भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों का रविवार की शाम विमोचन हुआ। भारत मंडपम में हुए कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहे। इस दौरान सीजेआई का मजाकिया अंदाज देखने को मिला। उन्होंने कहा कि आखिर तुषार मेहता को इन किताबों को लिखने का समय कहां से मिला।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “जब मैंने इन दोनों किताबों के पन्ने पलटे, तो मेरे मन में बार-बार एक ही सवाल आया, आखिर तुषार भाई को इन किताबों को लिखने का समय कहां से मिला?” मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि मेहता अपनी सुबह सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 1 में, दोपहर अन्य अदालतों और सरकारी कामों में और शाम को हजारों पन्नों के केस ब्रीफ पढ़ने में बिताते हैं।

सीजेआई ने बताई दो थ्योरी

सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तो मैंने इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की। मेरे पास दो सिद्धांत हैं। या तो तुषार भाई ने भगवान से दिन में 25वां घंटा मांग लिया है और उस आदेश को अपने लिए ही रखा है। या शायद उन्होंने कोर्ट रूम नंबर 1 में बैठकर हास्य लेखन का सबसे अच्छा समय खोज लिया है। उन्हें पता है कि न्यायाधीश पन्ने पलटते रहेंगे, इसलिए वे उस समय का उपयोग अपनी यादों को लिखने में करते हैं। यकीन मानिए, मेरा मानना ​​है कि दूसरा सिद्धांत ही सही है।”

अमित शाह ने क्या कहा?

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संस्थागत संतुलन के बारे में भी बात की और कहा कि लोकतंत्र की ताकत टकराव के बजाय आपसी सम्मान में निहित है। गृह मंत्री ने आगे कहा कि पिछले 76 सालों में भारत में संवैधानिक मर्यादाएं और संस्थागत सीमाएं बरकरार रही हैं।

उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए अत्यंत संतोष की बात है कि हमारे देश में संवैधानिक मानदंड और संस्थागत मर्यादाएं बरकरार हैं और परंपराओं और रीति-रिवाजों के माध्यम से हमने इन्हें और मजबूत करना जारी रखा है।” शाह के अनुसार, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच दशकों से कायम संतुलन को और मजबूत किया जाना चाहिए।

कर्नल सोफिया मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है, क्योंकि एमपी सरकार ने अपने मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी देने में देरी की। विजय शाह पर आरोप है कि उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। कर्नल कुरैशी ने पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया को जानकारी दी थी। पढ़ें पूरी खबर…