Consumer Court News: एक ट्रेन में देरी के कारण एक युवती की शैक्षिक आकांक्षाएं धराशायी हो गईं। इसके बाद उत्तर प्रदेश की एक डिस्ट्रिक्टर कंज्यूमर फोरम ने रेलवे को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसे 9.1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने कहा कि ट्रेन में देरी वजह से युवती अपना एंट्रेंस एग्जाम नहीं दे पाई। इसकी वजह से उसका एक साल खराब हो गया। इतना ही नहीं उसे गंभीर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ा। कंज्यूमर कमीशन ने कहा, “रेलवे केवल तकनीकी खराबी या अन्य तकनीकी कारणों के आधार पर ट्रेन के आगमन में देरी को सही नहीं ठहरा सकता।”

याचिका को स्वीकार करते हुए, फोरम ने रेलवे को 45 दिनों के भीतर 9 लाख रुपये का मुआवजा, साथ ही वकील की फीस के रूप में 5000 रुपये और मुकदमेबाजी लागत के रूप में 5000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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क्या था पूरा मामला?

अब पूरे मामले की बात करें तो युवती को लखनऊ के चारबाग स्थित जय नारायण पीजी कॉलेज में एंट्रेस एग्जाम में शामिल होना था। एग्जाम के लिए रिपोर्टिंग टाइम दोपहर लगभग 12:30 बजे था, जबकि एग्जाम दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे तक होना था। हालांकि, ट्रेन दोपहर 1:34 बजे स्टेशन पर पहुंची, जो लगभग ढाई घंटे की देरी थी। इसकी वजह से युवती तय समय पर एग्जाम सेंटर नहीं पहुंच सकी और उसे पेपर में नहीं बैठने दिया गया। उसके पिता ने मानसिक पीड़ा और करियर में हुए नुकसान का हवाला देते हुए कंज्यूमर कोर्ट में 20 लाख रुपये के मुआवजे का मुकदमा दायर किया।

बता दें कि रेलवे किसी ट्रेन के आगमन में देरी को केवल तकनीकी खराबी या अन्य तकनीकी कारणों के आधार पर सही नहीं ठहरा सकता है। रेलवे अपनी ओर से लापरवाही और सेवा में कमी के कारण अवसर की हानि से होने वाली मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है, जब तक कि वह विशेष रूप से यह साबित न कर दे कि ट्रेन के आगमन में देरी उसकी अपनी गलती के कारण नहीं बल्कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति, प्राकृतिक आपदाओं, सिग्नल की विफलता या इसी तरह के कारणों से हुई थी।

यह साफ है कि शिकायतकर्ता ने सीबीएसई बोर्ड की तरफ से आयोजित की गई परीक्षा अच्छे सीजीपीए के साथ पास की और एक बेहतर यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने की आकांक्षा रखती थी। हालांकि, विपक्षी पक्षों की लापरवाही की वजह से वह एंट्रेंस एग्जाम में बैठने से वंचित रह गई।

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