषा को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध हुआ। पर्यावरण से जुड़े लोगों और संगठनों ने आशंका जताई कि इससे अरावली के 90 फीसदी से ज्यादा हिस्से को संरक्षण के दायरे से बाहर किया जा सकता है और वहां खनन का रास्ता खुल सकता है।
विरोध के बाद CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने 29 दिसंबर 2025 को उस फैसले पर रोक लगा दी थी। साथ ही पुरानी कमेटी की सिफारिशों को भी फिलहाल रोक दिया गया और अरावली की परिभाषा व उसके पर्यावरणीय असर की दोबारा जांच के लिए नई विशेषज्ञ कमेटी बनाने का आदेश दिया गया।
मई 2026 में कोर्ट ने नई हाई-पावर्ड कमेटी को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। समयसीमा खत्म होने के बाद कमेटी ने फरवरी 2027 तक अतिरिक्त समय मांगा, जिसे कोर्ट ने अब खारिज कर दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
