दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि आवासीय क्षेत्र में खुले कूड़ेदान और सार्वजनिक मूत्रालय उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि स्वस्थ वातावरण का अभाव याचिकाकर्ता के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन करता है। न्यायालय में यह याचिका एक अधिवक्ता ने दायर की थी, जिसके घर के बाहर कूड़ेदान और सार्वजनिक मूत्रालय बनाया गया था।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अमित बंसल ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को चार सप्ताह के भीतर इसे हटाने का निर्देश देते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण एक स्वस्थ जीवन का अभिन्न अंग है। स्वस्थ वातावरण का अभाव याचिकाकर्ता के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन करता है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के घर के ठीक बगल में सार्वजनिक मूत्रालय और खुले कूड़ेदान की उपस्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त उसके जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार शामिल है।
याचिकाकर्ता, अधिवक्ता रचित गुप्ता ने अदालत का रुख तब किया जब उनके आवास के ठीक बाहर एक खुला कूड़ेदान और एक सार्वजनिक मूत्रालय है। उन्होंने बताया कि इसका इस्तेमाल आस-पड़ोस के लगभग 150 निवासी करते थे।
याचिकाकर्ता ने कहा कि कूड़ेदान और मूत्रालय के आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए अधिकारियों से बार-बार किए गए अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके जवाब में, एमसीडी ने दावा किया कि मूत्रालय की नियमित सफाई की जा रही है।
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के अधिकारों के उल्लंघन को दूर करने के लिए ऐसे उपाय अपर्याप्त थे। यह न्यायालय याचिकाकर्ता के साथ-साथ अन्य निवासियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता है, क्योंकि सार्वजनिक मूत्रालय और खुले कूड़ेदान की उपस्थिति से आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैलती है। साथ ही इलाके के निवासी इस दयनीय स्थिति में रहने के लिए विवश हैं।
सुविधाओं के स्थानांतरण की संभावना तलाशने के लिए 7 अगस्त, 2025 को किए गए एक संयुक्त निरीक्षण में पाया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा सुझाया गया स्थान व्यवहार्य नहीं था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि क्षेत्र के अधिकांश घरों में पहले से ही निजी शौचालय हैं और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत, कचरा खुले डिब्बे में छोड़ने के बजाय सीधे घरों से एकत्र किया जाना चाहिए।
सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने एमसीडी को याचिकाकर्ता के आवास के बगल में स्थित खुले कूड़ेदान और मूत्रालय को चार सप्ताह के भीतर ध्वस्त करने और आवासीय संपत्तियों से कुछ दूरी पर सूखे और गीले कचरे के लिए एक उचित ढका हुआ कूड़ेदान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र पुलिस की जांच पर सवाल उठाए
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को YSR कांग्रेस पार्टी के एमएलसी अनंत उदय भास्कर उर्फ अनंत बाबू से जुड़े 2022 के हत्या मामले की जांच पर तीखी टिप्पणी की। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने पाया कि पुलिस और सत्ता में बैठे लोगों के बीच स्पष्ट सांठगांठ थी और जांच एजेंसी द्वारा भास्कर को जमानत दिलाने के प्रयास किए गए थे। यह भी पढ़ें।
