भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वह भारत लौटने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं बता सकते। क्योंकि उन्हें कानूनी रूप से यूनाइटेड किंगडम छोड़ने से प्रतिबंधित किया गया है।
विजय माल्या ने अपने वकील अमित देसाई के माध्यम कहा कि उनके पास सक्रिय भारतीय पासपोर्ट नहीं है और इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों के आदेशों द्वारा उन्हें ब्रिटेन से बाहर यात्रा करने से भी प्रतिबंधित किया गया है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ कर रही थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने माल्या से अदालत में पेश होने की बात कही थी। कोर्ट ने कहा था कि जब तक वह भारत वापस नहीं लौटते, तब तक वे उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे। अदालत ने माल्या से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या उनका देश लौटने का इरादा है।
मार्च, 2016 में भारत छोड़ने के बाद विजय माल्या ब्रिटेन में रह रहे हैं। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की हैं। एक में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती दी गई है और दूसरी में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है।
अदालत में वकील अमित देसाई ने माल्या का बयान पढ़ा। जिसमें कहा गया कि वह अपनी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बता सकते, क्योंकि उनका पासपोर्ट 2016 में भारतीय सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया था और क्योंकि इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों ने उन्हें देश छोड़ने से रोक दिया है।
देसाई ने कहा कि माल्या को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने या छोड़ने का प्रयास करने, किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज़ के लिए आवेदन करने या उसे अपने पास रखने की अनुमति नहीं है। किसी भी स्थिति में याचिकाकर्ता यह स्पष्ट रूप से बताने में असमर्थ है कि वह भारत कब लौटेगा।
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वरिष्ठ वकील ने आगे तर्क दिया कि माल्या की भारत में उपस्थिति अदालत के लिए भगोड़ा करार और अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ उनकी दलीलों पर सुनवाई करने के लिए आवश्यक नहीं है। देसाई ने अदालत को बताया कि अगर वह (माल्या) भारत में पेश होता है, तो ये सभी कार्यवाही निरर्थक हो जाएंगी, क्योंकि कानून कहता है कि एक बार अपराधी संबंधित अदालत में पेश हो जाता है, तो ये सभी आदेश रद्द हो जाएंगे।
बता दें, 70 वर्षीय माल्या पर कई हजार करोड़ रुपये के ऋण के भुगतान में चूक से जुड़े कथित धोखाधड़ी और धन शोधन के कई मामले दर्ज हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने जनवरी 2019 में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को माल्या के बयान का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की आगे की सुनवाई अगले महीने के लिए स्थगित कर दी है।
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