सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की घटना के मद्देनजर पूरे देश में इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की जांच करने पर विचार कर रहा है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर.महादेवन की बेंच ने मामले पर यह भी कहा कि वह सत्य निकेतन इमारत गिरने के मामले को दिल्ली हाईकोर्ट से अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार करेगी।
‘पूरे देश में ऐसी जांच होनी चाहिए’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमारे मन में पहले से यह योजना है कि पूरे देश में ऐसी जांच होनी चाहिए। हम इसे (दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही याचिका को) यहां ट्रांसफर करवा सकते हैं। हम इस मामले पर परसों यानी 10 सितंबर को सुनवाई करेंगे।”
कोर्ट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) और सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार कुमार सिन्हा ने इस मुद्दे पर एक याचिका का जिक्र किया। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी जिसमें देश भर के प्राइवेट पीजी अकोमोडेशन, हॉस्टल और छात्रों के रहने की अन्य सुविधाओं के निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग की गई थी।
अजीत कुमार सिन्हा ने कोर्ट को बताया, “हाल ही में हुई दुखद घटना को देखते हुए, यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है। हमने निरीक्षण का काम पूरा कर लिया है और आखिरी निरीक्षण आज दोपहर 2:30 बजे होना है।”
मामले को अपने पास ट्रांसफर कर लें- एसजी तुषार मेहता
मामले में सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में भी इसी तरह का मामला लंबित है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि वह इस मामले को अपने पास ट्रांसफर कर ले। SG मेहता ने कहा, “यह भयानक घटना है। हमारी संवेदनाएं बच्चों और उनके माता-पिता के साथ हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। हम ट्रांसफर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन मैं उस आदेश का जिक्र कर रहा हूं जो पारित किया गया था।”
सात लोगों की हुई मौत
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक PG बिल्डिंग के ढहने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें से पांच छात्र थे। साथ ही चार का इलाज चल रहा है। उस बिल्डिंग का इस्तेमाल लड़कों के पीजी के तौर पर किया जा रहा था और बताया जाता है कि मरम्मत का काम चलने के दौरान ढह गई।
जुलाई में भी कोर्ट ने जताई थी चिंता
इससे पहले जुलाई में, कोर्ट ने अनधिकृत और संभावित रूप से खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर सिविक अधिकारियों की विफलता पर चिंता जताई थी। यह चिंता साकेत में इमारत गिरने और मालवीय नगर के होटल में आग लगने की घटनाओं के बाद जताई गई थी।
कोर्ट ने अधिकारियों से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगते हुए IIT दिल्ली के प्रोफेसरों, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD) के अधिकारियों और एमिकस क्यूरी की एक टीम से साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर का तय समय-सीमा के भीतर जमीनी सर्वे कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी थी कि बिल्डिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई न करने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए MCD को निर्देश दिया कि वह इस बात की हाई लेवल जांच करे कि क्या उस बिल्डिंग के पास निर्माण की वैध अनुमति थी और किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करे। हाई कोर्ट ने असुरक्षित PG आवासों की बढ़ती संख्या और छात्रों के लिए संस्थागत हॉस्टल सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई थी। कोर्ट ने पाया था कि PG मालिक अक्सर स्वीकृत योजनाओं का उल्लंघन करके निर्माण कार्य करते हैं। अब इस PIL याचिका के सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किए जाने की संभावना है।
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दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर) को एक पांच मंजिला इमारत गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने शहर में छात्रावासों की भारी किल्लत को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
