दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया है। शरजील इमाम के मामले में जमानत याचिका की यह दूसरी सुनवाई है।
सुनावई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि क्या कोई परिस्थितियां बदली हैं जो जमानत देने को उचित ठहराती हों। पीठ ने पूछा कि क्या कोई तथ्यात्मक घटनाक्रम हुआ है?
इमाम के वकील तालिब मुस्तफा ने बताया कि इस मामले की सुनवाई ठप्प पड़ गई है। उन्होंने कहा कि मुकदमा अभी भी उसी चरण में है जहां वह 7 महीने पहले था। न्यायालय को यह भी बताया गया कि आरोप पर बहस दो सौ दिनों से ज्यादा समय से चल रही है।
सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि इस संबंध में जवाब दाखिल किया जाएगा। न्यायालय ने आगे पूछा कि संरक्षित गवाह की स्थिति क्या है?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मुकदमा शुरू हुआ है।”
न्यायालय ने इस मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया। अदालत ने शरजील इमाम की इस दलील को भी दर्ज किया कि अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं और काफी समय बीत चुका है।
इसके अलावा, इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले शरजील इमाम को मुकदमे में देरी होने पर जमानत के लिए अदालतों में दोबारा जाने की स्वतंत्रता दी थी। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी है।
बता दें, दिल्ली दंगों का मामला राष्ट्रीय राजधानी में 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। इस मामले में शरजील इमाम और प्रदर्शनों में भाग लेने वाले कई अन्य लोगों पर दंगों को भड़काने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इमाम को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं।
इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
इसके बाद, मई में एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने यह राय व्यक्त की कि यूएपीए मामलों में भी जमानत नियम होना चाहिए और कारावास अपवाद। इसने दिल्ली दंगों के मामले में इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाले पहले के फैसले पर भी गंभीर आपत्ति जताई।
इसके चलते शरजील इमाम ने जमानत के लिए दोबारा सेशल कोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि, 4 जुलाई को सत्र न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी । इसके बाद इमाम ने सत्र न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील की। हाल ही में खालिद ने भी इसी तरह की जमानत याचिका दायर की थी। हालांकि, इमाम की याचिका के साथ ही उनकी याचिका भी खारिज कर दी गई।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने आरएसएस मानहानि मामले में मंत्री दिनेश गुंड्डू राव को नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने यह नोटिस ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत को खारिज कर दी थी। गुंडू राव पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले बयान देने का आरोप है। पढ़ें पूरी खबर।
